भजन संहिता 22:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह सब जो मुझे देखते हैं मेरा ठट्ठा करते हैं, और होंठ बिचकाते और यह कहते हुए सिर हिलाते हैं, (मत्ती 27:39, मर. 15:29)

भजन संहिता 22:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 22:7 पर टिप्पणी (HINIRV)

पवित्र भजन संहिता 22 का यह भाग मसीह के कष्टों के समय की अभिव्यक्ति है, जिसमें त्रुटिहीन विश्वास के साथ विपरीत परिस्थितियों के बीच भी परमेश्वर के प्रति भरोसा बनाए रखा गया है। इस Verse में यातना के बीच चिह्नित mockery और तिरस्कार का चित्र है, जिसे उद्धारकर्ता ने अपने अनुभवों में प्रत्यक्ष रूप से देखा। खाते समय इसमें यह संकेत मिलता है कि धार्मिक कूटनीति, सामाजिक दबाव और उपहास सदैव मानव अनुभव का भाग रहे हैं, पर वे परम कृपा की योजना के केन्द्र में नहीं डुलाते।

मुख्य अर्थ

यह verse उन विपरीत परिस्थितियों की तस्वीर है जो दास की चिरस्थायी पीड़ा और यहूदियों के बीच प्रसिद्धि के स्थान पर विश्वस्त योग से दूर रहने के भाव को दर्शाती है। जो लोग उसे देखते हैं, वे उसके ऊपर ठहाके लगाते हैं, होंठ बिचकाते हैं और सिर हिलाते हैं। यह केवल व्यक्तिगत दर्द नहीं, बल्कि आस्था के संघर्ष के समय प्रचारित अवमानना का भी चित्र है। (यहीं से उद्धारकर्ता के दर्द का गहरा अर्थ जुड़ता है और भावनात्मक-धार्मिक व्याप बनता है कि वह हमारे लिए जो यीशु ने वहन किया, वह भी उसमें समाहित था।)

दो प्रमुख थीम

  • निष्कासित अनुभव बनाम दृढ़ विश्वास: भीतर की प्रार्थना बनावटी नहीं है; दृढ़ विश्वास के साथ क्रूस की राह पर चलना, भले ही लोगो का तिरस्कार क्यों न हो।
  • उद्धार की योजना की प्रतीक्षा: विपत्तियों के बीच भी परमेश्वर के उद्देश्य की पूर्ति के लिए आश्रय और यकीन बना रहता है, जिससे दयालुता की रोशनी अंततः उजागर होती है।

संदर्भित और संबद्ध अंश

– मत्ती 27:39-40 में यीशु के क्रूस पर चढ़ने के समय लोगों द्वारा किए गए उपहास का चित्र है, जो इसकी पूरकता है कि कैसे प्रभु ने मानवीय तिरस्कार सहन किया।

– मरकस 15:29-32 में लोग दूर से उसे देखकर उसे चिढ़ाते हैं और यही प्रवृत्ति यहाँ भजन के शब्दों में भी झलकती है।

व्यावहारिक विवेक

कठिन समय में भी हमारा उत्तरदायित्व यह है कि हम शिकायतों के बीच एक स्थिरता बनाए रखें: प्रार्थना में आस्था और भरोसा, भले ही बाहरी आवाजें हमें दबाव दें। यह verse दर्शाता है कि दुख के बीच परमेश्वर की उपस्थिति कभी दूर नहीं होती; हमारी आस्था को शब्दों और उपहास से अधिक ठोस बनाती है।

संक्षिप्त समीक्षा

यह श्लोक विपत्तियों के बीच विश्वास की प्रबलता और उद्धारक के दुख के साथ एक गहरे सम्बन्ध का संकेत देता है। यह हमें यह स्मरण कराता है कि ईश्वर के उद्देश्य समय के पार हैं, और तिरस्कार के बावजूद भी परम कृपा की योजना पूरी होती है।

कानूनी-आत्मीय संलग्न टिप्पणी

मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बर्न्स, और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डोमेन मतों के अनुसार—जो उद्धृत रूप से छोटे संकेतों में उपलब्ध हैं—इनमें एक सामान्य बोध है कि क्रूस-यात्रा के दर्द के बीच ईश्वर की उपस्थिति अडिग रहती है। उनके Commentaries में यह समझने की कोशिश होती है कि कैसे भजनकार का विछोह और उपहास भी परमेश्वर की योजना के भीतर एक परीक्षा बने रहते हैं; और कैसे मसीह के अनुभव इस धारा का मर्म बनते हैं। याद रखें: यहां छोटे उद्धरणों के रूप में मूल पाठ से जुड़ी पंक्तियाँ सीधे उद्धरित नहीं की जातीं; पर स्रोत-नुकते बताये जाते हैं।

शीघ्र cross-references

– भजन संहिता 69:21: दुःखों के बीच आवश्यक आशीर्वाद के प्रतीक के रूप में गम्भीर मदद की आवश्यकता।

– भजन संहिता 31:18: गुमान से पूर्ण उपहास के विरुद्ध ईश्वर के सामने बोलना। — यह स्पष्ट करता है कि पीड़ा के समय भी ईश्वर के चरणों में विश्वास बनाए रखना है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 22:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और मार्ग में जानेवाले सिर हिला-हिलाकर और यह कहकर उसकी निन्दा करते थे, “वाह! मन्दिर के ढानेवाले, और तीन दिन में बनानेवाले! (भज. 22:7, भज. 109:25)

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मेरी तो उन लोगों से नामधराई होती है; जब वे मुझे देखते, तब सिर हिलाते हैं। (इब्रा. 10:12-13, लूका 20:42-43)

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और आने-जानेवाले सिर हिला-हिलाकर उसकी निन्दा करते थे।

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