Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 9:1 लूका 9:2 लूका 9:3 लूका 9:4 लूका 9:5 लूका 9:6 लूका 9:7 लूका 9:8 लूका 9:9 लूका 9:10 लूका 9:11 लूका 9:12 लूका 9:13 लूका 9:14 लूका 9:15 लूका 9:16 लूका 9:17 लूका 9:18 लूका 9:19 लूका 9:20 लूका 9:21 लूका 9:22 लूका 9:23 लूका 9:24 लूका 9:25 लूका 9:26 लूका 9:27 लूका 9:28 लूका 9:29 लूका 9:30 लूका 9:31 लूका 9:32 लूका 9:33 लूका 9:34 लूका 9:35 लूका 9:36 लूका 9:37 लूका 9:38 लूका 9:39 लूका 9:40 लूका 9:41 लूका 9:42 लूका 9:43 लूका 9:44 लूका 9:45 लूका 9:46 लूका 9:47 लूका 9:48 लूका 9:49 लूका 9:50 लूका 9:51 लूका 9:52 लूका 9:53 लूका 9:54 लूका 9:55 लूका 9:56 लूका 9:57 लूका 9:58 लूका 9:59 लूका 9:60 लूका 9:61 लूका 9:62


लूका 9:37 — पहाड़ से उतरते ही बड़ी भीड़
पद का तात्पर्य तुरंत चित्र: प्रभु यीशु अपने शिष्यों के साथ पर्वतीय जगह से नीचे उतरते हैं, और उसी क्षण एक बड़ी भीड़ उनके सामने जमा हो जाती है। यह दृश्य तत्काल प्रभाव से प्रभु की पृथ्वी पर उपस्थित सत्ता, दया और क्षमा का परिचय देता है। भीड़ के अनुमान और चहल-पहल से यह स्पष्ट है कि यीशु का संदेश जन-जन तक पहुँच रहा था और लोग उसकी उपस्थिति से आत्मिक ऊर्जा पाते थे।
ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ से जो स्पष्ट होता है
यह पाठ दिखाता है कि ईश्वर का राज्य धीर-धीरे नहीं, बल्कि जनता के बीच सक्रिय रूप से आता है। यीशु के साथ लोगों की भीड़ यह बताती है कि प्रभु का कार्य सीमाओं से परे है और वह हर वर्ग के लोगों के लिए उपस्थित है—भले वे कितने भी संघर्ष में क्यों न हों। विश्वास के संदर्भ में यह दर्शाता है कि लोगों को यीशु पर दृष्टि डालकर अपने जीवन के मोड़ देखने हैं, क्योंकि वह सत्य, चंगाई और नई शुरुआत का स्रोत हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
संबद्ध पाठ
1) प्रश्न और तावीज़: लूका 8:40–56 में भीड़ के बीच यीशु की उपस्थिति, विश्वास और यीशु की करुणा का संयोजन दिखते हैं।
2) प्रयोग और पवित्रता: मत्ती 11:28–30 मेंJesus की सरल आह्वान—उसके पास आओ, जो विश्राम और राहत देता है—यह पाठ इस दायरे से जुड़ता है।
3) मुक्ति और आज्ञा: मरकुस 5:1–20 में एक एकाकी भिडंत के बाद, यीशु ने दुष्टात्माओं पर अधिकार दिखाया, जो विश्वास की शक्ति को पुष्ट करती है।
अनुवादक-उद्धरण (पवित्र-ग्रंथ के पहले प्रसिद्ध टिप्पणीकारों से संकल्पित विचार)
ऐडम क्लार्क ने इस दृश्य के बारे में लिखा कि यीशु का मार्ग मानवता के लिए आशा का मार्ग है, जो श्रोताओं के सामने एक स्पष्ट प्रकाश बनकर उभरता है। उद्धरण केवल संकल्पनात्मक है; पूर्ण पाठ उद्धरण उपलब्ध नहीं है।
मैथ्यू हेनरी ने कहा कि यीशु अपनी सत्ता और दया के साथ लोगों के पास आते हैं, ताकि आस्था द्वारा लोग चमत्कारिक बदलाव का अनुभव कर सकें। संकेत-उद्धरण: “...तथा उनके पास आना” आदि संक्षेप में उल्लेखित है।
एल्बर्ट बार्न्स ने उक्त दृश्य को यह दर्शाने के लिए समझाया कि भीड़ का आकर्षण यह संकेत है कि ईश्वर का राज्य इस पृथ्वी पर वास्तविक रूप में आना शुरू हो गया है। संकेत-उद्धरण: संपूर्ण पाठ उद्धरण नहीं दिया गया है।
आज के लिए अनुप्रयोग
हम प्रत्येक दिन की भीड़ के बीच यीशु को आने दें—काम, दुख, चिंता, और उम्मीद के साथ। यीशु की उपस्थिति हमारे जीवन के संदिग्ध क्षणों में भी संबद्धता और आशा लाती है। यदि हम उसकी बताई राह पर चलें, तो हमारी आस्थाएं चमत्कारिक परिवर्तन का अनुभव कर सकती हैं।
संदर्भ-नोट्स
cross-reference: लूका 8:40–56; मत्ती 11:28–30; मरकुस 5:1–20 — इन पुराने संदेशों से बताता है कि यीशु की उपस्थिति और उसकी करुणा लोगों के जीवन में क्रमबद्ध बदलाव लाती है.
नोट: उपरोक्त पाठ में उद्धरण केवल संकल्पनात्मक हैं जहाँ प्रामाणिक पूर्ण उद्धरण उपलब्ध नहीं, वहाँ संक्षेप में उनका संकेत दिया गया है ताकि पाठ के भाव अंततः स्पष्ट रहें।