Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31



1 शमूएल 7:14 — संदर्भ और अर्थ
यह पद उस समय का दृश्य प्रस्तुत करता है जब ईश्वर ने इस्राइल को पलिश्तियों के आतंक से छुड़ाने की प्रक्रिया शुरू की। वर्षों से पलिश्तियों के कारण इस्राइली अपने ग्राम-नगरों, किसानों के खेतों और शत्रु सेना से भयभीत थे। किन्तु न्याय के परमेश्वर ने एक बार फिर अपने लोगों पर कृपा दिखाई, और एक्रोन तथा गत जैसे नगरों के नियंत्रण पलिश्तियों से फिर से इस्राइलियों के हाथ लौटे। इस संदर्भ में यह संकेत मिलता है कि परमेश्वर के साथ सच्ची व भरोसेमंद गठबंधन रखने पर एक बार फिर उनके शत्रु दूर होते हैं और इस्राइल का देश उसके क़ाबिले-ए-मान सम्मान में लौट आता है।
केंद्रीय अर्थ
पद यह दर्शाता है कि ईश्वर ने अपनी प्रचारित नीति के अनुरूप, पाप के पथ पर ढीले पड़ चुके राज्यों के बीच धार्मिक और राजनीतिक पुनर्स्थापना का काम किया। पलिश्तियों के प्रभाव को कम किया गया और इस्राइल ने पुनः आत्म-विश्वास पाया, ताकि वे परमेश्वर के मार्ग पर सच्चे रूप से चल सकें।
मुख्य विषय
अन्य सम्बद्ध पाठ
व्यावहारिक चिंतन
हमारे जीवन में भी ऐसी स्थितियाँ आती हैं जहाँ हम अपनी सुरक्षा के लिए सिर्फ अपने उपायों पर निर्भर रहते हैं। लेकिन यह पासा पलटता है जब हम परमेश्वर की दिशा में लौटते हैं, उनकी उपस्थिति में शांति मिलती है, और भय की जगह विश्वास आता है। हमें अपने कार्य, विचार और समुदाय के साथ उसी विश्वास को बनाए रखना चाहिए जो ईश्वर की ओर से आता है—कि वह कठिन स्थितियों में भी हमें उठाता है और our nation/समुदाय को फिर से एकजुट करता है।
आध्यात्मिक क्रॉस-रेफरेंसेस
- मत्ती 6:33 में कहा गया है कि पहले परमेश्वर के राज्य और उसकी righteousness पर ही ध्यान दें, फिर सब कुछ ठीक हो जाएगा; यह विचार इस verse के पुनर्स्थापना के तात्पर्य से संगत है।
- भजन 46:1–3 में परमेश्वर को हमारी शरण और शक्तिशाली सहायता बताया गया है, जो संकट के समय सुरक्षा प्रदान करता है।
- यशायाह 41:10 कहता है कि भय न मानो, मैं तुझमें हूँ; यह वाद इस पाठ के आशय से मेल खाता है कि ईश्वर अपनी प्रजा के साथ है और उनकी रक्षा करते हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
1 शमूएल 7:14 संकेत देता है कि परमेश्वर की सहायता से ही इस्राइल का राजनीतिक और धार्मिक पुनर्स्थापन संभव था। पलिश्ती लोग अब नहीं रह गए थे, और इस्रायल ने अपने क्षेत्रीय नियंत्रण के साथ-साथ धार्मिक पुनःस्थापन की दिशा में एक बार फिर कदम रखा। यह संदेश हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के साथ सत्य और विनम्रता से चलना ही सच्ची सुरक्षा लाता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (कहॉं से, यदि उपलब्ध हो):
मॅथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के वे स्पष्ट अवलोकन जो इस प्रकार की विजय-गाथाओं में परमेश्वर की कृपा और लोगों के ऐतहासिक-धार्मिक परिवर्तन को उजागर करते हैं, संक्षेप में एकीकृत किये जाते हैं।