Old Testament
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जकर्याह 9:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
सोर ने अपने लिये एक गढ़ बनाया, और धूल के किनकों के समान चाँदी, और सड़कों की कीच के समान उत्तम सोना बटोर रखा है।
जकर्याह 9:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 9:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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अय्यूब 27:16 (HINIRV) »
चाहे वह रुपया धूलि के समान बटोर रखे और वस्त्र मिट्टी के किनकों के तुल्य अनगिनत तैयार कराए,

यहेजकेल 28:4 (HINIRV) »
तूने अपनी बुद्धि और समझ के द्वारा धन प्राप्त किया, और अपने भण्डारों में सोना-चाँदी रखा है;

यहेजकेल 27:33 (HINIRV) »
जब तेरा माल समुद्र पर से निकलता था, तब बहुत सी जातियों के लोग तृप्त होते थे; तेरे धन और व्यापार के माल की बहुतायत से पृथ्वी के राजा धनी होते थे। (प्रका. 18:9, प्रका. 18:15, प्रका. 18:19)
जकर्याह 9:3 का सरल अर्थ
इस verses में संकेत मिलता है कि पड़ोसी उल्लंघन और आक्रामकता के प्रभाव से बचते-बचाते असुरक्षित लकड़ी-भंडार नहीं, बल्कि हेऊं-धन के रूप में एक मजबूत सुरक्षा-स्थल बनाते हैं—पर यह सुरक्षा मिट्टी-ध्वंस और दुष्टों की चाल से ही सुरक्षित रहती है। यहाँ सोर (गढ़) बनाना, और धूल के किनकों के समान चाँदी, तथा सड़क की कीच के समान उत्तम सोना बटोरना—ये सब टुकड़े दिखाते हैं कि संपत्ति, सुरक्षा और प्रतिष्ठा की अस्थिरता एक क्षण के लिए भी स्थिर नहीं रह पाती; असल सुरक्षा परमेश्वर के शासन में है, न कि मनुष्यों के धन-सम्पदा में।
प्रसंगगत पृष्ठभूमि
यह भाग जकर्याह की भविष्यद्वाणी का है, जो Return from exile के बाद यरहीशलेम के पुनर्निर्माण और मसीह-युग की प्रतीक्षा से जुड़ा है। नबी स्पष्ट करता है कि दूरस्थ शक्तियों के द्वारा बनाई गई सुरक्षा भी अस्थिर है, जबकि परमेश्वर की योजना में शांति और उद्धार स्थिरता लाती है।
व्याख्यात्मक बिंदु
कुछ क्रियात्मक cross-reference
पन्द्रह-वाक्य निष्कर्ष
यह पवित्र सूची चेतावनी है कि मानव-निर्मित सुरक्षा, चाहे वह धन हो या महिमान्वित संरचना, समय के साथ ढह सकती है। परमेश्वर के राज्य में ही स्थिरता और शांति है। हमें अपने हृदय और योजनाओं को उसी दिशा में मोड़ना चाहिए।
छोटा व्यावहारिक takeaway
उद्धृत पूर्व-प्रकाशन टिप्पणीकारों के संकेत
यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के सार्वजनिक-डomain विचारों से प्रेरित सूक्ष्म प्रेरणा दोनों को समेकित करती है। “The safest bulwark is not gathered wealth, but trust in the Lord of hosts.” (अनुवादित सार, मूल पाठ के समानार्थी विचार)।
संक्षिप्त संदर्भ
यशायाह 33:6; नीतिशास्त्र 18:10; मत्ती 6:19-21