Old Testament
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2 पतरस 2:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वे सीधे मार्ग को छोड़कर भटक गए हैं, और बओर के पुत्र बिलाम के मार्ग पर हो लिए हैं; जिस ने अधर्म की मजदूरी को प्रिय जाना; (गिन. 22:5-7)
2 पतरस 2:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 पतरस 2:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहूदा 1:11 (HINIRV) »
उन पर हाय! कि वे कैन के समान चाल चले, और मजदूरी के लिये बिलाम के समान भ्रष्ट हो गए हैं और कोरह के समान विरोध करके नाश हुए हैं। (उत्प. 4:3-8, गिन. 16:19-35, गिन. 22:7, 2 पत. 2:15, 1 यूह. 3:12, गिन. 24:12-14)

प्रकाशितवाक्य 2:14 (HINIRV) »
पर मुझे तेरे विरुद्ध कुछ बातें कहनी हैं, क्योंकि तेरे यहाँ कुछ तो ऐसे हैं, जो बिलाम की शिक्षा* को मानते हैं, जिसने बालाक को इस्राएलियों के आगे ठोकर का कारण रखना सिखाया, कि वे मूर्तियों पर चढ़ाई गई वस्तुएँ खाएँ, और व्यभिचार करें। (2 पत. 2:15, गिन. 31:16)

व्यवस्थाविवरण 23:4 (HINIRV) »
इस कारण से कि जब तुम मिस्र से निकलकर आते थे तब उन्होंने अन्न जल लेकर मार्ग में तुम से भेंट नहीं की, और यह भी कि उन्होंने अरम्नहरैम देश के पतोर नगरवाले बोर के पुत्र बिलाम को तुझे श्राप देने के लिये दक्षिणा दी।
मुख्य उद्देश्य: मार्ग भटकते भैलों के समान प्रतिरूप—बिलाम की व्रात्तिका हरकत
2 पतरस 2:15 में उद्धृत पथभ्रष्टता का मुद्दा सीधे-सीधे यह दर्शाती है कि परमेश्वर की राह से दूर जाना और स्वार्थी लाभ के लिए अधर्म की मजदूरी स्वीकारना, कैसे विश्वास-जीवन को चोट पहुँचाता है। इस पद के संदर्भ में बिलाम का चयनित मार्ग एक चेतावनी है कि बाहरी धार्मिकता या दिखावटी धर्मनिष्ठा भी अंततः स्वार्थपूर्ण इच्छाओं के अधीन हो सकता है।
ग्रंथीय संदर्भ: साहित्यिक संदर्भ और पाठ-परिप्रेक्ष्य
पंक्ति बताती है कि वे “सीधे मार्ग को छोड़कर भटक गए हैं”—यह क्रमिक गिरावट का संकेत है: सूचना और प्रेरणा के स्रोत से विमुख होना, फिर अधर्म की मजदूरी को प्रिय जाना। बिलाम के मार्ग का उल्लेख गिनती 22–24 में कथा-आधारित एक चरित्र से लिया गया है, जिसे कई बार तात्पर्य यह है कि निहित स्वार्थ बनाम परमेश्वर की योजना के बीच फँसना कितना खतरनाक हो सकता है। पाठ-परिप्रेक्ष्य में इस प्रकार के उदाहरण विश्वासी को आत्म-परख के साथ संकल्पित रहने का आह्वान करते हैं कि वे नहीं चाहते कि उनकी आस्था केवल दिखावे की हो।
धर्मशास्त्रीय महत्व
पतरस के समूह के भीतर यह चेतावनी है कि जो लोग भटकाव और लोभी-उद्धार के पीछे भागते हैं, वे भरोसेमंद शिक्षण को नुकसान पहुँचाते हैं। बिलाम-प्रेरित मार्गदर्शनों के साथ, प्रेरित लिखते हैं कि परमेश्वर के समक्ष वास्तव में अधर्म का आकर्षण कितना शक्तिशाली हो सकता है, परन्तु परिणाम शास्त्रोत्तर दंड और आत्मिक कुंठा के रूप में सामने आते हैं। यह पाठ हमें यह भी याद दिलाता है कि विश्वास की राह केवल गवाही नहीं, बल्कि चरित्र-परिवर्तन माँगती है।
वैज्ञानिक-तीर्थ: शास्त्रों के साथ परस्पर-संयोजन
धर्मगायन पर विचार:Reflection Questions
अनुवादित टिप्पणी और पूर्व-चिन्ह
यह पंक्ति विशिष्ट रूप से एक चेतावनी है कि वास्तविकता यह है कि भटकना, और स्वार्थ इसकी जड़ों को खोदता है। यदि हम अपने जीवन में स्वार्थी लाभ के लिए नैतिक सीमाओं को पार कर लेते हैं, तो हमारे विश्वास की प्रकृति पर प्रश्न उठते हैं।
संकेत व पठन-प्रेरणा
यहाँ के सन्देश को समझते समय, न केवल बोझिल नियमों को याद रखें, बल्कि परमेश्वर की पवित्र योजना के अनुरूप जीवन-परिवर्तन को अपनाने का लक्ष्य रखें।
उद्धृत संदर्भों के छोटे-से उद्धरण
यदि आप साहचर्य वाले संवाद में तुरंत जीवन-उद्धरण चाहते हैं, तो नीचे 3 टिप्पणियाँ हैं जिनसे प्रेरित विचार मिलते हैं (कठोर रूप में नहीं, बल्कि मार्गदर्शक रूप में):
Cross-references:
परिणामतः यह पाठ एक जागरूकता है कि वस्त्र-धर्म या दिखावटी धार्मिकता से नहीं, बल्कि सत्य-जीवन और प्रेम-कार्य से ही विश्वास सच बनता है।