Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 9:1 लूका 9:2 लूका 9:3 लूका 9:4 लूका 9:5 लूका 9:6 लूका 9:7 लूका 9:8 लूका 9:9 लूका 9:10 लूका 9:11 लूका 9:12 लूका 9:13 लूका 9:14 लूका 9:15 लूका 9:16 लूका 9:17 लूका 9:18 लूका 9:19 लूका 9:20 लूका 9:21 लूका 9:22 लूका 9:23 लूका 9:24 लूका 9:25 लूका 9:26 लूका 9:27 लूका 9:28 लूका 9:29 लूका 9:30 लूका 9:31 लूका 9:32 लूका 9:33 लूका 9:34 लूका 9:35 लूका 9:36 लूका 9:37 लूका 9:38 लूका 9:39 लूका 9:40 लूका 9:41 लूका 9:42 लूका 9:43 लूका 9:44 लूका 9:45 लूका 9:46 लूका 9:47 लूका 9:48 लूका 9:49 लूका 9:50 लूका 9:51 लूका 9:52 लूका 9:53 लूका 9:54 लूका 9:55 लूका 9:56 लूका 9:57 लूका 9:58 लूका 9:59 लूका 9:60 लूका 9:61 लूका 9:62



अर्थ का प्रत्यक्ष बयान
लूका 9:51 में कहा गया है कि जब यीशु के ऊपर उठाए जाने के दिन पूरे होने को थे, तब उसने यरूशलेम जाने का दृढ़ निर्णय किया। यह verse यह दिखाता है कि यीशु का लक्ष्य, उसकी मृत्यु और पुनर्जीवन का केंद्र बिंदु, यरूशलेम के मार्ग पर अग्रसर था—जहाँ उसकी क़ुरबानी पूरी होनी थी।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ लूका-चौथी भाग का प्रमुख मोड़ है, जहाँ यीशु की यात्राएँ यरूशलेम की ओर अग्रसर रहती हैं। फेसबुक-सीमा से अधिक, यह समय पर्व-आख्यान से पहले का है, जब यीशु ने अपने संदेश को अंतिम रूप से पूर्ण करने के लिए यरूशलेम जाना तय किया। यात्रा-योजना के साथ, उनके शिष्यों के मन में कई आशंकाएँ और उम्मीदें थीं—पर यीशु ने दृढ़ता के साथ कहा कि यह bound समय आ पहुँचा है।
व्याख्यात्मक विचार
छोटा थीमैटिक चार्ट
अनुशंसा विचार और क्रॉस-रेफरेंसेस
1) यशायाह 50:5-7 — प्रेरित धैर्य और भगवान के उद्देश्य के साथ समर्पण के पहलू को बयां करता है, जहाँ सेवक विश्वासघात के बीच भी अपनी राह बनाते हैं।
2) मती 20:28 — उद्धारकर्ता की सेवा-आर्थिकता, किसी के लिए नहीं बल्कि जन-कार्य के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने का भाव स्पष्ट करता है।
3) मर्कुस 10:45 — उपदेशक का सेवकत्व और बलिदान का सिद्धांत, जो यीशु के मिशन के अनुरूप है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम यदि Christus के इस दृढ़ निर्णय से सीखें, तो जीवन में कठिन मार्ग भी परमेश्वर की योजना का भाग बन जाते हैं। आत्म-परिश्रम, धैर्य और दयालुता के साथ कठिन परिस्थितियों का सामना करना चाहिए, ताकि हम भी ईश्वर के उद्देश्य के साथ चलते रहें।
महत्वपूर्ण उद्धरण (Public-domain commentators)
इस विचार को विस्तृत करते हुए, समकालीन प्रकाशकों के सार में यह बात उभरती है—यीशु का यात्रा-निर्णय परमेश्वर के निर्णायक योजना के अनुरूप है; यह मानवजाति के उद्धार के लिए अति आवश्यक है।
नोट: नीचे तीन प्रसिद्ध उद्धरणों का संक्षेप उपयोग करके पाठ को गढ़ा गया है; इनमें से कोई भी पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण नहीं दिया गया है।
cross-reference नोट: मारकुस-आख्यान में भी यीशु की यात्रा और उद्धार की योजना का संयोजन दिखता है; लूका में यह निर्णय केंद्रित है कि कैसे वह यरूशलेम की ओर अपने मिशन को पूरी तरह ले जाते हैं, कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं बनाते।