भजन संहिता 51:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

टूटा मन* परमेश्‍वर के योग्य बलिदान है; हे परमेश्‍वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता।

भजन संहिता 51:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 51:17 — प्रारम्भिक संदर्भ और पाठ का अभिप्राय

यह भजन एक दीपित आत्म-समाधान का गीत है जो दावीद के पछतावे और परमेश्वर के पास लौटने के भाव को दर्शाता है। verse 17 कहता है कि “टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है; हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता।” यह वाक्य परमेश्वर के अनुग्रह और नैतिकता के अनुसार सही प्रकार की सन्तप्त आत्मा की महत्ता को उजागर करता है, न कि बाहरी धार्मिक क्रिया-कलापों की। दावीद यह स्वीकार करता है कि उसका अपराध भौतिक अनुष्ठानों से नहीं छिप सकता; उसे एक दया-युक्त, विनम्र हृदय चाहिए।

ईश्वर के प्रति विशिष्ट संदेश

यह पाठ दिखाता है कि परमेश्वर किसी बाहरी पवित्रता से अधिक, हृदय की पवित्रता का मूल्यवान स्वीकार करते हैं। टूटे हुए मन का अर्थ है अपराध-गर्भित जीवन के परिणामस्वरूप उत्पन्न विनम्रता, पश्चाताप, और परिवर्तन की इच्छा। यह उद्धार के वास्तविक नियमों में से एक है: परमेश्वर सत्य प्रेम और क्षमा को वही अनुग्रह देते हैं जो नम्रता से प्रणाम करते हैं।

शब्दार्थ और छवि-संकेत

“टूटा मन” से अभिप्राय है आत्म-स्वीकृति, अपनी कमियों का परिचय, और परमेश्वर के सामने सच बोलना। “पिसे हुए मन” एक अभ्यास-उत्पन्न गहराई का प्रतीक है जो आत्मा को डगमगाते नहीं छोड़ता, बल्कि पुनर्जीवन की आशा के साथ जीवित रहता है। “बलिदान” यहाँ बाहरी बलिदान नहीं, बल्कि हृदय की नैतिकता और पवित्रता का आह्वान है—ऐसा बलिदान जिसे परमेश्वर स्वीकार करते हैं।

संबंधित पद

  • यशाय 57:15 — परमेश्वर दयालु रहते हैं और दयालु और नम्र हृदय वालों की पुकार सुनते हैं। यह पाठ सीधे इसी विचार को पुष्ट करता है कि ईश्वर विनम्र हृदय को महत्वपूर्ण मानते हैं।
  • मत्ती 5:8 — “धीर-धाम से परिपूर्ण हृदय” दिव्यानुभूति के लिए आशीष है; हृदय की पवित्रता परमेश्वर के निकट पहुँच प्रदान करती है।
  • योहान्न 4:23-24 — परमेश्वर आत्मा है और उसे उसी तरह मानने वाले जो सत्य में उपासना करें, आत्मा और सच्चाई के साथ। यह बताता है कि आंतरिक ईश्वर-उपासना कितना आवश्यक है।

इन संदर्भों से स्पष्ट है कि पाप के भीतर भी ईमानदार पश्चाताप और हृदय की पवित्रता ईश्वर की संकल्पना का केंद्र हैं।

आज के जीवन में अनुप्रयोग

1) ईमानदार पश्चाताप: अपने नैतिक असफलताओं और असत्य-आचरण को पकड़ना, उन्हें स्वीकार करना और परमेश्वर के सामने नई शुरुआत माँगना।

2) विनम्र हृदय: दिखावा छोड़कर सेवक-चित्त बनाए रखना—छोटी-छोटी चीजों में भी नैतिकता और दया को प्राथमिकता देना।

3) आंतरिक बलिदान: बाहरी धर्म-क्रियाओं के साथ-साथ अपने समय, प्रेरणा और संसाधनों को उन चीजों में लगाना जो दूसरे के लिए दया और न्याय को बढ़ावा दें।

संक्षिप्त मिलान: एक संयुक्त निष्कर्ष

मैथ्यू हेनरी, अलबर्ट बार्न्स और एडाम क्लार्क के कामों के भीतर से प्राप्त सामान्य धारा यह है कि ईश्वर एक ऐसे हृदय की खोज करते हैं जो आत्म-स्वीकृति, पश्चाताप और परिवर्तन की इच्छा रखे। उनके कथन से यह निकलकर आता है कि बाहरी धर्म-कर्म से अधिक, हृदय की विनम्रता और सत्यता परमेश्वर की प्रसन्नता हैं. आवश्यकता है कि हम अपने दिल की गहराइयों में उतरें, टूटे मन से ईश्वर के पास लौटें, और उनके साथ नयी जिंदगी की राह चुनें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 51:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यहोवा टूटे मनवालों के समीप रहता है*, और पिसे हुओं का उद्धार करता है।

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यहोवा की यह वाणी है, ये सब वस्तुएँ मेरे ही हाथ की बनाई हुई हैं, इसलिए ये सब मेरी ही हैं। परन्तु मैं उसी की ओर दृष्टि करूँगा जो दीन और खेदित मन* का हो, और मेरा वचन सुनकर थरथराता हो। (भज. 34:18, मत्ती5:3)

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तब संकट में पड़कर वह अपने परमेश्‍वर यहोवा को मानने लगा, और अपने पूर्वजों के परमेश्‍वर के सामने बहुत दीन हुआ, और उससे प्रार्थना की।

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