Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यहोशू 18:1 यहोशू 18:2 यहोशू 18:3 यहोशू 18:4 यहोशू 18:5 यहोशू 18:6 यहोशू 18:7 यहोशू 18:8 यहोशू 18:9 यहोशू 18:10 यहोशू 18:11 यहोशू 18:12 यहोशू 18:13 यहोशू 18:14 यहोशू 18:15 यहोशू 18:16 यहोशू 18:17 यहोशू 18:18 यहोशू 18:19 यहोशू 18:20 यहोशू 18:21 यहोशू 18:22 यहोशू 18:23 यहोशू 18:24 यहोशू 18:25 यहोशू 18:26 यहोशू 18:27 यहोशू 18:28



पाठ का संक्षिप्त परिचय
यहोशू 18:21 में बिन्यामीनियों के गोत्रों के वितरण का भाग है—यानी गोत्रों के अनुसार उनके नगर तय हुए, जिनमें यरीहो, बेथोग्ला, और एमेक्कसीस शामिल हैं। यह वाक्यांश पवित्र भूमि के विभाजन की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है जहाँ हर गोत्र को अपने-अपने नगर दिये गये ताकि कबीलाई राष्ट्र के विरही एकता और व्यवस्था बनी रहे।
पंक्ति-by-पंक्ति समझ
यहोशू 18:21 सूचीबद्ध नगरों की एक विशिष्ट भाग है जो बिन्यामीनियों के गोत्रों के अनुसार तय किए गये। इस verse में नगरों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज हैं—यही संकेत देता है कि प्रत्येक गोत्र को अपने क्षेत्र से निष्पादन और सुरक्षा मिली।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
गृहस्थी और समाज की व्यवस्थित व्यवस्था का महत्व यहाँ दिखता है: परमेश्वर के लोग क्रमबद्ध रूप से अपनी जगह पाते हैं ताकि जातीय समुदाय के भीतर सुरक्षा, व्यवस्था और सामंजस्य बना रहे। प्रत्येक गोत्र के नगर उनके पहचान-चिह्न हैं, जो उनके आंतरिक विश्वास और उत्तरदायित्व को दर्शाते हैं। इससे प्रेरणा मिलती है कि ईश्वर के लोक में हर सदस्य के लिए एक निश्चित स्थान और जिम्मेदारी है, जिससे संयुक्त परिवार/समाज सुदृढ़ बनता है।
अन्य प्रमुख चित्त-विचार (Cross-reference)
कथा-योग्यता और अन्य विश्लेषण
पिछला अध्याय गोत्र-वार भू-भाग के वितरण पर केंद्रित है; यह verse स्थानीय प्रशासन और धार्मिक जिम्मेदारियों की परिघटना दर्शाता है। प्रसिद्ध व्याख्यात्मक सहयोगी लेखकों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke ने इसे मिलकर यह संकेत किया है कि नगर-निर्धारण केवल भू-सीमा तय करने के बजाय आंतरिक अनुशासन और समुदाय-निष्ठा के पक्ष में अधिक है।
विशेष उद्धरण (एतिहासिक समर्थक टिप्पणियाँ)
अगर उपलब्ध हो, तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के ठोस संक्षेप उद्धरण नीचे दिए जा सकते हैं; यहाँ धारणा है कि राजनैतिक-धार्मिक ढांचे में व्यवस्था और पवित्रता दोनों का संयोजन है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
छोटी संदर्भ सूची और उनके जुड़ाव
1) गोत्र-वार भू-भाग का वितरण: यहोशू 18 जैसे अध्यायों में सामान्य पद्धति है। 2) नगर-निर्धारण का सामाजिक-धार्मिक आयाम: समुदाय के सदस्य एक दूसरे के प्रति उत्तरदायित्व निभाते हैं। 3) नेतृत्व और सुरक्षा: नगर-स्थिति से परमेश्वर केतान और व्यवस्था की संरक्षण-निष्ठा स्पष्ट होती है।
संक्षेप में
यह verse गोत्रों के नगरों के क्रमबद्ध वितरण पर प्रकाश डालता है; यह पाठ यह सिखाता है कि परमेश्वर की योजना में हर परिवार और गोत्र का एक पक्का स्थान है, जिससे समुदाय सुरक्षित, संरक्षित और एकजुट रहता है।