Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 पतरस 2:6 बाइबल पद की व्याख्या
2 पतरस 2:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और सदोम और गमोरा के नगरों को विनाश का ऐसा दण्ड दिया, कि उन्हें भस्म करके राख में मिला दिया ताकि वे आनेवाले भक्तिहीन लोगों की शिक्षा के लिये एक दृष्टान्त बनें (यहू. 1:7, उत्प. 19:24)
2 पतरस 2:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 पतरस 2:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहूदा 1:7 (HINIRV) »
जिस रीति से सदोम और गमोरा और उनके आस-पास के नगर, जो इनके समान व्यभिचारी हो गए थे और पराये शरीर के पीछे लग गए थे आग के अनन्त दण्ड में पड़कर दृष्टान्त ठहरे हैं। (उत्प. 19:4-25, व्य. 29:23, 2 पत. 2:6)

लूका 17:28 (HINIRV) »
और जैसा लूत के दिनों में हुआ था, कि लोग खाते-पीते लेन-देन करते, पेड़ लगाते और घर बनाते थे;

गिनती 26:10 (HINIRV) »
और जब उन ढाई सौ मनुष्यों के आग में भस्म हो जाने से वह मण्डली मिट गई, उसी समय पृथ्वी ने मुँह खोलकर कोरह समेत इनको भी निगल लिया; और वे एक दृष्टान्त ठहरे।
मुख्य विचार
2 पतरस 2:6 बताता है कि परमेश्वर ने सदोम और गमोरा के नगरों को विनाश देकर ऐसी शिक्षा दी है कि आनेवाला भक्तिहीन समुदाय भी इन दृश्यों से सबक लें। यह दण्ड केवल नैतिक कठोरता नहीं, बल्कि चेतावनी है कि ईमान और पवित्रता से भरे मन से ही परमेश्वर के राज्य के निकटता को धारण किया जा सकता है।
साहित्यिक परिप्रेक्ष्य (Literary Context)
इस पद में पतरस महत्त्वपूर्ण तरीके से पुरानी प्रत्यक्ष घटनाओं को उद्धृत करके नया प्रभाव पैदा करते हैं। उत्पत्ति 19:24 की विनाशक स्थिति और यहूदा के संदर्भ (यहोशू 1:7; जारे 1:7 के रूपक) से यह स्पष्ट होता है कि पाप के गम्भीर परिणाम स्पष्ट उदाहरण बनकर प्रस्तुत होते हैं ताकि पाठक वर्तमान समय में भी सचेत रहें। बार्न्स, क्लार्क और हार्नेसन जैसे पवित्र-ग्रंथ टिप्पणीकार इस प्रकार के दृश्यों को “दृष्टान्त-उद्धृतियाँ” के रूप में समझाते हैं—ऐसे घटनाक्रम जो स्मरणीय दैहिक दंड के माध्यम से आध्यात्मिक शिक्षा देते हैं।
गूढ़ सार और theologial significance
यहाँ दण्ड का उद्देश्य केवल दैहिक विनाश नहीं, बल्कि पाप के अंतःकरण के भयावह परिणामों को दिखाना है—ताकि भक्तिहीन लोग भी पथ-भटकाव के लिए सचेत हों। सदोम-गमोरा का उदाहरण सच-स्वीकार और धारणीय नैतिकता के अभाव पर चेतावनी है। यहुक्ति-परकता का निष्कर्ष यह है कि परमेश्वर का न्याय, यदि सही समय पर नहीं रुका, तो कड़ी सज़ा ला सकता है, परंतु वह उसी समय दयालुता के अवसर भी देता है ताकि लोग परिवर्तन कर सकें।
आध्यात्मिक लिंक (Theological Connections)
क्रॉस-रेफरेंसेस (Cross-References) और उनके अर्थ
यहोवा के न्याय के उदाहरण के संदर्भ यहूदियों के इतिहास में बार-बार मिलते हैं, जो प्रेरितों के लेख में भी सतह पर आते हैं:
इन संदर्भों का मूल आशय यह है कि परमेश्वर के उत्साहपूर्ण न्याय और उसकी दयालुता एक साथ चलते हैं, और विश्वासियों को पवित्रता के मार्ग पर दृढ़ बनाए रखते हैं।
आत्म-चिंतन के प्रश्न (Questions for Reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
सदोम और गमोरा का दण्ड एक चेतावनी-पूर्ण दृश्य है, जिसे पतरस ने नये विश्वासी समुदाय के लिए एक जीवित नमूना बना दिया। यह केवल इतिहास की घटना नहीं, बल्कि एक सतर्क-पथ है: पाप के परिणाम स्पष्ट हैं, पर परमेश्वर की कृपा से परिवर्तन संभव है। इस ज्ञान के साथ हमारा उत्तरदायित्व है कि हम अपने जीवन को पवित्रवचन के अनुरूप ढालें और दूसरों को भी उसी राह पर चलने के लिए प्रेरित करें।
स्पष्ट उद्धरणों के लिए: मैथ्यू हेनरी, अ্যাল्बर्ट बर्न्स और ऐडम क्लार्क के सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों के विचार यदि उपलब्ध हों तो नीचे संक्षेप में उल्लेखित किये गए हैं।