2 पतरस 2:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और धर्मी लूत को जो अधर्मियों के अशुद्ध चाल-चलन से बहुत दुःखी था छुटकारा दिया। (उत्प. 19:12-13, 15)

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2 पतरस 2:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

अर्थ का प्रत्यक्ष सार

2 पतरस 2:7 में कहा गया है कि धर्मी लूत को अत्यंत दुःखी करने वाला अधर्मियों का अशुद्ध चाल-चलन वह देख कर भी जीवन के पथ से विचलित नहीं हुआ, बल्कि उसे मात्र एक बाहरी दृष्टिकोण से नहीं, उसकी गंदगी से भी उद्विग्न होते हुए उसे बाहर निकाल दिया गया। यह वाक्य हार मान लेने या निराश होने के बजाय ईश्वरीय विश्वास की अस्थिरता से निपटने की प्रेरणा देता है: परमेश्वर न्याय करते हैं, परन्तु धर्मियों पर उनके संरक्षण के संकेत भी दिखते हैं।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

लूत, अब्राहम के भतीजे, सार्थकता के साथ एक धर्मी व्यक्ति के रूप में स्मरण किया गया है। वह मिस्र के लोग, गन्दा चाल-चलन और मोह की संस्कृति से घिरे होने पर भी ईश्वर के सामने सचचित रहा। 2 पतरस के लेखक इस बात को पुनः प्रस्तुत करते हैं कि परमेश्वर अधर्मियों को दंडित करते हैं, परन्तु धर्मियों के लिए उद्धार का रास्ता बनाते हैं। यह पाठ उद्धार के संयम, विश्वास और दया की भावना को उजागर करता है।

महत्वपूर्ण विचारण (Interpretive observations)

  • धर्मी की आर्तिक संवेदना: लूत ने अधर्म के कारण होने वाले दुःख को महसूस किया, पर वह नैतिक झुकाव से विचलित नहीं हुआ।
  • निष्कासन की अवधारणा: पवित्रता के पालन के लिए आवश्यक दूरी बनाना, ताकि धर्म नष्ट न हो सके; बाहर निकालना एक रक्षा-कार्य है, दंड नहीं मात्र।
  • आश्वासन का भाग: भगवान के पक्ष में विश्वास रखने वालों के लिए मुक्ति का आश्वासन है, भले ही आस-पास की स्थितियाँ विकट हों।

थीमेटिक छोटा-सार

  1. धर्म के पक्ष में दृढ़ता और अधर्म के प्रभाव से दूरी बनाना।
  2. ईश्वरीय न्याय और दया दोनों का संतुलन।
  3. उद्धार उन लोगों के लिए जो विपरीत परिस्थितियों में भी विश्वास बनाए रखते हैं।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप विवरण और संकेत)

उत्पत्ति 19:12-13, 15 में सodom और गमोरा से लोगों के भागने और बर्बादी के बारे में निर्देश दिए गए हैं; यह संदर्भ लूत के अनुभव से प्रेरित है कि सुरक्षा और उद्धार के लिए एक बाहरी सहायता आवश्यक है।

योराम 11:7-8̄ में धर्मी के चिरस्थायी प्रतिबिंब और दरिद्र समय में भी ईश्वर की कृपा का उल्लेख मिलता है, जो लूत के उद्धार की तरह ही विश्वासयोग्यता पर बल देता है।

जेरोम 15:19 में सत्य और पवित्रता के लिए दूरी बनाये रखना, और ईश्वरीय दया के मार्ग को पकड़ना, उद्धार की दिशा निर्धारित करता है।

व्यावहारिक निष्कर्ष

धर्मी जीवन का अर्थ केवल गलत बातों से बचना नहीं, बल्कि ऐसे वातावरण से संरक्षण और दूरी बनाकर सच-सत्य के पथ पर टिके रहना है। लूत की कथा इस बात की याद दिलाती है कि विश्वास की रक्षा और दुष्टता के प्रभुत्व के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

टेकअवे पॉइंट

संक्षेप में, 2 पतरस 2:7 हमें सीख देता है कि धर्म के लिए आंतरिक दुःख और बाहरी विपत्ति के बीच ईश्वर के न्याय और उद्धार के उपाय कैसे काम करते हैं, और कैसे एक धर्मी व्यक्ति दबाव के बावजूद भी सत्य और पवित्रता के पथ पर बना रहता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 पतरस 2:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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पर वह विलम्ब करता रहा, इस पर उन पुरुषों ने उसका और उसकी पत्‍नी, और दोनों बेटियों के हाथ पकड़े; क्योंकि यहोवा की दया उस पर थी: और उसको निकालकर नगर के बाहर कर दिया। (2 पत 2:7)

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उत्पत्ति 19:29 (HINIRV) »
और ऐसा हुआ कि जब परमेश्‍वर ने उस तराई के नगरों को, जिनमें लूत रहता था, उलट पुलट कर नाश किया, तब उसने अब्राहम को याद करके* लूत को उस घटना से बचा लिया।

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1 कुरिन्थियों 10:13 (HINIRV) »
तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने के बाहर है: और परमेश्‍वर विश्वासयोग्य है: वह तुम्हें सामर्थ्य से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन् परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको। (2 पत. 2:9)

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