भजन संहिता 5:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तू उनको जो झूठ बोलते हैं नाश करेगा; यहोवा तो हत्यारे और छली मनुष्य से घृणा करता है*।

भजन संहिता 5:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 5:6 का स्पष्ट अर्थ

इस पद में कहा गया है कि परमेश्वर झूठ बोलने वालों और हिंसा-क्रियाओं में लिप्त लोगों को नाश करेगा। यह न केवल उनके कर्मों की नैतिक आलोचना है, बल्कि यह परमेश्वर की सच्चाई और न्याय पर आधारित चेतावनी भी है कि जो लोग छल-बल से बनते हैं, वे अंततः उनके खिलाफ नहीं टिक पाते।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

भजन संहिता 5 शहरी सभा के लिए लिखा गया है जहां भजनकर्ता परमेश्वर के सामने अपनी जिंदगियों की निष्ठा और सत्यता प्रस्तुत करते हैं। यह भजन एक प्रार्थना है जिसमें यहोवा के समक्ष छल और अन्याय से बचने की विनती है, और यह स्पष्ट करता है कि ईश्वर सत्यप्रिय और निष्कपट दिलों के साथ रहते हैं, जबकि झूठ और हिंसा से प्रेम रखने वालों को निष्कासित किया जाएगा।

व्याख्या के प्रमुख बिंदु

  • ईश्वर की निष्ठुरता से डर: जो लोग झूठ बोलते हैं और हिंसक आचरण अपनाते हैं, वे ईश्वर की मान्यताओं के विरुद्ध चलते हैं और उनके दिन गिने जाते हैं।
  • नाश की सुसंगतता: न केवल शब्दों में, बल्कि जीवन-चर्या में झूठ और छल—ये दोनों ही ईश्वर के सामने जैसे विष हैं, जो अंततः विनाशकारी परिणाम लाते हैं।
  • यहोवा की घृणा से सावधानियाँ: पवित्रता की दृष्टि से भिन्न-भिन्न आचरणों के लिए बारीक भिन्नताएं हैं; भीतर-भीतर छल करने वालों को वहवह घृणा की दृष्टि से देखते हैं और उनका मानवीय सुरक्षा-उष्मा नहीं टिक पाती।

एक सन्देश-परिकल्पना

जो लोग सत्य और ईमानदारी से चलना चाहते हैं, उनके लिए यह भजन स्पष्ट रूप से प्रेरणा देता है कि ईश्वर के सामने निष्ठापूर्ण जीवन ही टिकाऊ है। झूठ और हिंसा से बने कल्याण-लाभ क्षणिक होते हैं जबकि परमेश्वर के निकट रहने वाला जीवन स्थायी सुरक्षा देता है।

संयुक्त विचार: कुछ छोटे बिंदु

  1. सत्य का महत्व: ईश्वर के साथ ईमानदारी में रहने पर ही हमारी प्रार्थना स्पष्ट और प्रभावी होती है।
  2. न्याय की धार: भजनकर्ता यह दिखाते हैं कि ईश्वर बुराई से निपटते हैं और निष्कपट हृदय वालों के लिए मार्ग साफ रखते हैं।
  3. आस्था और व्यवहार का समन्वय: आस्था सिर्फ विचारों तक सीमित नहीं होनी चाहिए; जीवन-चर्या में भी सत्यरूपता दिखनी चाहिए।

अन्य पदों के क्रॉस-रेफरेंस

1) भजन 1:6 – जो सत्य में चलता है, वह ईश्वर के सामने सुरक्षित रहता है; उनके पथ पर स्थिर रहने से भय नहीं होता।

2) और प्रेरितों के काम 13:22 – दाऊद को परमेश्वर ने अपने मनपसंद व्यक्ति के रूप में चुना, क्योंकि वह अपने हृदय में सत्य को ढूंढ़ता है।

3) यिर्मयाह 9:5 – छल से लिप्त मनुष्य एक-दूसरे के साथ ठगे रहते हैं, परन्तु सच्चे दिल वाले लोग परमेश्वर के पास स्थिर रहते हैं।

अनुवादक टिप्पणियाँ (संक्षेप)

इस पाठ में “झूठ बोलना” और “हत्यारे और छली मनुष्य” जैसे स्पष्ट शब्द अभीष्ट हैं, ताकि ईश्वर की पवित्रता और न्याय के प्रति सचेत किया जा सके। यह दर्शाता है कि भजनकार सत्य के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए परमेश्वर के न्यायिक निर्णयों के सामने नहीं डगमगाते हैं।

व्यावहारिक निष्कर्ष

हमारी व्यक्तिगत नम्रता और सत्य के प्रतिสัตย์-निष्ठा को दृढ़ करें। बोलचाल में सत्य, व्यवहार में निष्कपट और असंयमित आचरण से बचें। जो लोग झूठ और हिंसा से जीवन बनाते हैं, उन्हें ईश्वर के न्याय से सचेत रहना चाहिए, क्योंकि उनका मार्ग अंततः उनकी दशा तय करता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 5:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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भजन संहिता 55:23 (HINIRV) »
परन्तु हे परमेश्‍वर, तू उन लोगों को विनाश के गड्ढे में गिरा देगा; हत्यारे और छली मनुष्य अपनी आधी आयु तक भी जीवित न रहेंगे। परन्तु मैं तुझ पर भरोसा रखे रहूँगा।

प्रकाशितवाक्य 21:8 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रकाशितवाक्य 21:8 (HINIRV) »
परन्तु डरपोकों, अविश्वासियों, घिनौनों, हत्यारों, व्यभिचारियों, टोन्हों, मूर्तिपूजकों, और सब झूठों का भाग उस झील में मिलेगा, जो आग और गन्धक से जलती रहती है: यह दूसरी मृत्यु है।” (इफि. 5:5, 1 कुरि. 6:9-10)

प्रकाशितवाक्य 22:15 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रकाशितवाक्य 22:15 (HINIRV) »
पर कुत्ते*, टोन्हें, व्यभिचारी, हत्यारे, मूर्तिपूजक, हर एक झूठ का चाहनेवाला और गढ़नेवाला बाहर रहेगा।

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