भजन संहिता 71:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जो मेरे प्राण के विरोधी हैं, वे लज्जित हो और उनका अन्त हो जाए; जो मेरी हानि के अभिलाषी हैं, वे नामधराई और अनादर में गड़ जाएँ।

भजन संहिता 71:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 71:13 (HINIRV) — अर्थ का स्पष्ट उद्घोष

जो मेरे प्राण के विरोधी हैं, वे लज्जित हो और उनका अन्त हो जाए; जो मेरी हानि के अभिलाषी हैं, वे नामधराई और अनादर में गड़ जाएँ।

संदर्भभूमि और पाठ का संज्ञान

यह भजन एक प्रार्थनात्मक रचना है जिसमें कवि अपने असुरक्षक समय में परमेश्वर के साथ अनफ्लैशिंग भरोसा बनाए रखता है। 71वें अध्याय में कवि ने अपनी दीर्घजीवन का अनुभव, विश्वास और संकट के समय में प्रभु की सहायता माँगी है। शास्त्र के अन्य भागों की तरह यह भी दिखाता है कि ईश्वर के साथ संबंध में संकट के समय भी अभिमन्यु-प्रशस्ति नहीं टूटती।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • विरोधी कौन हो सकते हैं? यह भावनात्मक-रचनात्मक अभिभाषक हैं—जो कवि के आत्मसंबंध और उसके प्राण को खतरे में डालते हैं, वे नैतिक और आत्मिक दोनों तरह से खतरे में पड़ते हैं।
  • “लज्जित हो और उनका अन्त हो जाए” से संकेत मिलता है कि ईश्वर विवेकपूर्वक न्याय कर सकते हैं; यह दया और न्याय का संतुलन सूचित करता है।
  • “नामधराई और अनादर” में गड़ जाने का आशय है कि दुष्ट करके भी वे अपनी स्थिति खो देंगे औरHONOR से वंचित रहेंगे।

मुख्य विचार-वाक्य

  1. विश्वास की सुरक्षा: संकटों में भी परमेश्वर पर भरोसा बना रहता है।
  2. न्याय और दया: विरोधी का परिणाम ईश्वर के न्याय के अधीन है।
  3. हानी-उद्धार की आशा: प्रभु की सहायता से सुरक्षित पुनःस्थापना संभव है।

क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके छोटे सार

1) भजन 37:9-11 — अधूरी शक्ति के विरुद्ध परमेश्वर की सत्ता पर भरोसा रखने से बुरे का परिणाम बदल सकता है। छोटा-सा विश्वास भी परमेश्वर के न्याय के साथ स्थिर रहने में मदद करता है।

2) भज 118:6 — प्रभु के साथ दूरी बनते नहीं; वह हमारे साथ है, इसलिए भय नहीं उठता; यह वाक्यांश पाठ के दृश्य को सपोर्ट करता है कि विपत्ति के बीच भी उद्धार की संभावना है।

3) भज 27:1 — प्रभु ही हमारी रोशनी और सहायता है; भय से मुक्त रहने के लिए यह एक प्रेरक पंक्ति है जो मित्रवत प्रार्थना की शैली में मेल खाती है।

प्रायोगिक निष्कर्ष

इस वचन में यह दिखता है कि विपरीत परिस्थितियाँ न केवल खतरे की घंटी हैं, बल्कि वे आत्मा की परीक्षा भी हैं। ईश्वर से गहरे जुड़े व्यक्ति के लिए प्रत्यक्ष न्याय-विद्वेषी कठिनाइयों में भी मूल्यवान संदेशन बना रहता है: सत्य और निष्ठा के साथ चलना, परमेश्वर की पहल पर निर्भर रहना, और संतोष में स्थित रहना।

पवित्र-जीवन के लिए संक्षिप्त take-away

  • द्वेषी विचारों के बीच भी परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखें; वह आपकी सहायता में है।
  • अनुदत्त निंदा से बचें; दुष्ट के परिणाम अंततः ईश्वर के न्याय के हाथ में हैं।
  • आशावादी प्रार्थना और दृढ़ विश्वास से संकट को प्रभु के चरणों में समर्पित करें।

महत्वपूर्ण उद्धरण-नोट

इस पाठ से सम्बंधित Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे शब्द नीचे दिए गये नहीं हैं, पर उनके ब्रह्मज्ञान से प्रभावित दृष्टिकोण का समेकित सार जोड़ा गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 71:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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