भजन संहिता 113:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह कंगाल को मिट्टी पर से, और दरिद्र को घूरे पर से उठाकर ऊँचा करता है*,

भजन संहिता 113:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 113:7 (HINIRV) —Immediate Setting

यह पद भय-हृदय को उबारने वाले एक ऐसे ईश्वर का परिचय देता है जो निम्न वर्ग के लोगों के आशीर्वाद-संस्कार में जुटे रहते हैं। भजनकार परम abundance के साथ यह बताता है कि प्रभु ऊँचा उठाने और नीचा दिखाने के अधिकार वही रखते हैं। शास्त्रवाणी में यह दृश्य है: एक कंगाल या दरिद्र को नीचे से उठाकर ऊँचा करना, और वही स्थान उसे सम्मान का पात्र बनाता है।

क्या बताता है यह पाठ: परमेश्वर की कृपा और राज्य-आधार

पवित्रताकारण यह पाठ हमें दिखाता है कि परमेश्वर सामाजिक स्थिति से बढ़-चढ़ कर दृष्टिकोण नहीं रखते। वह दबे-कुचले, गरीबी से जूझते लोगों के लिए उद्धार का देह-स्वर देता है और उन्हें समाज में सम्मान दिलाता है। इसका आशय यह है कि ईश्वर का राज, मानव की बाह्य स्थिति नहीं, बल्कि दया, न्याय और आंतरिक परिवर्तन पर टिकता है।

शब्दार्थ और imagery की व्याख्या

“कंगाल को मिट्टी पर से उठाकर ऊँचा करता है”—यह एक बारम्बार धार्मिक imagery है जिसमें दया से गिरा हुआ व्यक्ति पुनः गरिमा पाता है। मिट्टी से उठाने की क्रिया एक पुनरुत्थान या पुनःस्थापना को दर्शाती है। “दरिद्र” का यहाँ अर्थ सामाजिक-आर्थिक स्थिति से परे आस्था के संकेत भी दे सकता है—जो परमेश्वर को अपने उद्धारकर्ता के रूप में पहचानते हैं उन्हें सम्मान मिलता है।

Related passages (संश्लेषणात्मक cross-references)

  • यशायाह 57:15 — परमेश्वर जो ऊँचा रहता है, परंतु वह उन लोगों के साथ रहता है जो दया के साथ तड़पते हैं। समझोत्तरी: परमेश्वर दयालुता और उद्धार के लिए छोटों की ओर बढ़ते हैं।
  • याकूब 2:5 — विश्वास के साथ कर्मों की आवश्यकता; गरीबों के पक्ष में दया और न्याय के क्रिया-कलापों का महत्व।
  • लूका 1:52 — उच्चता, निम्नता और राजकीय व्यवस्था में दया का क्रम; ईश्वर निर्धनों को सम्मान देते हैं।

इन संकेतों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर का उद्धारकरण गरीब और पिशाच-निम्न पर नहीं रुकता; यह वह मूल्य है जो पूरे समाज के भीतर न्याय और गरिमा का संतुलन बनाता है।

पद की today-प्रासंगिकता

आज के दैनंदिन जीवन में, यह संदेश अदृश्यनीय नहीं है—जो व्यक्ति असुरक्षित, बेरोजगार या सामाजिक रूप से दबे हुए हों, उनसे ईश्वर का सम्बंध उनके आंतरिक मूल्य के अनुसार बना रहता है। चर्च और समुदाय के लिए यह एक बुलाहट है कि वे दया और सम्मान के साथ सभी को उठाने में भागीदार बनें।

मूल्यांकनात्मक संयुक्त सार

यह पाठ ईश्वर की उदारता, न्यायप्रिय धुरी और सांसारिक स्थिति से ऊपर उठने की दिव्य क्रिया का एक सुंदर चित्र देता है। Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त प्रभाव से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर सबसे कमजोर लोगों को भी गौरवान्वित करता है, न कि उनकी सामाजिक हैसियत पर निर्भर रहते हुए।

उद्धरण संदर्भ (यदि उपलब्ध हों): “उच्च स्थान पर उठाने वाला”—Matthew Henry; “कंगाल को ऊँचा उठाने वाला”—Albert Barnes; “दरिद्र को सम्मानित करना”—Adam Clarke।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 113:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यहोवा निर्धन करता है और धनी भी बनाता है, वही नीचा करता और ऊँचा भी करता है। (लूका 1:52)

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वह दरिद्रों को दुःख से छुड़ाकर ऊँचे पर रखता है, और उनको भेड़ों के झुण्ड के समान परिवार देता है।

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और जो भूमि के नीचे सोए रहेंगे उनमें से बहुत से लोग जाग उठेंगे, कितने तो सदा के जीवन के लिये, और कितने अपनी नामधराई और सदा तक अत्यन्त घिनौने ठहरने के लिये। (यूह. 5:28-29)

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