भजन संहिता 76:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

केवल तू ही भययोग्य है; और जब तू क्रोध करने लगे, तब तेरे सामने कौन खड़ा रह सकेगा?

भजन संहिता 76:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

मूल व्याख्यात्मक विचार

भजन संहिता 76:7 में कहा गया है कि केवल तू ही भययोग्य है; और जब तू क्रोध करने लगे, तब तेरे सामने कौन खड़ा रह सकेगा? यह वाक्य ईश्वर की महान सत्ता, पवित्र क्रोध और दयालु तेवर का एक संगम प्रस्तुत करता है. कवि दर्शाता है कि धर्म-संहारक शक्तियाँ और मानव सत्ता सब एक क्षण के लिए भी ईश्वर के समकक्ष नहीं ठहरतीं; उसकी महिमा और क्रोध की पराकाष्ठा के सामने मनुष्य असहाय है। साथ ही यह संदेश देता है कि जीवन की सुरक्षा और बंधनों की मुक्ति केवल उस एक परमेश्वर में है जो शाश्वत सत्ता रखता है और अपने दीन-हीन अनुयायियों पर कृपा करता है।

पाठ-विवरण: साहित्यिक संदर्भ

यह भजन संहिता शास्त्रीय रूप से परमेश्वर की महिमा के प्रत्यक्ष उद्घोष के रूप में है। कवि ने भय, क्रोध और आत्म-समर्पण के बीच की रेखा स्पष्ट कर दी है—जो यह दर्शाती है कि कृपा है तो भय का स्थान है और परमेश्वर के सामने स्व-गौरव का कोई ठिकाना नहीं। यह उद्धरण तेज़ गतिकी में जुड़ा है कि परमेश्वर के अभिमान को क्षण भर में ही ध्वस्त कर देने की क्षमता है, और यही कारण है कि भक्त उसकी उपस्थिति में डर और श्रद्धा दोनों अनुभव करते हैं।

theological संकेत

- परमेश्वर की भययोग्यता केवल भय से जुड़ी नहीं; यह उसकी न्याय-सम्पन्न सत्ता और पवित्रता के कारण है।
- क्रोध वह नैसर्गिक पहलू है जो बुराई के विरुद्ध उसकी दृढ़ नीति को दर्शाता है। भक्त जान ले कि हर प्रतिकूल स्थिति में भी परमेश्वर की योजना सुरक्षित है।

क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप, संदर्भ-विचार)

  • निर्गमन 15:11 – शुद्धता और पवित्रता के विरुद्ध नहीं, बल्कि ईश्वर की समानता और महानता की प्रशंसा।
  • यशायाह 57:15 – जो महान और उच्च है, वह दीन-हीन आने वालों के लिए ठहराव बनता है।
  • रोमियों 11:33 – गह्वर नाद और गहराई की पराकाष्ठाओं से ऊपर ईश्वर की योजनाओं की गहराई।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की “भययोग्यता” उसकी पवित्रता, न्याय और उद्धार की पूर्णता का संकेत देती है, और मनुष्य के लिए नियंत्रणीय मानक वही रहता है जो उसकी महिमा में निहित है।

प्रश्न-परिक्षण

  • जब आप संकट में हों, तब आप परमेश्वर के भय से क्या सीखते हैं? क्या आप उसकी पाप-परायणा सत्ता को स्वीकारते हैं?
  • क्या आप क्रोध के समय ईश्वर की महिमा को याद करते हैं या अपने स्व-वाक्क को अधिक सुने जाते हैं?
  • क्या यह पद आपको नम्रता और भरोसे की ओर आकर्षित करता है, ताकि आप स्वयं को परमेश्वर के सामने नीचे कर दें?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यह पद बताता है कि परमेश्वर की महानता और भययोग्यता मानव इतिहास के हर क्रोध, युद्ध और संकट को संचालित करती है। His क्रोध के समय भी उसकी कृपा और न्याय का संतुलन बनाए रहता है। भक्त के लिए यह आकर्षक संदेश है कि केवल वही परमेश्वर है जो एकछत्र सत्ता में सब कुछ नियंत्रित करता है—ताकि भयभीत जीव अपनी निर्भरता और आस्था को मजबूत करे।

महत्वपूर्ण उद्धरण (public-domain commentators)

ADAM CLARKE ने परमेश्वर के भययोग्य और क्रोध-सम्बन्धी निर्भरता को निहायत स्पष्ट किया है: परमेश्वर की महिमा और न्याय, दोनों मिलकर संसार के अंतहीन संकटों में भी सुरक्षा बनाते हैं।

MATTHEW HENRY के अनुसार, “God is terrible in His power” वाक्यांश मानव के और ईश्वर के संबंध के भीतर आस्था की परीक्षा है।

ALBERT BARNES ने भी यह दर्शाया है कि परमेश्वर के सामने प्रत्यक्ष खड़ा होना संभव नहीं, क्योंकि वह पूर्ण और अनंत है; यह विचार भक्त के भीतर विनय को प्रेरित करता है।

इन उद्धरणों के कारण अब स्पष्ट है कि भजन की यह पंक्ति एक प्रेरणा है—ईश्वर की भययोग्यता हमारी सुरक्षा है, और उसकी क्रोध-नीति हमारे उद्धारकर्ता के रूप में दिखाई देती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 76:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उसके क्रोध का सामना कौन कर सकता है? और जब उसका क्रोध भड़कता है, तब कौन ठहर सकता है? उसकी जलजलाहट आग के समान भड़क जाती है, और चट्टानें उसकी शक्ति से फट फटकर गिरती हैं। (प्रका. 6:17)

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भजन संहिता 89:7 (HINIRV) »
परमेश्‍वर पवित्र लोगों की गोष्ठी में अत्यन्त प्रतिष्ठा के योग्य, और अपने चारों ओर सब रहनेवालों से अधिक भययोग्य है। (2 थिस्सलु. 1:10, भजन 76:7,11)

प्रकाशितवाक्य 14:7 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रकाशितवाक्य 14:7 (HINIRV) »
और उसने बड़े शब्द से कहा, “परमेश्‍वर से डरो, और उसकी महिमा करो, क्योंकि उसके न्याय करने का समय आ पहुँचा है; और उसकी आराधना करो, जिसने स्वर्ग और पृथ्वी और समुद्र और जल के सोते बनाए।” (नहे. 9:6, प्रका. 4:11)

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