भजन संहिता 107:35 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह जंगल को जल का ताल, और निर्जल देश को जल के सोते कर देता है।

भजन संहिता 107:35 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 107:35 का संदर्भ और अर्थ

यह पद भजन 107 के एक बड़े पैरे में आता है जिसमें परमेश्वर के चमत्कारिक उद्धरण और प्रकृति के परिवर्तन को दर्शाया गया है। पहले चार भागों में पाताल, जंगल, निर्जल देश—हर परिस्थिति के लिए प्रभु की सृजन-शक्ति और मरम्मत की कृपा दर्ज है। इस छंद में विशेष रूप से जल की व्यवस्था का उल्लेख है: वह जंगल को जल का ताल बना देता है और निर्जल देश को जल के सोते कर देता है। इसका तात्पर्य यह है कि परमेश्वर हर जगह और हर परिस्थिति को नियंत्रित करता है, चाहे वह अवधि सुखद हो या कठिन।

मुख्य अर्थ

इस उद्धरण से संकेत मिलता है कि परमेश्वर की सत्ता प्राकृतिक तथा मानव-निर्मित परिस्थितियों पर भी प्रभाव डालती है—निर्जन या आर्ध्य सम्पूर्ण परिकल्पनाओं को भी पलट सकता है। यह उद्धारक की भूमिका को भी रेखांकित करता है: विपत्ति के समय जल के स्रोतों और जीवन के साधनों को पुनः स्थापित करना उसकी इच्छा और कृपा का कार्य है।

दो-तीन प्रमुख थीम

  • परमेश्वर की सत्ता: प्रकृति के हर तत्व—जल, भूमि, वायु—पर उसका हुक्म चलता है।
  • आत्मिक उद्धार की दिशा: भक्ति और आस्था के द्वारा लोग परमेश्वर की चमत्कारी रक्षा को अनुभव करते हैं।
  • उत्पत्ति-परिवर्तन की समयसूची: कठिन समय भी अंत में एक नई स्थिति और साधन प्रदान कर सकता है।

संबद्ध आयतों के संकेत

यह अध्याय भजन 107 में बार-बार यही संदेश देता है कि प्रभु की करुणा हर परिस्थिति से ऊपर है और उसकी कृपा से परिवर्तन संभव है। उद्धरण-स्तंभ के रूप में देखें तो पुराने परीक्षण की अन्य घटनाओं में भी जल और मार्गदर्शन के चमत्कार मिलते हैं, जैसे प्यासे को जीवित जल मिलना या मरुभूमि में मार्ग का खुलना—ये संकेत परमेश्वर की देखरेख और उद्धार के संकेत हैं।

व्यावहारिक चिंतन

हम भी तब सोचेंगे जब जीवन की जल-यातनाएं हो: क्या मैं परमेश्वर के सत्ता के आसरे अपने वर्तमान हालात को देखूँ? क्या मेरी प्यास, दुख या असुरक्षा उसे दिखाने का मार्ग बनती है ताकि वह मुझे जीवन के स्रोत से पूर्ण कर सके? कृपया कठिन समय में याद रखें कि परमेश्वर परिवर्तनकारी है; वह जल से जीवन देता है और निर्जল भूमि पर भी पानी लाने में सक्षम है—यही विश्वास अनुभूत हो सकता है।

छोटे-से-छोटा क्रॉस-रेफरेंस

1) निर्जन परिस्थितियों में ईश्वर के उद्धार पर विचार: यह विचार आपको उम्मीद देता है कि कठिन समय में भी आशा है। 2) जल-चमत्कार से संबंधित घटनाएं: परमेश्वर के जीवन-स्त्रोत बनने के संकेत की याद दिलाते हैं। 3) प्रकृति के नियंत्रण पर ध्यान: परमेश्वर की सत्ता प्राकृतिक क्रम को बनाए रखने में योगदान करती है।

संक्षिप्त समापन

भजन 107:35 संसार की विपरीतताओं के बीच भी परमेश्वर की सत्ता और कृपा का सत्य व्यक्त करता है—वह जंगल को जल का ताल बनाता है तथा निर्जल देश को जल के सोते कर देता है। यह संदेश हमें विश्वास के साथ उसकी चमत्कारी पूर्णता की ओर बुलाता है, ताकि हमारी आशा जीवित रहे और जीवन के सभी क्षेत्रों में ईश्वर की कृपा पर टिके।

वायदे के अनुसार, यह व्याख्या अन्य प्राचीन प्रकाशनों से संकलित विचारों को समन्वित करती है, जिसमें प्रकाशित-commentary परंपरा से संक्षेप उद्धरण भी शामिल होते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 107:35 समानांतर पद और संबंधित वचन

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भजन संहिता 114:8 (HINIRV) »
वह चट्टान को जल का ताल, चकमक के पत्थर को जल का सोता बना डालता है।

यशायाह 41:17 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 41:17 (HINIRV) »
जब दीन और दरिद्र लोग जल ढूँढ़ने पर भी न पायें और उनका तालू प्यास के मारे सूख जाये; मैं यहोवा उनकी विनती सुनूँगा, मैं इस्राएल का परमेश्‍वर उनको त्याग न दूँगा।

यशायाह 35:6 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 35:6 (HINIRV) »
तब लँगड़ा हिरन की सी चौकड़ियाँ भरेगा और गूँगे अपनी जीभ से जयजयकार करेंगे। क्योंकि जंगल में जल के सोते फूट निकलेंगे और मरूभूमि में नदियाँ बहने लगेंगी; (मत्ती 11:5, यशा. 41:17-18)

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