भजन संहिता 51:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हे प्रभु, मेरा मुँह खोल दे तब मैं तेरा गुणानुवाद कर सकूँगा।

भजन संहिता 51:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 51:15 का अर्थ

सीधे शब्दों में कहें तो यह दाऊद का विनय है: हे प्रभु, जब मैं तेरे सामने सामने आ कर अपनी रिहाई के लिए आवाज खोलूँगा, तब मैं तेरे गुणानुवाद को प्रकट कर सकूँगा। मर्म यह कि परमेश्वर के अनुकम्पा से उद्धार पाने के बाद ही मेरे मुंह से भगवान की महिमा प्रकट होगी।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह भजन दीर्घ पश्चाताप और दया के अनुभव का गीत है। Psalm 51 पूरीøre एक पाप-स्वीकृति का अभिवादन है, जिसे दाऊद ने अपने गढ़े-गुने पाप के पश्चात आनंदपूर्वक व्यक्त किया। verse 15 उसी आह्वान का परिणाम है: परमेश्वर के उद्धारक आशीर्वाद मिलते ही वक्ता अपनी मौखिक स्तुति से परमेश्वर की महिमा कर सकेगा।

व्याख्यात्मक अवलोकन

• मुँह खोलना यहां केवल शब्द उच्चारण नहीं, बल्कि एक नया करने की क्षमता और अवसर की ओर संकेत है—उद्धार के बाद एक वैध, स्पष्ट और गम्भीर प्रार्थना-गान।

• ग़ौरतलब है कि चित्त की पवित्रता के साथ बोलना वास्तविक भक्ति का अंग है; यह बतलाता है कि परमेश्वर के साथ संवाद आत्म-स्वीकृति और सत्यापन से जुड़ा है।

थीमेटिक बिंदु

  • उद्धार के बाद की स्तुति
  • प्रत्येक वाणी का उद्देश्य परमेश्वर की महिमा
  • आत्म-तोड़फोड़ और पुनर्पुनर्निर्माण की प्रक्रिया

समान्धरित क्रॉस-रेफरेंसेज

1) रोम 10:10 — हृदय की सदा-स्वीकार्यता के साथ विश्वास आने पर मुंह से उद्धार की घोषणा। यह दर्शाता है कि मुख की ध्वनि बाह्य अभिव्यक्ति का क्षेत्र है, लेकिन मूलकारण हृदय की परिवर्तनशील दशा है।

2) मिस्र 4:12 — परमेश्वर की मदद से बोलना सीखना; दुआ के साथ अधिष्ठित होने पर स्पष्टीकरण मिलना।

3) यशायाह 50:4 — दास्य-आचार्य के रूप में सीखना कि आवाज कौशल और भक्ति के माध्यम से परमेश्वर की जय हो सकती है।

व्यावहारिक निष्कर्ष

जब हम परमेश्वर के उद्धार को अनुभव करते हैं, तो हमारी पहली जिम्मेदारी उसकी महिमा के लिए स्पष्ट और सत्यपूर्ण भाषण देना है—न कि खाली शब्दों का प्रदर्शन। यह भागीदारी जीवन-परक है: ज्ञान से भरे हुए शब्द, आत्म-उद्धार से प्रेरित, और समुदाय के लिए प्रेरणा।

संक्षिप्त समेकन

भजन संहिता 51:15 कहता है कि उद्धार के बाद हमारी वाणी का उद्देश्य परमेश्वर की महिमा statement बनना चाहिए। हमारे शब्द परमेश्वर की कृपा से प्रभावित हों और उनकी पवित्रता को उजागर करें।

निष्कर्ष

प्रेमपूर्वक विनती है कि हम परमेश्वर के उद्धार के अनुभव से प्रेरित होकर अपने मुख से उसकी महिमा का उच्चारण करें, ताकि हमारे शब्द उसकी अनुकम्पा की गवाही बनें।

नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-domain विचारों से संक्षिप्त संकेत प्रयुक्त किए गए हैं—उद्धार के बाद की ओजस्विताकी महत्ता और वास्तविक भक्ति के स्वर पर।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 51:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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