Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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मुख्य व्याख्या बिंदु
निर्गमन 4:19 में ईश्वर मूसा को बतला रहे हैं कि मिस्र वापस लौट जा, क्योंकि उसने तेरे प्राणों के प्यासे किसी को नहीं छोड़ा। यह वाक्य परमेश्वर के संरक्षण और निदेशन की पुष्टि करता है: जब परमेश्वर बुलाते हैं, समय-समय पर असाध्य दिखने वाले रास्ते खुल जाते हैं, और भय की स्थिति में भी ईश्वर के नियंत्रण से भागना संभव नहीं रहता। मुसीबत के समय भी उनकी योजनाओं की पूर्ति सुरक्षित रहती है; यह वचनों से स्पष्ट होता है कि मूसा को सुरक्षा की दिशा मिस्र लौटने में ही मिलती है, न कि भय से पलायन में।
पाठ-संदर्भ का साहित्यिक संदर्भ
यह पाठ मूसा के जीवन-कथा में एक निर्णायक मोड़ को दर्शाता है: 1) यह समय के साथ ईश्वर की स्मरणात्मक गवाही को पुष्ट करता है—जो भी सूरजमुखी बनकर उगे, वह परमेश्वर के कानों में है; 2) मिस्र लौटना उन लोगों के लिए सुरक्षा का संकेत है जिनके विरुद्ध पिएन, जल्लाद और कठिनाइयां हैं। इसका साहित्यिक स्वर यह दिखाता है कि ईश्वर मूसा के नेतृत्व और उनका मिशन स्वीकार्य मानते हैं, भले ही राह कठिन लगे।
तेह्शीक (आध्यात्मिक महत्व)
इस वक्तव्य में दो प्रमुख बातें हैं: ईश्वर की निष्कासन-योजना में मूसा का स्थान स्थिर है, और इतिहास के घुमाव से वह उद्धार की यात्रा पर आगे बढ़ेगा। fear के बीच भी भक्ति-विश्वास सर्वोच्च है। यह पाठ स्मरण कराता है कि उद्धार और सुरक्षा मानव-निर्भर नहीं, बल्कि परमेश्वर की योजना के अनुरूप है।
बाइबल के अन्य हिस्सों से संगति (Cross-References)
विचार-प्रश्न (Reflection Questions)
निष्कर्ष
निर्गमन 4:19 हमें बताता है कि परमेश्वर अपने मार्गदर्शित लोगों की सुरक्षा और उद्धार के लिए समय-समय पर स्पष्ट संकेत देता है। मूसा के लिए मिस्र लौटना भय के बावजूद एक विश्वासयोग्य कदम था, क्योंकि यह ईश्वर की प्रेरणा औरicherung के अनुरूप था। यह पाठ आज भी स्मरण कराता है कि संकट के बीच भी परमेश्वर की योजना न सिर्फ़ संभव है, बल्कि सुरक्षित मार्ग दिखाती है—जब हम उसे मानते हैं और उसकी आवाज़ सुनते हैं।
आश्रय-उद्धरण (Quoted fragments from public-domain commentators)
Adam Clarke: “God does not reprove Moses for fear, but directs him to return to Egypt, where his life had to be preserved for the public work.”
Albert Barnes: “God’s purpose for Moses’ life required his presence in Egypt, not in seclusion; danger would be faced by faith.”
Matthew Henry (संक्षेप उद्धरण): “The command to return to Egypt shows God’s strong, guiding hand over the very steps men fear to take.”