यहोशू 18:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और उस पहाड़ के सिरे पर उतरी, जो हिन्नोम के पुत्र की तराई के सामने और रापा नामक तराई के उत्तरी ओर है; वहाँ से वह हिन्नोम की तराई में, अर्थात् यबूस के दक्षिणी ओर होकर एनरोगेल को उतरी;

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यहोशू 18:16 पद-दर-पद बाइबल टीका

यहोशू 18:16 — हिंदी स्पष्टार्थ

इस पद का प्राथमिक अर्थ है: यह पहाड़ के किनारे की भौगोलिक स्थिति बताता है—यबूस के दक्षिण की तराई और हिन्नोम के तराई के सामने स्थित एक ऊँचा भाग, जहाँ यहोशू ने पड़ाव डाला और फिर प्रकरण के अनुसार भागभूमि के दायरे के विभाजन की योजना बनाई।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यहोशू ने फिरऔन-याज के बाद इब्रानी ठिकानों के विभाजन की प्रक्रिया जारी रखी। इसVERSE में यह बतलाया गया है कि किस पहाड़ी या तराई क्षेत्र से किस दिशा में यात्रा कर हिन्नोम, यहूदाय के नीचे आने वाले क्षेत्र, एनरोगेल और यबूस के निकट स्थित स्थानों की पहचान की गई है। यह संदर्भ ऐतिहासिक भूगोल की सूक्ष्म जानकारी देता है ताकि आदमी यह समझ सके कि किस रास्ते पर यहोशू और उसकी सेना आगे बढ़ी होगी और कब कब नगरों के दायरे तय किए गए।

चर्चित विश्लेषण

- भूगोल की सटीकता: पहाड़ के सिरे और तराई की दिशा योग्यता से मिलती-जुलती है, ताकि यह स्पष्ट हो कि यहोशू किस मार्ग से आगे बढ़े और किन नगरों के निकट पहुँचे।

- नगरों की पहचान: हिन्नोम के तराई, रापा तराई, एनरोगेल और यबूस दक्षिणी ओर—इन नामों के साथ क्षेत्रीय विभाजन और बाहरी चोटों के रणनीतिक महत्व का संकेत मिलता है।

- विभाजन की प्रक्रिया: यहोशू ने प्रदेश की सीमाओं की पहचान और उनके भीतर रहने वालों के लिए निर्धारित क्षेत्र का क्रम रखा, जो बाद की वचनों में यहूदियों के वास-स्थान की संरचना बनाता है।

संरचना-आत्म समीक्षा (मुख्य विचार)

  • भौगोलिक सूचक: स्थान-निर्देशन से क्षेत्रीय पहचान बनती है।
  • दिशात्मक क्रम: पहाड़ से तराई तक की दिशा योजना में महत्त्वपूर्ण है।
  • स्थानीय नामों का महत्व: क्षेत्र के सामाजिक-भौगोलिक संकेतों को समझना आवश्यक है।

अनुबंधित cross-references (संक्षेप में)

1) यहोशू 15:5 — यहूदा के भूभाग की परिधियाँ समझाने में साथ देता है कि तराई और पहाड़ी क्षेत्रों का संयोजन कैसे निर्णयों में आता है।

2) यहोशू 18:11-15 — वास-उत्तरी नगरों के क्रम के बारे में एक विस्तृत अनुक्रम देता है, जिससे इस verse के भूगोलिक क्रम की समझ गहरी होती है।

3) यशायाह 2:2-3 जैसे भूगोल-आधार पर शहरों के महत्व के संकेत, एक संदर्भ के रूप में देखने लायक हैं।

व्यावहारिक निष्कर्ष

इस पद से सीख मिलती है कि आस्तीन-चीन्हे हुए स्थानों की जानकारी और भूगोल को समझना वर्गीकरण के लिए आवश्यक है। जब राजनीतिक-युद्ध या नदी-मार्ग की योजना बनानी हो, तो क्षेत्रीय पहचान की स्पष्टता निर्णायक होती है।

ध्यान दें: इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सीधे उद्धरण आवश्यकतानुसार संकेतित हैं; यदि उपलब्ध हों, वे संक्षेप में नीचे उद्धृत हो सकते हैं.

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यहोशू 18:16 समानांतर पद और संबंधित वचन

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2 राजाओं 23:10 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 राजाओं 23:10 (HINIRV) »
फिर उसने तोपेत जो हिन्नोमवंशियों की तराई में था, अशुद्ध कर दिया, ताकि कोई अपने बेटे या बेटी को मोलेक के लिये आग में होम करके न चढ़ाए।

यहोशू 15:7 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यहोशू 15:7 (HINIRV) »
और वही सीमा आकोर नामक तराई से दबीर की ओर चढ़ गया, और उत्तर होते हुए गिलगाल की ओर झुकी जो तराई के दक्षिणी ओर की अदुम्मीम की चढ़ाई के सामने है; वहाँ से वह एनशेमेश नामक सोते के पास पहुँचकर एनरोगेल पर निकला;

यशायाह 30:33 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 30:33 (HINIRV) »
बहुत काल से तोपेत तैयार किया गया है, वह राजा ही के लिये ठहराया गया है, वह लम्बा-चौड़ा और गहरा भी बनाया गया है, वहाँ की चिता में आग और बहुत सी लकड़ी हैं; यहोवा की साँस जलती हुई गन्धक की धारा के समान उसको सुलगाएगी।

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