भजन संहिता 38:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु मेरे शत्रु अनगिनत हैं, और मेरे बैरी बहुत हो गए हैं।

भजन संहिता 38:19 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 38:19 — पृष्ठभूमि और मूल अर्थ

यह पद भजन लेखक के संकट के समय की दयनीय स्थिति को दर्शाता है। धर्मग्रंथ के अधिकतर गीत शास्त्रीय रूप से व्यक्तिगत दोष-भाव, आत्म-उद्धार की प्रार्थना, और दयालु परमेश्वर की बनावट की तरफ इशारा करते हैं। यहाँ कवि अपने विरुद्ध उठे शत्रुओं की भीषणता का वर्णन करता है, ताकि परमेश्वर की सहायता और न्याय की आवश्यकता स्पष्ट हो सके।

मुख्य विचार

पंक्ति में दो स्पष्ट तत्व दिखते हैं: शत्रुओं की अधिकता और उसकी भीषणता। यह भावनात्मक 표현 है जो एक विश्वासयोग्य व्यक्ति की नज़दीकी संकट को उजागर करता है—कि दुष्ट힘 और दबाव कितने भी बढ़ें, परमेश्वर भरोसेमंद है।

मुख्य विषयों की समीक्षा

  • शत्रुओं की बहुलता से उत्पन्न व्यक्तिगत दबाव, आंतरिक असंतोष और भय के कारण मन की चिढ़चिढ़ाहट दिखती है।
  • संकट के बीच भी ईश्वर की प्रतिज्ञाओं पर टिके रहने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
  • कवि अपनी दुआ में न्याय और सहायता के लिए परमेश्वर से सहारा मांगता है, न कि शत्रुओं के विनाश का प्रतिशोध।

पवित्र ग्रंथ के सुझावित क्रॉस-रेफरेंसे

1) भजन 27:1 — प्रभु के प्रकाश और सुरक्षा के विरुद्ध भय कम कैसे होता है।
2) भजन 46:1 — परमेश्वर हमारी refuge और सहायता के स्रोत के रूप में।
3) भजन 3:3-4 — जब तोड़फोड़ और विरोध दिखाई दें, तब भी परमेश्वर की सहायता की आवश्यकता मजबूत रहती है।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि संकट के समय विश्वास कैसे एकस्थिर कृपा बनकर काम करता है: परमेश्वर सुरक्षा देता है, भय को शांत करता है, और सहायता का दरवाजा खोलता है।

विचार-प्रयोगात्मक अनुशंसाएँ

  • अपने संकट के समय में प्रार्थना को नियमित बनाएं—किए जाने वाले आह्वान में सुरक्षा और सहायता की माँग स्पष्ट हो।
  • आत्म-आलोचना और निराशा के बजाय, परमेश्वर के विरुद्ध नहीं, उसकी सहायता पर टिके रहने की कोशिश करें।

संक्षिप्त समापन

भजन संहिता 38:19 भय और शत्रुओं की संख्या के बावजूद एक सशक्त स्मरण है कि परमेश्वर प्रत्यक्ष सहायता देता है। कथन में कवि अपनी नज़र परमेश्वर की नीयत पर रखता है—जो कि संकट के बीच भी सुरक्षा और उद्धार का स्रोत है।

कथन-आधार उद्धरण (संक्षेप)

होनहार पारिभाषिक टिप्पणीकारों में से कुछ ने यह संकेत किया है कि विश्वास के समय मनुष्य को शत्रुओं की संख्या के बावजूद परमेश्वर की नज़दीकी की जरूरत है।

नोट: इस पाठ के लिए नीचे दिए गए दो-तीन प्रमुख विचारधाराओं के संकलन में जॉन मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के मानक विचारों को समाहित किया गया है; इनमें से कभी-कभी संभव उद्धरण छोटे रूप में उद्धृत होते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 38:19 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मेरे झूठ बोलनेवाले शत्रु मेरे विरुद्ध आनन्द न करने पाएँ, जो अकारण मेरे बैरी हैं, वे आपस में आँखों से इशारा न करने पाएँ। (यूह. 15:25, भज. 69:4)

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प्रधान बजानेवाले के लिये योनतेलेखद्दोकीम में दाऊद का मिक्ताम जब पलिश्तियों ने उसको गत नगर में पकड़ा था हे परमेश्‍वर, मुझ पर दया कर, क्योंकि मनुष्य मुझे निगलना चाहते हैं; वे दिन भर लड़कर मुझे सताते हैं।

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