नीतिवचन 27:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जो तेरा और तेरे पिता का भी मित्र हो उसे न छोड़ना; और अपनी विपत्ति के दिन, अपने भाई के घर न जाना। प्रेम करनेवाला पड़ोसी, दूर रहनेवाले भाई से कहीं उत्तम है*।

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नीतिवचन 27:10 पद-दर-पद बाइबल टीका

नीतिवचन 27:10 का मानें सटीक अर्थ

यह पद स्पष्ट चेतावनी देता है: संकट के समय प्रियजन– खासकर माता-पिता के निकटतम मित्र, भाई के समान नहीं—की सामान्य सहायता, भरोसा और सहयोग को त्यागना उचित नहीं है। सरल शब्दों में, अपने परिवार-यानी मित्र और समुदाय के साथ मजबूत रिश्ते बनाए रखें; क्योंकि विपत्ति के समय वही सहयोगी सबसे मूल्यवान होते हैं।

पृष्ठभूमि और पाठ-संदर्भ

नीतिवचन में रिश्तों के व्यवहार पर केंद्रित शिक्षाएं अनेक प्रकार की सामाजिक सलाह देती हैं। यहां प्रेमचंद-परिवारिक रिश्ते, भरोसा और विश्वसनीय साथ देने की बात है। ‘तेरा और तेरे पिता का भी मित्र’ कहते हुए लेखक स्पष्ट करते हैं कि जन्म-जन्मांतर के रिश्ते से उच्चतर कोई चीज नहीं, लेकिन विपत्ति के समय असमर्थ होने पर अपने रिश्तों की सीमा समझना चाहिए—खासकर जब घर, सुरक्षा और सहायता का प्रश्न हो।

Interpretive observations (व्याख्या).

  • विश्वसनीय साथी: जो न केवल व्यवहार में मित्र हो, बल्कि संकट के समय भी साथ दे—ऐसे रिश्ते अधिक मूल्यवान हैं।
  • परिवार बनाम पड़ोसी: परिवार-सम्बन्धों का महत्व, परन्तु हर रिश्ता समान नहीं होता; परिस्थिति के अनुसार सहयोग की दिशा तय करनी चाहिए।
  • संतुलन की नीति: विपत्ति में भी अन्यायपूर्ण या हानिकारक संपर्क से बचना उचित है; अपने परिवार-सम्बन्धों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता हो सकती है।

छोटा थीमेटिक सूची

  1. भरोसे के रिश्ते की प्राथमिकता
  2. विपत्ति के समय उचित निर्णय लेना
  3. खरे मित्र बनाम मात्र परिचय, और परिवार-सम्पर्क की भूमिका

अनुसार cross-references और उनके संक्षिप्त अर्थ

यादगार क्रॉस-रेफरेंसेस: नीतिवचन 17:17 – मित्रता संघर्ष-समय में भी स्थिर रहती है; गलत समय में अल्पकालिक संपर्क से नुकसान हो सकता है।

येशायाह 1:4-5 का संकेत: एक परिवारिक और सामुदायिक एकता आवश्यक है, परन्तु संकट में निर्णय-संयम रखना पड़ता है।

मत्ती 7:12 का आचार-निर्देशन: दूसरे के लिए वैसा ही व्यवहार जो आप चाहेंगे; रिश्तों में विवेक और संयम।

परिहार्य अधिग्रहण – व्यावहारिक takeaway

कठिन समय में स्थायित्व और विश्वसनीयता के साथ अपने नजदीकी रिश्तों को प्राथमिकता दें। जरूरत पड़ने पर भरोसेमंद परिवारिक संगत को ही मार्गदर्शक बनाएं, क्योंकि प्रेमपूर्ण और स्थिर पड़ोसी वही होते हैं जो विपत्ति के दिन भी साथ निभाते हैं।

सूचित उद्धरणs (Public-domain commentaries)

एडम क्लार्क और अल्बर्ट बार्न्स के विचारों से उपयुक्त बिंदु जोड़े जाते हैं: यह संदेश व्यक्त करता है कि वास्तविक मित्र वही होते हैं जो संकट के समय साथ रहें; लेकिन परिवारिक संबंध-निर्भरता और परिश्रम की भी आवश्यकता है।

सार-सारंक्षेप

नीतिवचन 27:10 बताता है कि विपत्ति के दिन किस प्रकार के रिश्ते उपयोगी होते हैं: वही मित्र जो न केवल सुख में बल्कि दुख के समय भी साथ खड़े हों, उन्हें प्राथमिकता दें। यह संदेश सामाजिक नैतिकता और पारिवारिक सुरक्षा की संयुक्त परंपरा को पुष्ट करता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

नीतिवचन 27:10 समानांतर पद और संबंधित वचन

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