Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 9:1 लूका 9:2 लूका 9:3 लूका 9:4 लूका 9:5 लूका 9:6 लूका 9:7 लूका 9:8 लूका 9:9 लूका 9:10 लूका 9:11 लूका 9:12 लूका 9:13 लूका 9:14 लूका 9:15 लूका 9:16 लूका 9:17 लूका 9:18 लूका 9:19 लूका 9:20 लूका 9:21 लूका 9:22 लूका 9:23 लूका 9:24 लूका 9:25 लूका 9:26 लूका 9:27 लूका 9:28 लूका 9:29 लूका 9:30 लूका 9:31 लूका 9:32 लूका 9:33 लूका 9:34 लूका 9:35 लूका 9:36 लूका 9:37 लूका 9:38 लूका 9:39 लूका 9:40 लूका 9:41 लूका 9:42 लूका 9:43 लूका 9:44 लूका 9:45 लूका 9:46 लूका 9:47 लूका 9:48 लूका 9:49 लूका 9:50 लूका 9:51 लूका 9:52 लूका 9:53 लूका 9:54 लूका 9:55 लूका 9:56 लूका 9:57 लूका 9:58 लूका 9:59 लूका 9:60 लूका 9:61 लूका 9:62



लूका 9:30 का संदर्भ और केंद्रीय विचार
पर्वका प्रसंग के मुताबिक, यीशु के जीवित मंत्रालय का एक क्षण दर्शक बनकर, अचानक मूसा और एलिय्याह दिखाई देते हैं और वे Jesus के साथ बातचीत कर रहे थे। यह घटना तब घटती है जब यीशु प्रकाशपूर्वक परिवर्तन (Transfiguration) की तैयारी में पवित्र पर्वत पर जाते हैं। इस दृश्य में पुरानी धर्मशास्त्र की अतिशयता-योजना और क्रूस के लिए उसकी पूर्वसूचना एक साथ उभरती है: परमेश्वर की योजना पूरी तरह प्रकट हो रही है कि मसीह के माध्यम से भविष्य की उद्धार की राह कहाँ खुलती है।
केंद्रीय विचार
इस verse में तीन प्रमुख संकेत मिलते हैं: (1) धर्मशास्त्र के दिव्य पुरुष मूसा और एलिय्याह, दोनों पुराने नियम के प्रतिनिधि, यीशु के साथ उपस्थित होते हैं; (2) यह संकेत देता है कि यीशु की मरम्मत-यात्रा पुराने वादों के पूर्णत्व को चिह्नित करती है; (3) पवित्र पर्वत पर का दृश्य परमेश्वर के वचन की महिमा और पुत्र की प्रतिष्ठा के बीच एक सहज समन्वय दिखाता है।
दो-तीन मुख्य विषय
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके संक्षेप विवेचन
1) निर्गमन 34:29-35 का संदर्भ: मूसा के चेहरे का तेज़ रंग अपने अनुभव से जुड़ा है; यह दिखाता है कि परमेश्वर की उपस्थिति परिवर्तनकारी प्रभाव डालती है।
2) इब्रानियों 1:1-2: यीशु को पुरानी विद्या का संपूर्ण उत्तर माना गया है; पिता की वाणी और पुत्र की महिमा एक ही केंद्रीय योजना का भाग हैं।
3) मत्ती 17:1-9 और मार्क 9:2-8: समान घटना का पाठ, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह घटना शिष्य-प्रेरणा और भविष्य की सामर्थ्य के लिए एक पुख्ता आधार है।
व्यावहारिक विचार
हम भी अक्सर अपने विश्वास में भावी कठिनाइयों और असफलताओं का सामना करते हैं। इस प्रदर्श से शिक्षा मिलती है कि कोई भी चुनौती कितनी भी बड़ी क्यों न हो, परमेश्वर की महिमा और यीशु की प्रतिष्ठा हमें स्थिरता प्रदान करती है। दिन-प्रतिदिन की प्रार्थना और पवित्र शास्त्र के अध्ययन के साथ हम पुराने कंठ-विश्वासों के साथ नए प्रकाश को भी ग्रहण कर सकते हैं।
संक्षेप निष्कर्ष
लूका 9:30 में मूसा और एलिय्याह के साथ यीशु की चर्चा एक विशाल योजना के पूर्णत्व की उद्घोषणा है। यह दृश्य शिष्यों को यह संकेत देता है कि परमेश्वर की उद्धार योजना, पुराने नियम के विश्वासी प्रतीक के साथ यीशु के माध्यम से नई रोशनी पाती है।
टिप्पणी: इस पंक्ति के साथ मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-domain विचारों के छोटे उद्धरण यदि उपलब्ध हों, तो उन्हें समेकित किया गया है, ताकि पाठक एक पूर्ण, संतुलित समरी प्राप्त कर सकें।