भजन संहिता 113:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक, यहोवा का नाम स्तुति के योग्य है।

भजन संहिता 113:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

उदयाचल से अस्ताचल तक, यहोवा का नाम स्तुति के योग्य है

भजन संहिता 113:3 का सार इस बात में है कि परमेश्वर का समान रोशन नाम शेष नहीं रहता— उसे हर काल में, हर स्थान पर, हर परिस्थिति में महिमा दी जाती है। पृथ्वी के हर किनारे से लेकर शांति और उद्धार के संदेश तक, ईश्वर का नाम ऊँचा उठना चाहिए। यह भजन एकीतर्रित आनंद का गान है कि परमेश्वर के दया, करूणा और सृष्टि-नियंतरण की सत्ता अद्वितीय है।

पाठांश का साहित्यिक संदर्भ

यह भजन संहिता के मिसरे 113 का भाग है जो आमतौर पर प्रथक-प्रथक भजन-पंक्तियों में एक निरन्तर उत्साह से गरिमा प्रकट करता है। “उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक” एक व्यापक आयाम खोलता है—यह न केवल भूगोलिक दायरा है, बल्कि समय-रेखा और हर मानव-जीवन के चरणों पर परमेश्वर की स्तुति संचरित होती है। यह पंक्ति न तो केवल दैनिक नमाज़ों की बात है और न ही सिर्फ किसी विशिष्ट अवसर की, बल्कि सभी समयों के लिए भगवान का नाम सर्वोच्च है, यह विचार देता है कि ईश्वर का महिमामय नाम विश्व-यात्रा की हर दिशा में कान्तिमय है।

थियोलॉजिकल महत्व

यह पंक्ति ईश्वर की सार्वत्रिकता और उसकी अनंतता को पुष्ट करती है। यह बताती है कि सृष्टि की सीमा से परे भी परमेश्वर अभी भी वही है—उदय से अस्त तक उसका सामर्थ्य और उपस्थिति है। भजनकार यह कह रहा है कि ईश्वर की महिमा एक ऐसी वास्तविकता है जो हर जेहन-मन को सम्बोधित करती है; उसका नाम अदल-बदल नहीं होता, और हर परिस्थिति में वही स्तुति का पात्र है। यह दया, करूणा, और न्याय के एक समन्वय को भी दर्शाता है, क्योंकि उसका नाम वही है जो सदा कर्तव्य-पालन और उद्धार के स्रोत के रूप में स्थिर है।

पश्चिमी-आधार, तात्त्विक संकेत

वाचाल ध्वनि और सामूहिक स्तुति-आह्वान में यह भजन धार्मिक-संस्कृति की गहराई दिखाता है। पुराने तात्विक स्रोतों में इसे यह दर्शाते मिले कि परमेश्वर की महिमा सभी दिशाओं में गूंजती है—यह मानवीय आराधना के दायरे को भी विस्तृत करता है, ताकि हर जाति और भाषा के लोग उसकी स्तुति में सहभागी हों।

क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त समझ के साथ)

  • यशायाह 6:3 के साथ ध्वनि-परस्परता: “पवित्र, पवित्र, पवित्र is Yahweh”— परमेश्वर की पूर्ण पवित्रता और सार्वभौमिक महिमा की गूँज हर दिशा में।
  • भजन 57:11: “उच्च स्थान पर वही नाम”— परमेश्वर के नाम की महिमा विशेषकर विपत्तियों में आश्रय बनती है।
  • प्रेरितों के कार्य 10:34-35 के समान: यदि परमेश्वर पक्ष-घटना से बाहर है, तो यह सार्वभौमिक उद्धार का संदेश है— सारे देशों के लिए न्याय और कृपा का दरवाजा खुलता है।

विचार-विमर्श के प्रश्न

  • क्या आप अपने दैनिक जीवन में हर जगह यही आलेख मानते हैं कि परमेश्वर का नाम हर परिस्थिति में स्तुति के योग्य है?
  • महिमा के इस स्तंभ पर आप अपने परिवार, समुदाय, और नम्र-आचरण से कैसे गवाही दे सकते हैं?
  • क्या आप भय, दुख, या संघर्ष के समय भी ईश्वर की महिमा को बनाए रखते हैं?

संक्षिप्त निष्कर्ष

भजन 113:3 हमें यह याद दिलाता है कि परमेश्वर की महिमा विश्व-व्यापी है—उदयाचल से अस्ताचल तक, हर दिशा में उसका नाम स्तुति के योग्य है। यह केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि एक जीवन-आचार है: हमारे हर कदम के साथ उसकी महिमा बढ़ती रहे।

संदर्भ-तालमेल (संक्षेप)

यह पाठ अन्य कबूतर संकेतों से जुड़ता है कि परमेश्वर की महिमा अनंत है, और उसकी कृपा सभी राष्ट्रों के लिए है। यद्यपि यह एक हल्का-सा घोषण है, परन्तु यह विश्वास-जीवन के लिए मार्गदर्शक ध्वनि बनती है।

इस पवित्र पाठ पर ऐतिहासिक टिप्पणीकारों के संक्षिप्त उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों की मूल बातें इस सार में सहज रूप से समाहित हैं। (उद्धरण पूर्ण पंक्तियाँ नीचे नहीं दिए गए हैं, परन्तु उनका प्रभाव इस व्याख्या के भीतर समाहित है।)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 113:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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हे आकाश जयजयकार कर, हे पृथ्वी, मगन हो; हे पहाड़ों, गला खोलकर जयजयकार करो! क्योंकि यहोवा ने अपनी प्रजा को शान्ति दी है और अपने दीन लोगों पर दया की है। (भज. 96:11-13, यिर्म. 31:13)

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भजन संहिता 18:3 (HINIRV) »
मैं यहोवा को जो स्तुति के योग्य है पुकारूँगा; इस प्रकार मैं अपने शत्रुओं से बचाया जाऊँगा।

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यशायाह 59:19 (HINIRV) »
तब पश्चिम की ओर लोग यहोवा के नाम का, और पूर्व की ओर उसकी महिमा का भय मानेंगे; क्योंकि जब शत्रु महानद के समान चढ़ाई करेंगे तब यहोवा का आत्मा उसके विरुद्ध झण्डा खड़ा करेगा। (मत्ती 8:11, लूका 13:29, भज. 102:15-16, 113:3)

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