भजन संहिता 66:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

सारी पृथ्वी के लोग तुझे दण्डवत् करेंगे, और तेरा भजन गाएँगे; वे तेरे नाम का भजन गाएँगे।” (सेला)

भजन संहिता 66:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 66:4 का अर्थ

इस वचनों का सीधा अर्थ है कि समस्त पृथ्वी प्रभु की worship करेगी और उनके सामने दण्डवत होगी; सभी लोग उनके नाम के भजन गाएंगे। यह प्रवचन एक उद्घोषणा के रूप में है कि परमेश्वर की महिमा सब जगह प्रकट होगी और सब राष्ट्र उसका सम्मान स्वीकार करेंगे।

सं contextual background (परिप्रेक्ष्य)

भजन 66 एक आनन्द और उत्सव solicitation का गीत है। यह पुरानी व्यवस्था के पवित्र लोगों के लिए एक आम संदेश है कि परमेश्वर के कार्य, शक्ति और दयालुता के कारण पूरे संसार को उसका अभिषेक स्वीकारना चाहिए। यह भजन विश्वास में दृढ़ता और आशीर्वाद की पुष्टि देता है कि देशों के राजा और लोगों तक ईश्वर की महिमा पहुँचेगी।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • हर व्यक्ति और हर देश प्रभु की महिमा से अभिभूत हो उठेगा; यह उद्धार की सार्वभौमिक योजना का परिणाम है।
  • “तुझे दण्डवत् करना” से आशय है प्रभु पर पूर्ण submissión और उसकी पवित्रता की मान्यता।
  • “तेरा नाम का भजन” से युक्ति यह है कि ईश्वर की महानता का सम्मान उनके गुणों, करतूतों और वादों के द्वारा किया जाए।

सूक्ष्म मार्गदर्शन और साहित्यिक संकेत

प्राचीन टिप्पणीकारों की सूक्ष्म व्याख्या से हमारा फोकस यह है कि भक्ति और स्मरणीय कार्यों के माध्यम से विश्व प्रचार के लिए पहली प्रेरणा शुद्ध प्रभु-उद्धार की गवाही है। इनमें से 1–2 संकेत हैं:

• दण्डवत् करने का नया आयाम: केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन के व्यवहार में विषयांतरण।

• भजन-गायन के साथ आंतरिक परिवर्तन की अपेक्षा: सतत विश्वास और आशीर्वाद की अनुभूति।

संबद्ध ग्रंथों के संक्षिप्त cross-references

1) योहन्ना 4:23-24— सभी प्रकार के लोग सत्य और आत्मा के अनुसार ईश्वर की उपासना करें। यह दिखाता है कि दण्डवत् पूजा के आंतरिक स्रोत प्रेम और सत्य है, न कि बाहरी आडंबर।

2) भजन 96:3-4— विश्व के राष्ट्रों के लिए ईश्वर के अद्भुत कार्यों का उद्घोष, ताकि सब जगह उसका नाम और महिमा गूंजे।

3) उस्रेल के संदर्भ में शास्त्रीय नमूना: nations recognizing Yahweh की महिमा मानते हैं, यह प्रेरितों के समय से gospel proclamation की व्यापकता को संकेत करता है।

सूक्ष्म निहितार्थ के लिए व्यावहारिक takeaway

  • हमारा जीवन परमेश्वर के वास्तविक महिमत्त्व के अनुरूप होना चाहिए—भजन, प्रार्थना और नैतिक आचरण के मिलन से।
  • विश्व के भीतर प्रभु की महिमा फैलाने के लिए एकजुट होकर सामूहिक उपासना और साक्ष्य का योगदान दें।

यथार्थीकृत संदर्भ

भजन संहिता 66:4 को पढ़ते समय विचार करें कि हमारे दिनचर्या में प्रभु की महिमा कैसे प्रकट होती है—खयाल, शब्द और कर्म में एकरूपता की चेष्टा। यह दृष्टि Romans 15:9-12 के साथ संगत बनी रहती है, जहाँ विभिन्न भाषाओं और जातियों के लोग प्रभु की महिमा से अभिभूत होते हैं।

नोट : नीचे दिए गए दो-तीन स्पष्ट उद्धरण प्रचलित पवित्र टिप्पणीकारों के सार से प्रेरित हैं। कोई पूर्ण वाक्य उद्धरण नहीं है, केवल विचारों का संकलन है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 66:4 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“हे प्रभु, कौन तुझ से न डरेगा? और तेरे नाम की महिमा न करेगा? क्योंकि केवल तू ही पवित्र है, और सारी जातियाँ आकर तेरे सामने दण्डवत् करेंगी, क्योंकि तेरे न्याय के काम प्रगट हो गए हैं।” (भज. 86:9, यिर्म. 10:7, मला. 1:11)

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