Old Testament
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जकर्याह 8:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
सेनाओं का यहोवा यह कहता है, “तुम इन दिनों में ये वचन उन भविष्यद्वक्ताओं के मुख से सुनते हो जो सेनाओं के यहोवा के भवन की नींव डालने के समय अर्थात् मन्दिर के बनने के समय में थे।
जकर्याह 8:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 8:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 35:4 (HINIRV) »
घबरानेवालों से कहो, “हियाव बाँधो, मत डरो! देखो, तुम्हारा परमेश्वर बदला लेने और प्रतिफल देने को आ रहा है। हाँ, परमेश्वर आकर तुम्हारा उद्धार करेगा।”

एज्रा 5:1 (HINIRV) »
तब हाग्गै नामक नबी और इद्दो का पोता जकर्याह यहूदा और यरूशलेम के यहूदियों से नबूवत करने लगे, उन्होंने इस्राएल के परमेश्वर के नाम से उनसे नबूवत की।

1 इतिहास 22:13 (HINIRV) »
तू तब ही कृतार्थ होगा जब उन विधियों और नियमों पर चलने की चौकसी करेगा, जिनकी आज्ञा यहोवा ने इस्राएल के लिये मूसा को दी थी। हियाव बाँध और दृढ़ हो*। मत डर; और तेरा मन कच्चा न हो।
पद का सीधा अर्थ
यह वचन यहोवा सेनाओं के द्वारा कहे जाते हैं: अभी आप इन दिनों में वे शब्द सुन रहे हैं जो उन भविष्यद्वक्ताओं के मुख से निकलते हैं, जिन्हें मंदिर की नींव डालने के समय, अर्थात् मन्दिर के पुनर्निर्माण के समय के संदर्भ में प्रकट किया गया था। इसका तात्पर्य है कि परमेश्वर का संदेश फिर से जिन्दगी के ठोस कार्यों के पीछे है, न कि केवल विचारों और भविष्यवाणियों में रह गया है।
पृष्ठभूमि
जकर्या इस्राएल के लौटने के बाद यह आँसू-भरे समय लिखे गए पेयते हैं, जब यहूदा और यरूशलीम में मंदिर पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो रही थी। यहोवा की योजनाओं के अनुसार यह समय उन दिनों की पहचान कराता है जब परमेश्वर अपने लोगों के बीच फिर से बसना चाहता है, उनके साथ सहयोग करना चाहता है, और उनके व्यवहार में परिवर्तन लाना चाहता है। यह वचन दर्शाता है कि जो संदेश पहले से पर्याप्त बताया गया था, वही अब भी सच है और लोगों के निर्णयों पर प्रभाव डालता है।
interpretive observations
मूल विषय-वस्तु
Cross-references and संक्षिप्त स्पष्टीकरण
- यह सेम शब्दधारणा पर असर डालता है कि परमेश्वर के वचन समय-समय पर हमारे साथ जुड़ते हैं; यह पुराने संदर्भों के साथ एक सतत संवाद बनाए रखता है।
– हिजाज के दिनों के मंदिर-निर्माण पर ध्यान: यह कड़ी यह दिखाती है कि ईश्वर का उद्देश्य केवल भवन नहीं, बल्कि भक्तों की आंतरिक प्रगति है।
– भविष्यवाणी और वर्तमान क्रिया का संगम: संदेश जब सुन लिया जाता है, तो वह व्यवहार में भी दिखना चाहिए।
व्यावहारिक निष्कर्ष
जीवन में आप जहां भी पुनर्निर्माण के प्रयास में हों, परमेश्वर के संदेश को केवल मान लेने से नहीं, कार्य में उतरने से सच्चा परिवर्तन आता है। अपने दिनचर्या में उस संदेश के अनुरूप छोटे छोटे कदम उठाएं—आचरण, वचनपालन और समुदाय के साथ सहयोग।
महत्वपूर्ण उद्धरण (यदि उपलब्ध): किन्हीं पुराने टिप्पणीकारों के समान विचारों के बोल-चाल के छोटे अंश नीचे दी गई विचारधारा में मिलते हैं, पर यहाँ पूरा पाठ नहीं उद्धृत किया गया है।