भजन संहिता 145:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मैं यहोवा की स्तुति करूँगा, और सारे प्राणी उसके पवित्र नाम को सदा सर्वदा धन्य कहते रहें।

भजन संहिता 145:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 145:21 — तत्कालिक परिप्रेक्ष्य

यह पद भजन 145 के समापन भाग में आता है, जो एक स्तुति-भजन है। पूरे अध्याय में दावी होता है कि यहोवा की महिमा, दया और निष्ठा पीढ़ी-दर-पीढ़ी गाई जानी चाहिए। अंकित वचन पाठक को याद दिलाता है कि स्तुति केवल मानवों तक सीमित नहीं है, बल्कि सारे प्राणी—सृष्टि के समस्त जीव—प्रभु के पवित्र नाम की प्रशंसा करते रहें। यह अध्याय मंदिरीन और सामुदायिक उपासना की भाषा में लिखा है, पर उसकी दृष्टि सार्वभौमिक है।

यह वचन परमेश্বর और आस्था के बारे में क्या बताता है

पहला संदेश यह है कि परमेश्वर की महिमा सार्वभौमिक और स्थायी है। “सदा सर्वदा” कहकर कवि एक अनवरत, अतुलनीय स्तुति का विचार प्रस्तुत करता है—समय और स्थान दोनों पार। दूसरा संदेश सृजन और स्तुति के बीच सम्बन्ध है: सृष्टि केवल अस्तित्व का प्रमाण नहीं बल्कि ईश्वर की महिमा का गुणगान करने की क्षमता रखती है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि मानव की जिम्मेदारी है कि वह सृष्टि के साथ सामंजस्य में परमदाता की स्तुति में भाग ले।

कठोर शब्दों और प्रतिमा का अर्थ

“सारे प्राणी” (all flesh) का अर्थ यहाँ व्यापक है—मनुष्यों के साथ-साथ जीवित प्राणी जो पृथ्वी पर हैं; यह अभिव्यक्ति परमेश्वर की पूजा के सार्वभौमिक स्वभाव पर बल देती है। “पवित्र नाम” उस नाम का संकेत है जिसमें ईश्वर की शुद्धता, अलगाव और धार्मिक प्रतिष्ठा निहित है—यह केवल एक लेबल नहीं, बल्कि ईश्वर के चरित्र का संक्षेप है।

संबंधित पद और संक्षेप

  • भजन 148:3–4 — यह भी सृष्टि को परमेश्वर की स्तुति में बुलाता है; दोनों पद एक ही थीम को आगे बढ़ाते हैं।
  • यशायाह 42:10 — राष्ट्रों और प्रकृति को प्रभु की महिमा गाने के लिए आमंत्रित करता है; यह वैश्विक स्तुति की कल्पना से मेल खाता है।
  • प्रकाशितवाक्य 5:13 — अंतकाल में स्वर्ग-धरती समस्त सृष्टि की प्रशंसा का वर्णन करता है, जो भजन 145 के अंतहीन स्तुति-विचार को पूरा करता है।

पुराने टिप्पणीकारों से संक्षिप्त संकेत

मैथ्यू हेनरी ने इस अध्याय को ईश्वर की निरन्तर स्तुति और वंश पर वंश चलने वाली प्रशंसा के रूप में देखा। अल्बर्ट बार्न्स ने “सारे प्राणी” की व्यापकता पर ध्यान दिया और इसे मानवीय सीमाओं से बाहर विस्तारित माना। एडम क्लार्क ने विशेष रूप से “पवित्र नाम” के आध्यात्मिक तथा नैतिक अर्थ पर जोर दिया। (उपरोक्त टिप्पणीकारों के संक्षिप्त संदर्भात्मक उद्धरण यहाँ संजोये गए हैं।)

आधुनिक जीवन के लिए उपयोगी पाठ

यह पद हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की पूजा केवल रविवार या उपासना भवन तक सीमित नहीं हो सकती। हमारी दैनिक ज़िन्दगी, कर्म, व्यवहार और प्रकृति के प्रति हमारी संवेदना—ये सभी परमेश्वर की स्तुति के माध्यम बन सकते हैं। जब हम साहचर्य, दया और सत्य का पालन करते हैं, तो हम उस पवित्र नाम की महिमा को बढ़ाते हैं। साथ ही यह स्वाभाविक प्रश्न उठता है: क्या हमारी शब्दों और कर्मों से भरोसा पैदा होता है कि “सारे प्राणी” सचमुच परमेश्वर की प्रशंसा कर रहे हैं?

व्यवहारिक सुझाव:

  • प्रकृति में समय बिताएँ और उसकी रचनात्मकता से ईश्वर की महिमा पर चिंतन करें।
  • अपने जीवन के छोटे-छोटे कार्यों में भी परमेश्वर की पवित्रता का अनुठा प्रतिबिंब लाने का प्रयत्न करें।
  • पीढ़ियों तक चलने वाली आध्यात्मिक शिक्षा—नैतिकता और दया—पर जोर दें, ताकि स्तुति सतत बनी रहे।

समेकित रूप से, भजन 145:21 हमें स्थायी, सार्वभौमिक और जीवन-परिवर्तक स्तुति का दृष्टिकोण देता है—एक ऐसी स्तुति जो सृष्टि की हर कड़ी से उभरकर परमेश्वर के पवित्र नाम को महिमामय बनाती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 145:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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