भजन संहिता 89:38 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तो भी तूने अपने अभिषिक्त को छोड़ा और उसे तज दिया, और उस पर अति क्रोध किया है।

भजन संहिता 89:38 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 89:38 — परिचय और सार

यह पाठ भजनकार के आहत अनुभव का भाग है। कवी अपने परमेश्वर के साथ बने एक विशेष वादा-आधारित संबंध की कसौटी को उघाड़ता है—और फिर गहरी चोट के प्रमाण देता है कि कैसे सत्ता और सत्ता-सम्बन्धों के कारण दिव्य अभिषिक्त पर परमेश्वर ने अप्रत्याशित रूप से क्रोध किया। यह সেই समय का वर्णन है जब विश्वासियों ने ईश्वर के वादों के प्रकाश में भी अपने अनुभवों में भारी विरोध देखा।

यह पाठ परमेश्वर के चरित्र और विश्वास के प्रति प्रकाश डाले हुए तथ्य

कथा के अनुसार, अभिषिक्त जो परमेश्वर के चुनें हुए प्रतिनिधि के रूप में माने जाते हैं, उन पर क्रोध का तत्व टूट पड़ता है, और उनकी स्थिति में दया और स्थिरता ढह जाती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर के साथ गहरे रिश्ते में भी असफलताओं, सवालों और अंतस के आघात का स्थान है। फिर भी भक्ति पक्ष की ओर एक संकेत है: भगवान के निर्णय कभी केवल मान-अपमान के कारण नहीं होते; वहाँ उद्देश्य और न्याय के कारण भी होते हैं, जिनमें देवता का पनरागरण (repentance) या पुनःस्थापना संभव है।

शब्दार्थ और छवियाँ स्पष्ट करते हुए

— अभिषिक्त: देवत्व द्वारा चुन लिया गया राजा या सिरदार, जो धर्मी शासन के प्रतीक के रूप में काम करता है।
— छोड़ा/तज दिया: ईश्वर के साथ स्थापित विश्वास-सम्बन्ध में अचानक दूरी बनना या निष्कारण; प्रतिकूल अनुभव में भी ईश्वर के साथ संबंध सूक्ष्म रहा।
— अति क्रोध: परमेश्वर के क्रोध का उग्र और तात्कालिक प्रकट होना, जो न्याय और पवित्रता की पराकाष्ठा को दर्शाता है।

संबद्ध कथन-नैमतन

यहां के विचारों की प्रेरणा निम्न शास्त्रीय टिप्पणीकारों से मिलती है, जो परमेश्वर की पवित्र न्याय और उसकी सदा-स्थिरता को एक साथ देखते हैं:

  • मैथ्यू हेनरी (Matthew Henry): परमेश्वर के वायदे और न्याय की कसौटियाँ कभी-भी अचानक नहीं टूटतीं; परन्तु अपने पवित्र क्रोध से वह अधर्म को सुधारने का रास्ता खोलता है।
  • एल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes): अभिषिक्त की स्थिति में गिरावट दिखाती है कि दया और न्याय दोनों की दृष्टि परमेश्वर में एक साथ चलते हैं—न्याय के साथ दया का संयोजन आवश्यक है ताकि सत्य स्थापित हो।
  • एडम क्लार्क (Adam Clarke): क्रोध के साथ अपेक्षित पुनर्स्थापना और स्मरण-प्रतिष्ठा की धारा, यह दर्शाती है कि ईश्वर अपने लोगों के साथ संपूर्ण बंधन रखना चाहते हैं, भले ही समय-समय पर कठिनाइयों के बाद ही सही पुनःस्थापना मिले।

क्रॉस-रेferenciae (संयोगित आयतें) और उनका छोटा सार

1) भजन 89:39 — ईश्वर अपने वचन के अनुरूप अभिशिक्त के साथ जुड़ी कठिनाईयों को लिखता है; यह स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर का अनुयायित्व समय-समय पर चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
2) यशायाह 54:7-8 — क्रोध के विपरीत, परमेश्वर के उद्धारण का पुनःस्थापन संभव है; उसका दया अनंत है।
3) निम्बिडि 1) रोमियों 11:22 — ईश्वर के कृपा-निष्ठ और चंचल नहीं रहने का संकेत; सतत विश्वास के साथ रहने पर दया और जीवन उभरते हैं।

आज-के समय में अनुप्रयोग

1) कठिन समय में भी ईश्वर की प्रामाणिकता पर भरोसा रखें। अभिषिक्त के अनुभव में चोट लगना उनके साथ परमेश्वर के साथ विश्वास-योग के टूटने जैसा नहीं है; यह अवसर है कि हम परमेश्वर के न्याय और दया दोनों को समझें।

2) अपने दर्द के बीच प्रार्थना और नम्रता बनाए रखें। क्रोध के समय गलत अपेक्षाओं पर जोर न दें; बल्कि ईश्वर के उद्देश्य पर ध्यान दें—वह तब भी सत्य के लिए कार्य कर रहा होता है।

3) समुदाय में निराशा के बावजूद एक-दूसरे का सहारा बने रहें—यही वह मार्ग है जो विश्वास को अधिक गहराई देता है और दिव्यता के प्रतिफल को स्पष्ट करता है।

नोट: नीचे उद्धृत पाठ्यांशों के विशिष्ट शब्द-योग्यमान कोखास तौर पर देखने पर, मैथ्यू हेन्री, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के पूर्ण उद्धरण यदि उपलब्ध हों, तो दिखाए गए हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 89:38 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“इन बातों को देखकर यहोवा ने उन्हें तुच्छ जाना, क्योंकि उसके बेटे-बेटियों ने उसे रिस दिलाई थी।

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“हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्‍वर का ज्ञान रख, और खरे मन और प्रसन्‍न जीव से उसकी सेवा करता रह; क्योंकि यहोवा मन को जाँचता और विचार में जो कुछ उत्‍पन्‍न होता है उसे समझता है। यदि तू उसकी खोज में रहे, तो वह तुझको मिलेगा; परन्तु यदि तू उसको त्याग दे तो वह सदा के लिये तुझको छोड़ देगा।

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तेरे उन शत्रुओं ने तो हे यहोवा, तेरे अभिषिक्त के पीछे पड़कर उसकी नामधराई की है।

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