1 शमूएल 7:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब शमूएल ने एक दूध पीता मेम्‍ना ले सर्वांग होमबलि करके यहोवा को चढ़ाया; और शमूएल ने इस्राएलियों के लिये यहोवा की दुहाई दी, और यहोवा ने उसकी सुन ली*।

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1 शमूएल 7:9 पद-दर-पद बाइबल टीका

मतलब की सीधे शब्दों में जानकारी

1 शमूएल 7:9 में शमूएल शमशान नहीं, बल्कि यहूदा के परमेश्वर Yahweh को प्रत्यक्ष चढ़ावा चढ़ाकर आशीष की प्रार्थना करते हैं। दूध पीते मेम्‍ना (युवक-सा शिशु) जैसा एक छोटेपन और पूर्ण समर्पण के प्रतीक के साथ, उन्होंने इस्राएल पर यहोवा की दया की पुकार को उन्नत किया, और परमेश्वर ने उनकी सुन ली।

सं contextual पृष्ठभूमि

फिरौन के शासन के समय के बाद, इस्राएल जब युद्ध के भय से घिर गया था, तब यहोशू ने ऐतिहासिक भय को दूर किया। यहाँ शमूएल ने एक बार फिर यहूदियों के लिए प्रभु की ओर ध्यान आकर्षित किया। शमूएल ने एक दूध पिए मेम्‍ना लेकर, सच्चे विश्वास के साथ, सभ्यता के निशान के रूप में यहोवा की उपस्थिति को मान्यता दी और उसकी सुनवाई की अपेक्षा रखी।

interpretive observations

  • आस्था का संकेत: दूध पिए मेम्‍ना समुचित आस्था और निर्भयता का प्रतीक है; शमूएल अपने आध्यात्मिक प्रधान के साथ यहोवा से सीधा संवाद करते हैं।
  • स्वीकार करने योग्य बलिदान: यहोवा के सामने पूर्ण समर्पण की प्रस्तुति; भौतिक प्रतीकों के पीछे नहीं, बल्कि आंतरिक निर्भरता का संदेश।
  • प्रार्थना की शक्ति: शमूएल ने दया माँगने से पहले खुद को वहन किया, और परमेश्वर ने उनकी दुआ सुन ली—यह विश्वासयोग्य प्रार्थना का परिणाम है।

संक्षिप्त थीमैटिक बिंदु

  1. समर्पण के साथ प्रार्थना का स्थान
  2. आस्था से परमेश्वर की सुनवाई
  3. मन की शुद्धता बनाये रखना

संदर्भ-सम्बंध (Cross-References)

- भला किस प्रकार प्रार्थना और समर्पण परमेश्वर के कान खोलते हैं: 2 इतिहास 20:3-4 (यहोवा से सहायता माँगना) — यह दर्शाता है कि प्रार्थना में एकत्व और सच्चे दिल की मांग है।

- परमेश्वर की सुनी गयी दया: यिर्मयाह 33:3 — परमेश्वर से विनती करने पर नई आशाओं के द्वार खुलते हैं।

- शमूएल के प्रभाव से प्रेरणा: 1 शमूएल 3:19-20 — शमूएल की आत्मा और सत्य ने लोगों पर प्रभाव डाला; यह संकेत देता है कि ईश्वर की आवाज उन तक पहुँचती है जो उसकी वाणी सुनना चाहते हैं।

कठोर परिशुद्ध निष्कर्ष

इस verse का मूल संदेश यह है कि अधर्म के समय में यहोवा को खोजना, उसे बुलाना और पूर्ण विश्वास के साथ समर्पण दिखाना—यह परमेश्वर की करुणा को सक्रिय कर सकता है। शमूएल की यह दुहाई एक अध्ययन योग्य समाधान है: विश्वास में प्रार्थना और समर्पण से तेज़ बुद्धि और सुरक्षा मिलती है, ताकि इस्राएल नए साहस के साथ आगे बढ़ सके।

Quote notes

यदि किसी पाठक ने Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरणों की अपेक्षा की हो, तो नोट करें कि इस प्रस्तुति में उनके विशिष्ट उद्धरण सीधे नहीं दिये गये हैं; पर उन प्रभावों का समेकित सार यहाँ निहित है, विशेषकर भ्रांति-विहीन आस्था, दया की कृपा और प्रभु की सुनवाई के सिद्धान्तों पर।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 7:9 समानांतर पद और संबंधित वचन

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भजन संहिता 99:6 (HINIRV) »
उसके याजकों में मूसा और हारून, और उसके प्रार्थना करनेवालों में से शमूएल यहोवा को पुकारते थे*, और वह उनकी सुन लेता था।

यिर्मयाह 15:1 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 15:1 (HINIRV) »
फिर यहोवा ने मुझसे कहा, “यदि मूसा और शमूएल भी मेरे सामने खड़े होते, तो भी मेरा मन इन लोगों की ओर न फिरता। इनको मेरे सामने से निकाल दो कि वे निकल जाएँ!

भजन संहिता 50:15 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 50:15 (HINIRV) »
और संकट के दिन मुझे पुकार; मैं तुझे छुड़ाऊँगा, और तू मेरी महिमा करने पाएगा।”

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