Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीजकर्याह 8:17 बाइबल पद की व्याख्या
जकर्याह 8:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और अपने-अपने मन में एक दूसरे की हानि की कल्पना न करना, और झूठी शपथ से प्रीति न रखना, क्योंकि इन सब कामों से मैं घृणा करता हूँ, यहोवा की यही वाणी है।” (इफि. 4:25)
जकर्याह 8:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
जकर्याह 8:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

जकर्याह 7:10 (HINIRV) »
न तो विधवा पर अंधेर करना, न अनाथों पर, न परदेशी पर, और न दीन जन पर; और न अपने-अपने मन में एक दूसरे की हानि की कल्पना करना।”

नीतिवचन 3:29 (HINIRV) »
जब तेरा पड़ोसी तेरे पास निश्चिन्त रहता है, तब उसके विरुद्ध बुरी युक्ति न बाँधना।

जकर्याह 8:17 – क्यों यह वाक्य आज भी ज़रूरी है
यह वचन बताता है कि ईश्वर लोगों के मन के भीतर की नापसंद और बाहर की प्रतिष्ठा को नहीं देख लेते—बल्कि हृदय की सच्चाई और व्यवहार की ईमानदारी को प्रमुख मानते हैं। झूठे शपथ, दूसरों की हानि की कल्पना, और कृत्रिम शिष्टाचार—इन सबका स्रोत मन की गिरावट है। इसीलिए परमेश्वर कहता है कि मैं इन बातों से घृणा करता हूँ। यह केवल औपचारिक धर्म नहीं है, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में ईमानदारी और प्रेम को बनाए रखना है।
पारिश्रहContext (संदर्भ)
जकर्याह के समय यह प्रचार-उत्पादन यहूदियों के पुनर्निर्माण के दौर का था, जब बाबूल के देशदर्शन के बाद लोग लौटकर मंदिर और नगर-घरों की मरम्मत कर रहे थे। यह वचन उन कारणों पर प्रकाश डालता है जो अपनों के बीच विश्वासघात, अनैतिक समझौते, और सामाजिक निष्पत्ति से भरे थे—यानी बाहरी रीति-रिवाज के पीछे असली दिल से न जुड़कर भी दिखावा करने की प्रवृत्ति।
मुख्य संदेश
इस वचन का केंद्र बिंदु है: ईश्वर चंडी वाणी के साथ मालिकाना और निर्ममता से रोकना नहीं चाहता कि हमारा आचरण केवल दिखावा हो। झूठी शपथ, दूसरों को नुकसान पहुँचाने की कल्पना, और आत्म-स्वार्थी निर्णय—इन सब से समाज में विश्वास और नैतिकता टूटती है। परमेश्वर सच और न्याय की प्रतिज्ञा का सम्मान चाहते हैं, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।
आध्यात्मिक विषय के साथ जोड़ी गई समझ
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप समझ के साथ)
नीचे दिए गए स्थान संदर्भित विचारों के साथ उपयुक्त होते हैं:
हिंदी बाइबल टैक्स्ट के साथ नैतिक-व्यावहारिक संकेत
- अपने विचारों में थोपे गए अहंकार और ईर्ष्या से दूर रहें; दूसरों की क्षति की कल्पना न करें।
- शब्द और शपथ के संदर्भ में सच्चाई को प्राथमिकता दें; बातचीत में साफ-साफ और सीधे रहें।
- समाज में विश्वास को बनाए रखने के लिए प्रामाणिक आचरण और दायित्व निभाने की कोशिश करें।
देवotional reflection
जब मन में किसी के लिए गलत विचार उगते हैं, या किसी के लिए हानि की कल्पना होती है, तब याद रखिए: परमेश्वर हमारे मन के भीतर भी देखता है। ईमानदारी और प्रेम के साथ जीवन जीना न केवल ईश्वर को संतुष्ट करता है, बल्कि हमारे चारों ओर सामाजिक शांति और भरोसा भी बढ़ाता है।icc
सूक्ष्म उद्धरण (अगर उपलब्ध)
अभिलेखित पवित्र-ग्रंथीय व्याख्याओं में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्पष्ट शब्द-चिह्न उपलब्ध नहीं हैं, पर उनकी समेकित शिक्षाओं से यह पाठ स्पष्ट होता है कि यह वाचा ईमानदार जीवन, सामाजिक न्याय और श्रेष्ठ प्रेम को प्रेरित करती है।