Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40



सीधे अर्थ की स्थापना
निर्गमन 5:3 में मिस्र से निकलने के बाद इब्रियों के लोग अपने अगुवाओं से कहते हैं कि परमेश्वर ने उनके साथ भेंट की है और वे जंगल में तीन दिन के मार्ग पर चले जाएँ ताकि परमेश्वर यहोवा के लिए बलिदान कर सकें; नहीं तो वह उन्हें मार डाले या तलवार चलवाएगा। यहाँ उद्देश्य परमेश्वर की इच्छा पर विशेष ध्यान और धार्मिक-उद्धार की यात्रा की तैयारी को दर्शाता है।
प्रसंगीय पृष्ठभूमि
यहेक चरण निर्गमन के भाग का वह समय है जब बाद में उनसे मांग की जाती है कि वे फरोह हो परिवर्तित नहीं होंगे, बल्कि यहोवा के प्रति समर्पण दिखाने के लिए एक यात्रा करें। यह बयान यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के साथ गहराई से जुड़ना उनके लिए तत्काल सुरक्षा नहीं, बल्कि आधी नहीं, बलिदान और भरोसे की यात्रा है।
व्यাখ्या बिंदु
उद्धरणीय विचार (पूर्व-प्रकाशन टिप्पणियाँ)
मार्थ हेन्री, एलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के संदर्भ में कम से कम उद्धरणों के अनुसार: यहापत्ति परमेश्वर के साथ आस्थागत संबंध की शुरुआत है—यही कारण है कि हिंसा या तड़प से बचने के लिए बलिदान जरूरी बताया गया।
संगत व्याख्या से गौरतलब तथ्य
- परमेश्वर के साथ तुरंत भेंट से पहले, प्रेरित नेता मोड़ लेते हैं और यह शब्दकथा प्रसंग बताती है कि यह धार्मिक कर्म में भागीदारी की सक्रियता है।
- तीन दिन की यात्रा का आशय है — जंगल में एक पवित्र समय, जिसमें आदर्श सर्वस्व देकर आराधना करनी होती है।
संबंधित उद्धरणों के साथ संक्षेप
1) अन्य प्रेरितों के उदाहरण: परमेश्वर की उपस्थिति के लिए कदम उठाने पर लोगों को निदान मिलता है; भय से नहीं, विश्वास से आगे बढ़ना चाहिए।
2) इससे जुड़ी एक-दो समान संदर्भ-चेतावनियाँ: प्रभु के साथ समर्पण का उल्लेख पुराने नियम की आराधना-यात्राओं में बार-बार आता है; विश्वास के कारण आगे बढ़ना चाहिए।
3) व्यावहारिक पालन: आस्थावान जीवन में कठिनाइयों के समय भी ईश्वर के लिए एक पवित्र समर्पण बनाए रखें, ताकि सुरक्षा और उद्धार संभव हो सके।
छोटा पालन-नुस्खा
प्रिय पाठक, चुनौतीपूर्ण समय में भी परमेश्वर के उद्देश्य के प्रति नम्र समर्पण बनाए रखें। भय के बजाय विश्वास से कदम उठाने पर ही उद्धार की योजना स्पष्ट होती है।
क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनके तात्पर्य
— क्रॉस-रेफरेंसेज़ 1:14, 3:12 आदि उन घटनाओं की स्मृति कराती हैं जहाँ लोग divine बुलाहट पर भरोसा दिखाते हैं।
नोट: उपरोक्त में किसी भी पूर्ण-वाक्यांश का पूर्ण पाठ उद्धृत नहीं किया गया है; केवल संदर्भित विचार और थीमैटिक निष्कर्ष दिए गए हैं।