भजन संहिता 65:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

चराइयाँ भेड़-बकरियों से भरी हुई हैं; और तराइयाँ अन्न से ढँपी हुई हैं, वे जयजयकार करती और गाती भी हैं।

भजन संहिता 65:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 65:13 पर टिप्पणी

भजन संहिता में इस पद का संदर्भ एक परम आशीर्वाद और प्रेमपूर्ण नियंत्रण का בात्मिक संकेत देता है। गायक पवित्र परमेश्वर की कृपा, निर्माण-कार्य और कमान से संचालित प्रकृति को उत्साहपूर्वक स्वीकार करते हैं। यह verse बताता है कि शास्त्र-समुदाय कैसे दीन-हीनता में भी परमेश्वर की उपस्थिति और मुहब्बत के फल पहचानता है—हर खेत, हर तराई, हर चरागाही क्षेत्र में उद्धार का प्रमाण दिखाई देता है।

पद का पाठ और समग्र संदर्भ

“चराइयाँ भेड़-बकरियों से भरी हुई हैं; और तराइयाँ अन्न से ढँपी हुई हैं, वे जयजयकार करती और गाती भी हैं।”

यह भजन स्थल अनेक शिर्षकों से संबद्ध है: ईश्वर के न्याय, प्रकृति की प्रशंसा, और भक्तों की प्रसंन्नता। भजनकार यह दिखाता है कि परमेश्वर की व्यवस्था में पूरी सृष्टि अपनी-अपनी जगह पर सुरक्षित और प्रसन्न है, और मानवीय आशीष के साथ यह सब मिलकर एक दिव्य संगीत बनाते हैं।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

  • आस्था और कृतज्ञता: चराइयों और तराईयों की समृद्धि एक संकेत है कि ईश्वर ने भूमि को प्रचुर दिया है, ताकि His people LIVEs में उनकी महिमा भरपूर हो।
  • ईश्वर की व्यवस्था का कारण-प्रभाव: हर क्षेत्र की उर्वरता उसकी दया और नीति का परिणाम है; यह सुरक्षा और समृद्धि के लिए एक आह्वान है कि हम परमेश्वर के कर्ता-धर्ता के नये रूप में जीएँ।
  • खुशी का संगीत: प्रखर जयजयकार और गाना—भक्ति-राग का सहज प्रदर्शन है, जो व्यक्तियों के हृदय से निकलती खुशी को सार्वजनिक करती है।

अनुवादक-समकक्ष विचार (संदर्भ-तुलना)

Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke जैसे सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों के मूल भाव में यह कहा गया है कि रचना की देहाती श्रृंखला—खेती, चरागाह, फसलों—दैहिक और आध्यात्मिक आशीष के प्रतीक हैं। Henry ने आम तौर पर यह कहा है कि प्रकृति की समृद्धि परमेश्वर की कृपा का प्रमाण है। Barnes इसे ईश्वर की व्यवस्था और सुरक्षा की पुष्टि मानते हैं, जबकि Clarke इस बहस को मानवीय प्रसन्नता के साथ ईश्वर की महिमा से जोड़ते हैं। (इन लेखक-उद्धरणों के छोटे हिस्से आवश्यक संदर्भ में मिलते हैं, परन्तु यहाँ पूर्ण उद्धरण नहीं दिए जा रहे।)

क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ-आधार) और उनके संक्षिप्त अनुप्रयोग

1) भू-परिष्कार और आशीष के संबंध: ईश्वर की योजना से पृथ्वी की उपज और चरागाह एक साथ चलती है; यह सृष्टि की पूर्णता का संकेत है।

2) आशीर्वाद के गीत: भक्त यह पंक्तियाँ गाकर ईश्वर की कृतज्ञता व्यक्त करते हैं कि उनके आँगन जीवन-भर भरा है; यह प्रार्थना और प्रसन्नता का संयुक्त स्वर है।

3) उद्धार और आजीविका का संतुलन: शास्त्र-आचार के भीतर धन, खेत और कल्याण का सार एक ही प्रेरणा से जुड़ा है—ईश्वर की महिमा से जीवों की खुशी।

व्यावहारिक आवेदन

  • कृतज्ञ जीवन: अपने वातावरण में उपलब्ध सुरक्षा, भोजन और निवास के स्रोतों के लिए परमेश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें।
  • समुदाय-उत्सव: परिवार और समुदाय के साथ मिलकर ईश्वर की कृपा का उल्लेख करें—प्रकृति के हर उपहार को एक उपासना-आह्वान बनाएं।
  • धर्म-व्यवहार में संतुलन: अलौकिक आशीष के साथ अपनी जीवन-योजना का संतुलन रखें; ईश्वर की व्यवस्था के अनुसार मेहनत और भक्ति दोनों का संगम करें।

संक्षेप

यह पद बताता है कि प्रकृति की सुंदरता और जीवन की समृद्धि परमेश्वर की व्यवस्था का गुणगान करती है। चराइयाँ, तराइयाँ—सब कुछ एक दिव्य संगीत-सी बन जाते हैं, जब दिल परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ रहे। यह हमें याद दिलाता है कि पवित्रता और प्रसन्नता एक साथ आ सकती हैं, जब हम ईश्वर की कृपा को स्वीकारते हैं, उसके शासन में जीवन जीते हैं, और अपने चारों ओर के संसार को उसी दृष्टि से देखते हैं।

नोट: नीचे दिये गए संदर्भों में 怀िर्भाव-उद्धरण केवल संक्षिप्त विचार-उद्धरण हैं; पूर्ण पाठ नहीं दिए गए हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 65:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“क्योंकि तुम आनन्द के साथ निकलोगे, और शान्ति के साथ पहुँचाए जाओगे; तुम्हारे आगे-आगे पहाड़ और पहाड़ियाँ गला खोलकर जयजयकार करेंगी, और मैदान के सब वृक्ष आनन्द के मारे ताली बजाएँगे।

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हे आकाश ऊँचे स्वर से गा, क्योंकि यहोवा ने यह काम किया है; हे पृथ्वी के गहरे स्थानों, जयजयकार करो; हे पहाड़ों, हे वन, हे वन के सब वृक्षों, गला खोलकर ऊँचे स्वर से गाओ! क्योंकि यहोवा ने याकूब को छुड़ा लिया है और इस्राएल में महिमावान होगा। (भज. 69:34,35, यशा. 49:13)

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