Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 9:1 लूका 9:2 लूका 9:3 लूका 9:4 लूका 9:5 लूका 9:6 लूका 9:7 लूका 9:8 लूका 9:9 लूका 9:10 लूका 9:11 लूका 9:12 लूका 9:13 लूका 9:14 लूका 9:15 लूका 9:16 लूका 9:17 लूका 9:18 लूका 9:19 लूका 9:20 लूका 9:21 लूका 9:22 लूका 9:23 लूका 9:24 लूका 9:25 लूका 9:26 लूका 9:27 लूका 9:28 लूका 9:29 लूका 9:30 लूका 9:31 लूका 9:32 लूका 9:33 लूका 9:34 लूका 9:35 लूका 9:36 लूका 9:37 लूका 9:38 लूका 9:39 लूका 9:40 लूका 9:41 लूका 9:42 लूका 9:43 लूका 9:44 लूका 9:45 लूका 9:46 लूका 9:47 लूका 9:48 लूका 9:49 लूका 9:50 लूका 9:51 लूका 9:52 लूका 9:53 लूका 9:54 लूका 9:55 लूका 9:56 लूका 9:57 लूका 9:58 लूका 9:59 लूका 9:60 लूका 9:61 लूका 9:62



मुख्य व्याख्या बिंदु
लूका 9:12 में प्रेरितों की चिंता रात के आने पर भीड़ के लिए भोजन की व्यवस्था और स्थान के बारे में है; यीशु ने बारहों से कहा कि वे खुद भीड़ को विदा कर दें ताकि वे शहरों और ग्रामों में जाकर आवास और भोजन ढूंढ़ लें। यह हमको यह सिखाता है कि सेवा करते समय भी व्यवहारिक आवश्यकता और आध्यात्मिक देख-रेख एक साथ चलनी चाहिए, और प्रभु की योजना में असुविधा भी अवसर बन जाती है।
साहित्यिक संदर्भ (ल्यूका के संदर्भ में)
यह पद यीशु के चेलों के साथ सन्निकट समुदाय-जीवन का चित्र प्रस्तुत करता है: भीड़ ने उनके पास भोजन की चिंता के साथ एक व्यावहारिक समस्या रखी; यीशु ने अध्यात्मिक ध्यान को छोड़कर नहीं, बल्कि उसे प्रकृति के साथ जोड़कर समाधान की दिशा को स्पष्ट किया। लूका में यह घटनाक्रम परमेश्वर की राज्य-यात्रा में सार्वजनिक प्रत्यक्ष देखरेख और मानवीय ज़रूरतों के संतुलन को दिखाता है।
धार्मिक-वैचारिक महत्व
यहाँ स्पष्ट है कि यीशु की miraculously नहीं, पर व्यावहारिक व्यवस्था और सामुदायिक भागीदारी से भोजन और ठहरने की व्यवस्था संभव होती है। यह मानसिकता ईश्वर की शरण में रहने वाले समुदाय का एक गतिविधिशील चित्र है: अपने कर्तव्य-परायणता के साथ मदद मांगना और दूसरों के साथ साझा करना। यह दर्शाता है कि परमेश्वर के राज्य के संदेशों में मानवीय कार्यों की भूमिका अपरिहार्य है।
पवित्रशास्त्रीय संबंध (Cross-references)
reflection questions
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पाठ सिखाता है कि प्रभु के राज्य की राह में न केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण जरूरी है, बल्कि व्यावहारिक व्यवस्था और समुदाय-कार्य की भी आवश्यकता है। यीशु ने अवसर दिया कि चेलों की सहायता से भीड़ का प्रबंध हो; वे लोग अपने संसाधनों से सहयोग दें और प्रभु की देखरेख में यह संभव हुआ।
टेक-अप संदर्भ (महत्वपूर्ण उद्धरण)
मत्ती हूण मोड़:
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