जकर्याह 9:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हमात की ओर जो दमिश्क के निकट है, और सोर और सीदोन की ओर, ये तो बहुत ही बुद्धिमान् हैं।

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जकर्याह 9:2 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य बिंदु: प्रतिशोध और हुनरमंदी—राज्य के विरोध का संकेत

याकूब के भाग में जकर्याह 9:2 में जिन स्थानों का उल्लेख है, वे पवित्र दशाओं के भीतर एक विशिष्ट राजनीतिक-आर्थिक संदर्भ प्रस्तुत करते हैं। यह पद हमें बताता है कि दमिश्क से उत्तर-पश्चिम की ओर स्थित नगर और मिड-पश्चिम की अग्रिम ताकतें कितनी समृद्ध हैं, किन्तु परमेश्वर के निर्णय पर वे निर्भर नहीं रहते। wari

पाठ की साहित्यिक संदर्भ-यात्रा

यह भाग विरोधियों की समृद्धि और बुद्धिमत्ता के बारे में नहीं, बल्कि परमेश्वर के न्याय का संकेत देता है। दमिश्क के निकट शहरों का उल्लेख दिखाता है कि प्राचीन Near East-क्षेत्र के शक्तिशाली समुदाय भी प्रभु की योजना के बाहर नहीं हैं। अतः यह अनुभाग जागरूकता पैदा करता है कि बुराई में भी बुद्धि, संपत्ति और संगठन परमेश्वर के अधिकार से बाहर नहीं रहती; फिर भी उनका अंत परमेश्वर के अद्भुत निर्णय के साथ तय है।

धार्मिक-नैतिक महत्त्व

जो महान शक्तियाँ हैं—दमिश्क के निकट स्थित उत्तर-सीरिया के क्षेत्र, सोर और सीदोन—इनका उल्लेख यह दिखाता है कि worldly wisdom and power are not ultimate. प्रलोभन यह है कि ताकत के कारण अहंकार बढ़ता है; परन्तु ईश्वर की मंशा के सामने यह सब एक क्षणिक धारणा होती है। इस पाठ से सीख मिलती है कि विश्वासियों को वास्तविक बुद्धिमत्ता परमेश्वर के विधान के अनुरूप देखने की आवश्यकता है, न कि earthly prestige से प्रेरित होकर।

बाइबिल के भीतर अन्य संबंध

  • पूर्ववर्ती संदर्भ: परमेश्वर अपनी योजनाओं में शक्तिशाली राष्ट्रों को भी हल्के में नहीं लेते; यह हेब्रू-ग्रंथ के प्रेरित संदेशों की ओर संकेत है कि प्रभु निर्णायक है।
  • सम्बन्धी आयाम: जकर्याह के दृष्टीकोण में देश-राज्य और उनके बुद्धिमत्ता-समझ पर टिप्पणी, कुरान-नहीं—बल्कि प्राचीन इस्राएल की सांस-तास के अनुरूप है कि राजाओं की सत्ता परमेश्वर की सत्ता से ऊपर नहीं है।
  • नया नियम के संकेत: प्रभु के राज्य की स्थापना में earthly शक्तियाँ अंतिम नहीं रहतीं; विश्वास और दया के साथ प्रत्यक्ष निर्वाचित मार्ग ही निर्णायक होते हैं।

विचार-विमर्श के प्रश्न

  • हम अपनी बुद्धिमत्ता को कैसे ठहराते हैं—क्या यह निर्भरता परमेश्वर पर है या सामाजिक रूप से मान्यता पाने पर?
  • हम किस प्रकार के आराम में हैं जब हम देखते हैं कि शक्तिशाली राष्ट्र भी प्रभु के न्याय के सामने जवाबदेह हैं?
  • क्या हमारी प्रार्थनाएँ और निर्णय प्रभु की योजनाओं के अनुरूप हैं, न कि अपने स्वार्थ के अनुसार?

संक्षिप्त निष्कर्ष

जकर्याह 9:2 यह स्मरण कराता है कि धनी और बुद्धिमान शक्तिशाली नगर भी परमेश्वर की योजना के पूर्ण भागीदार नहीं बनते—उनकी ताकत परमेश्वर के न्याय के सामने नतमस्तक होती है। विश्वासियों के लिए यह आह्वान है कि विवेक की वास्तविक कसौटी परमेश्वर के मार्ग और उद्धार-कर्ता के धर्म के साथ हो।

पवित्र Schrift से क्रॉस-रेफरेंसेस

1) यशायाह 10:13—धन-दंव से नहीं, पर प्रभु के निर्णय से वास्तविक शक्ति नापी जाती है; यह संदर्श बताता है कि earthly wisdom सीमित है। 2) रोम 11:33—जिस गूढ़ योजना को से mero नहीं समझ पाते, उसका ज्ञान परमेश्वर के द्वारा ही उद्घाटित होता है। 3) मत्ती 7:24-27—विवेकशील जीवन वह है जो सत्य के साथ कार्य करता है, न कि केवल ज्ञान से गढ़ा गया ढांचा।

नोट: इस यूनिफाइड व्यख्यात में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के कुछ संकुचित उद्धरणों के वास्तविक पाठ उपलब्ध हो तो ही उद्धृत शब्दों को संक्षेप में उल्लेख किया जा सकता है; फिलहाल नीचे कोई स्पष्ट उद्धरण नहीं दिए गए हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

जकर्याह 9:2 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यहेजकेल 28:12 (HINIRV) »
“हे मनुष्य के सन्तान, सोर के राजा के विषय में विलाप का गीत बनाकर उससे कह, परमेश्‍वर यहोवा यह कहता है : तू तो उत्तम से भी उत्तम है; तू बुद्धि से भरपूर और सर्वांग सुन्दर है।

यिर्मयाह 49:23 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 49:23 (HINIRV) »
दमिश्क के विषय, “हमात और अर्पाद की आशा टूटी है, क्योंकि उन्होंने बुरा समाचार सुना है, वे गल गए हैं; समुद्र पर चिन्ता है, वह शान्त नहीं हो सकता।

यहेजकेल 28:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यहेजकेल 28:2 (HINIRV) »
“हे मनुष्य के सन्तान, सोर के प्रधान से कह, परमेश्‍वर यहोवा यह कहता है कि तूने मन में फूलकर यह कहा है, 'मैं ईश्वर हूँ, मैं समुद्र के बीच परमेश्‍वर के आसन पर बैठा हूँ,' परन्तु, यद्यपि तू अपने आपको परमेश्‍वर सा दिखाता है, तो भी तू ईश्वर नहीं, मनुष्य ही है। (यहे. 28:9)

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