Old Testament
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जकर्याह 8:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसी प्रकार मैंने इन दिनों में यरूशलेम की और यहूदा के घराने की भलाई करने की ठान ली है; इसलिए तुम मत डरो।
जकर्याह 8:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 8:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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जकर्याह 8:13 (HINIRV) »
हे यहूदा के घराने, और इस्राएल के घराने, जिस प्रकार तुम अन्यजातियों के बीच श्राप के कारण थे उसी प्रकार मैं तुम्हारा उद्धार करूँगा, और तुम आशीष के कारण होंगे*। इसलिए तुम मत डरो, और न तुम्हारे हाथ ढीले पड़ने पाएँ।”

मीका 7:18 (HINIRV) »
तेरे समान ऐसा परमेश्वर कहाँ है जो अधर्म को क्षमा करे और अपने निज भाग के बचे हुओं के अपराध को ढाँप दे? वह अपने क्रोध को सदा बनाए नहीं रहता, क्योंकि वह करुणा से प्रीति रखता है।

यशायाह 43:1 (HINIRV) »
हे इस्राएल तेरा रचनेवाला, और हे याकूब तेरा सृजनहार यहोवा अब यह कहता है, “मत डर, क्योंकि मैंने तुझे छुड़ा लिया है; मैंने तुझे नाम लेकर बुलाया है, तू मेरा ही है।
यथार्थ विश्वास और उद्धार का संदेश: जकर्याह 8:15
मुख्य interpretive point: परमेश्वर ने यरूशलेम और यहूदा के लिए भलाई करने का पक्का इरादा दोहराया है, और इस कारण लोग डरे नहीं; उनकी आशा किसके ऊपर टिकेगी? परमेश्वर की वादा-सम्पन्न कृपा और उनकी पवित्र इच्छा की पुष्टि है।
पाठ-प्रसंगात्मक संदर्भ
यह अय्यूदे-जकर्याह की ऐसी घड़ी में लिखा गया है जब यहूदा-येरूशलेम के लोग सांसारिक दबावों और आक्रमणों से घिरे थे। भविष्यवाणी के पहले भागों में परमेश्वर ने यहूदियों को उनकी पापों के कारण जगाने और लौटने की चुनौती दी, परंतु आठवें अध्याय के अध्याय में वह उनकी पुनर्स्थापना और शांति का विश्वास दिलाते हैं। यहां कहा गया कि “इसी प्रकार मैंने इन दिनों में यरूशलेम की और यहूदा के घराने की भलाई करने की ठान ली है,”—यानी भविष्य की देहलीज़ से पहले मौजूदा समय में ही उनकी भलाई का संकल्प परमेश्वर का दृढ़ स्वर है।
थियोलॉजिकल महत्व
1) वाचा-आश्वासन: यह वाक्य परमेश्वर के वचनों की शक्ति को रेखांकित करता है—उसी दिन की भांति अब भी वह यहूदियों के लिए भलाई बनना चाहता है। 2) नवीनीकरण और उम्मीद: संकटों के बावजूद प्रभु का इरादा है कि वह अपने लोगों के साथ खेत-खलिहान और शहरों की दशा सुधारे और सुरक्षा दे। 3) आस्था बनाम भय: “इसलिए तुम मत डरो” निर्देश यह दर्शाता है कि परमेश्वर के वादों पर टिके रहना चाहिए, न कि स्थिति के भय या आलोचनाओं पर।
दर्शनसंगति: संग्रहित टिप्पणियाँ
• Matthew Henry: यह वचन दर्शाता है कि परमेश्वर का सौभाग्य उनके वचनों के अनुसार हमारे जीवन में परिणाम देता है; भले परिस्थिति कैसी भी हो, उनका इरादा भलाई की दिशा में है।
• Albert Barnes: परमेश्वर की कृपा और संरक्षकता से यरूशलेम और यहूदा के इतिहास पर प्रकाश पड़ता है; उनके शब्दों से यहूदा के लिए सुरक्षा और उन्नति सुनिश्चित होती है।
• Adam Clarke: पवित्रता और नीति-निर्णय के संदर्भ में यहोवा की योजना स्थिर और विश्वसनीय रहती है; भय के बजाय विश्वास की राह मजबूत होती है।
पठन-आधार: कथा-सूत्र और क्रॉस-रेफरेंसेस
क्रॉस-रेफरेंस 1: यहोशू 1:9—“डरो मत, निश्चिंत हो कर चलो”—परमेश्वर का आशीर्वाद स्पष्ट रहता है जब उसका लोग विश्वास में कदम उठाते हैं।
क्रॉस-रेफरेंस 2: पतरस 3:9—देव का इरादा सब को उद्धार में रखना है, भय न मानना।
क्रॉस-रेफरेंस 3: यशायाह 40:31—परंतु आपको यहोवा पर इंतजार करने पर नई शक्ति मिलेगी।
विचार के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस verses में परमेश्वर अपने लोगों के लिए स्पष्ट और पक्का इरादा व्यक्त कर रहा है—भलाई उनकी ओर है, और भय के स्थान पर आशा और विश्वास अपेक्षित है। यह संदेश पुराने व्यवस्था के नवीनीकरण की धारणाओं को पुष्ट करता है: जब लोग ईमानदारी से लौटें और परमेश्वर के वचनों पर टिके रहें, तब वह उनकी दुनिया को मजबूत, सुरक्षित और उन्नत बनाता है।
टिप्पणी संदर्भ सार
यद्यपि पूरा पाठ नहीं उद्धृत किया गया, यह संदेश यहूदा के लिए विशेष रूप से आशावादी है: परमेश्वर की भलाई की योजना अभी भी सक्रिय है, और वेudu कि वह डर नहीं, बल्कि विश्वास की राह दिखा रहा है।