Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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उत्पत्ति 5:14 — केनान की आयु और मृत्यु
इस पद का स्पष्ट संदर्भ क्रमबद्ध जन्म-चरित्र और पितृक परिवार की आयु-वृत्ति की पंक्ति की समाप्ति को दर्शाता है। केनान, एब्रा के मुख्य पूर्वजों की सूची में एक विशिष्ट चरण का प्रतिनिधित्व करता है, जब लाखों वर्षों के क्रम में मनुष्यों की जीवन-आयु दिखाई देती है। इस वाक्य में यह बतलाया गया है कि केनान की कुल आयु नौ सौ दस वर्ष हुई; अंत में वह मर गया।
यकृत पाठ से पाठक क्या सीखते हैं
इस पाठ के पीछे का दृढ़ संदेश यह है कि परमेश्वर की योजना और संसार की निरंतरता के बीच एक पथ-निर्देश है: जीवन का दीर्घकाल बना रहता है, पर अंत में मृत्यु है। परमेश्वर के काल-निर्धारण में मानव जीवन की सीमा स्पष्ट है, और यह स्मरण दिलाता है कि जीवन के सभी स्थायित्व परमेश्वर की गरिमा के अधीन हैं।
ईश्वर से जुड़ी समझ और विश्वास
यहाँ हम देखने वाले हैं कि जीवन की लम्बाई भी एक इतिहास-चिह्न है—पितर-वंशावली की निरंतरता और संसार के अस्थायित्व की याद दिलाती है। परमेश्वर के प्रति विश्वास में, व्यक्ति को यह याद रखना चाहिए कि जीवन का उद्देश्य परमेश्वर की महिमा और उसकी आज्ञाओं में स्थिरता है, न कि दीर्घायु स्वयं।
शब्दों और imagery की स्पष्टता
“आयु” यहाँ एक स्पष्ट मानक है—केवल वर्षों की संख्या नहीं, बल्कि परमेश्वर के सच-आधारित समय-सारिणी में मनुष्य का स्थान। “मर गया” बार-बार आने वाली मृत्यु के प्राकृतिक सत्य को दोहराता है, जो जीवन के पेचिदा चक्र का भाग है।
सम्बन्धित पद वाले संकेत
1) उत्पत्ति 5:5 में आदम की मृत्यु की पुष्टि—एक ही पंक्ति के भीतर मृत्यु का स्थायी तत्त्व दिखता है। 2) हबक्कुक 2:4 के विश्वास के आयाम—जब दीर्घायु के पीछे सदा-स्थिर विश्वास की आवश्यकता होती है, तब परमेश्वर के न्याय और आशीर्वाद में संतुलन बना रहता है। 3) यहूदा 14–15 के वक्तव्य से मानवीय जीवन और परमेश्वर की न्याय-व्यवस्था के बीच का संतुलन समझ में आता है।
आज के पाठ के लिए व्यावहारिक अनुप्रयोग
उद्धृत अभिधानों के संकेत
इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के मौलिक शिक्षण-टुकड़ों से चयनित विचार एकीकृत किये गए हैं। क्रिया-गतिक टिप्पणी को संतुलित करने हेतु इन अनुभागों के संक्षिप्त उद्धरण शामिल हैं, ताकि पाठक को मानक-आधार समझ मिले।
संक्षिप्त समेकित व्याख्या
केनान की आयु-गणना एक इतिहास-चिह्न है जो यह दर्शाती है कि परमेश्वर की योजना में मानव जीवन की सीमा कैसे निर्धारित है और मृत्यु प्रत्येक मनुष्य के जीवन-चक्र का भाग है। इसे याद दिलाते हुए वर्तमान पाठक स्वयं के जीवन को परमेश्वर के साथ गहरे जुड़ाव में देखने के लिए प्रेरित होते हैं—जीवन की गुणवत्ता और विश्वास का सतत अभ्यास, न कि मात्र आयु की लम्बाई।
Cross-references: उत्पत्ति 5:5; इब्रानी 9:27; यशयाह 38:1-8 — ये संकेत जीवन-चक्र, मृत्यु और परमेश्वर की souverainता पर विचार को गहराते हैं।