उत्पत्ति 5:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इस प्रकार आदम की कुल आयु नौ सौ तीस वर्ष की हुई, तत्पश्चात् वह मर गया।

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उत्पत्ति 5:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

अर्थ: आदम के जीवन की पूर्ण आयु और उसके बाद मृत्यु

उत्पत्ति 5:5 में कहा गया है कि आदम की कुल आयु नौ सौ तीस वर्ष की हुई और फिर उसने मृत्यु को प्राप्त किया। यह वाक्य तात्त्विक रूप से पितृक इतिहास का एक तथ्य है, जिसमें जीवन की दीर्घायु और उसके बाद के अंत का क्रम स्पष्ट किया गया है।

प्रसंस्करण/पृष्ठभूमि

यह अध्याय पितरों की पंक्तियों की सूची है जो परमेश्वर की रचना-यात्रा के आरम्भिक चरण को दर्शाती है। आदम का जन्म से लेकर मृत्यु तक का क्रम उसकी संपूर्ण जीवन-प्रतिष्ठा का संकेत है—उच्चावस्था, एकाग्रता और परमेश्वर के साथ संबंध में वर्षों का विशिष्ट क्रम। इस आयु की बड़ी संख्या परमेश्वर के आशीर्वाद और मनुष्य के पतन के बाद जीवन के वास्तविकता का परिचायक मानी जाती है।

व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ

- आयु की अत्यधिक दीर्घता पितृक लेखन में सामान्य है और यह बताती है कि पहले मनुष्यों की पीढ़ियाँ अक्सर पृथ्वी पर लंबा समय बिताती थीं। यह समय-सीमा उनके जीवन के हर पहलू में परमेश्वर की व्यवस्था का संकेत है।

- "तत्पश्चात् वह मर गया" की पंक्ति हर वंशावली के अंत में दोहराई गई है, जो एक क्रमिक स्मरण कराती है कि जीवन का क्षणभंगुरपन और अंत सभी के लिए समान है, भले ही जीवन कितने वर्षों का क्यों न हो।

छोटी थीम सूची

  • दीर्घायु बनाम क्षणभंगुर जीवन की सच्चाई
  • मनुष्य की निर्भरता और परमेश्वर के क्षय-नियम
  • पितृक इतिहास से सीख और परमेश्वर के स्वरूप की स्मृति

संदर्भित विभेदीय विचार (Cross-references)

  • फिरौन के समय तक जीवन के लिए परमेश्वर की संरचना—यह दिखाता है कि दीर्घायु का संकेत कैसे इतिहास में चलकर अन्य धारणाओं को जन्म देता है। (उत्पत्ति 9; साथ ही देखें यशायाह 46:4) — छोटा संकेत: परमेश्वर के संरक्षण में जीवन की निरंतरता का विचार।
  • यहोवा की योजना में समय का संकेत—जीवन-चक्र के अंत की याद दिलाने वाले वाक्यांश अक्सर नये नियम में भी जीवन के उद्देश्य को समझाते हैं। (रोमियों 6:23; यूहन्ना 1:12–13) — संकेत: ईश्वरीय अनुग्रह से नवीन जीवन की दिशा।
  • पूर्वजों की याद में नैतिक निर्देश—पश्चिमी/पूर्वी पवित्र ग्रंथों में परिवार-वंश की स्मृति से आचार और विश्वास की स्थिरता मिलती है। (सभोपदेशक 3:1–8) — संकेत: नियत समय और उद्देश्य की क्रमिकता।

व्यावहारिक निष्कर्ष

जीवन की लंबी अवधि भले ही आनन्ददायक प्रतीत हो, पर वास्तविक प्रमुखता उद्देश्य और परमेश्वर के साथ सच्चे संबंध में है। हर दिन वह स्मरण कराता है कि जीवन एक देह-यात्रा है, जिसमें समय के साथ विश्वास, अनुशासन और उपहार समझकर जीना चाहिए।

शब्द-याद/नोट

ऐतिहासिक टिप्पणीकारों के अनुसार, आदम की आयु की भिन्न-भिन्न व्याख्याओं में यह देखा गया है कि दीर्घायु परमेश्वर के कहे अनुसार विश्व की प्रारम्भिक अवस्था की विशेषता है, जो बाद की पीढ़ियों के लिए एक प्रमाण बनती है।

उद्धृत विचार (जो प्रकाशित साहित्य से सीधे सम्बद्ध हैं):

Matthew Henry, Albert Barnes एवं Adam Clarke के संकलित भिन्न-भिन्न टिप्पणियाँ इस एक वाक्य में जीवन के उद्देश्य और परमेश्वर के आदेश की गहराई को उजागर करती हैं। जहां-कहीं उनहनें ऐसी शब्दावली का उपयोग किया है जो जीवन की क्रमिकता और मृत्यु के निष्कर्ष को स्पष्ट करते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 5:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और अपने माथे के पसीने की रोटी खाया करेगा, और अन्त में मिट्टी में मिल जाएगा; क्योंकि तू उसी में से निकाला गया है, तू मिट्टी तो है और मिट्टी ही में फिर मिल जाएगा।”

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