भजन संहिता 5:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

घमण्डी तेरे सम्मुख खड़े होने न पाएँगे; तुझे सब अनर्थकारियों से घृणा है।

भजन संहिता 5:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 5:5 का सार्थक अर्थ

इस छंद में कहा गया है कि घमण्डी व्यक्ति परमेश्वर के सम्मुख टिक नहीं पाता, और दुष्कर्मियों का घृणा परमेश्वर को प्रिय नहीं। यहाँ स्पष्ट संदेश है कि ईश्वर का मार्ग विनम्रता में और पाप से पृथक रहने में है; घमंड और दुष्कर्मी जीवन परमेश्वर की वाणी के विरुद्ध है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

भजन संहिता में यह अंग एक आरती-सी धरा है जो परमेश्वर के विरुद्ध घृणा, पाप और अन्याय से दूरी बनाकर सत्य-जीवन जीने का आह्वान करती है। यह छंद विशेषकर उन लोगों के लिए चेतावनी है जो दंभ और कूटनीतिक चालों के द्वारा अपने हित साधते हैं; परमेश्वर इस प्रकार के लोगों को स्वीकार नहीं करते।

व्याख्यात्मक विचार

  • घमण्ड का परिणाम: घमण्ड आत्म-तुलना और दूसरों के बारे में अधिरोपण को जन्म देता है, जो परमेश्वर की पंगत से दूर करता है। नीचे दिए गए अन्य छंदों में भी अहंकार का अस्थाई प्रभाव दिखाया गया है।
  • पाप से घृणा: भयावहता से भरा हुआ जीवन परमेश्वर की दृष्टि में अस्वीकार्य है; इसका उल्टा पवित्र-निर्दोष आचरण है।
  • न्याय और सच्चाई का सम्बोधन: परमेश्वर सत्य प्रेम और दया के साथ रहते हैं, और वह ऐसे लोगों को स्वागत नहीं करते जो घमण्ड और दुष्कर्म में डूबे हों।

थीम-विन्दु

  1. घमण्ड से बचना
  2. दुष्कर्मी से दूरी बरतना
  3. परमेश्वर की पवित्रता के अनुरूप जीवन

अन्य पाठों से सम्बन्ध

• न्याय और नम्रता का मूल्य: नम्रता से रहने वाले को परमेश्वर प्रशंसा देता है; यह भजन-परम्परा में दयालुता और विनय का महत्व रेखांकित करता है।

• पाप से दूरी: अन्य छंदों में कहा गया है कि दुष्कर्म के साथ एकता से परमेश्वर का साथ नहीं मिल सकता; पाप का निष्कासन आस्था के जीवन की जरूरत है।

• ईश्वर की स्वीकृति बनाम मानव-घमंड: मानव-घमंड अंततः परिवर्तनशीलता बन जाता है, जबकि ईश्वर का उद्धार और पवित्रता स्थिर रहता है।

संक्षिप्त व्यावहारिक takeaway

अपने दावे, महत्त्वाकांक्षा और आंतरिक घमण्ड की जाँच करें; जो लोग सत्य और नैतिकता में स्थिर रहते हैं, वे परमेश्वर के मार्ग पर टिकते हैं। दुष्कर्मों से दूरी बनाते हुए विनम्र रहें, और दूसरों के प्रति सम्मान अपनाएं।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)

• भजन 101:3-4 – घमण्ड और छल से दूर रहने की प्रेरणा देती है; समतुल्य व्यवहार का महत्व स्पष्ट करता है।

• यशायाह 57:15 – परमेश्वर विनम्र और तपस्वी को दुख-सुख में भी सन्तोष दिलाने वाला है; घमण्ड के स्थान पर नम्रता की प्रशंसा है।

• मत्ती 23:12 – जो ऊँचा होता है, वही नीचा होता है; विनम्रता ही परमेश्वर की समीपता को बुलाती है।

एवं मौलिक-व्याख्यात्मक संकेत: इस पाठ में पवित्रता की आवश्यकता और घमण्ड की हानिकारक प्रकृति स्पष्ट है; इसलिए जीवन के हर क्षेत्र में सच्चे चरित्र की खोज महत्त्वपूर्ण है।

नोट

यदि आप चाहें, मैं यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के उद्धरणों के साथ संलग्न कर सकता हूँ, परन्तु पर्याप्त संक्षेप और संदर्भ-विवेचन के भीतर।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 5:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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