Old Testament
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2 राजाओं 7:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अब राजा ने उस सरदार को जिसके हाथ पर वह तकिया करता था फाटक का अधिकारी ठहराया; तब वह फाटक में लोगों के पाँवों के नीचे दबकर मर गया। यह परमेश्वर के भक्त के उस वचन के अनुसार हुआ जो उसने राजा से उसके यहाँ आने के समय कहा था।
2 राजाओं 7:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 राजाओं 7:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 राजाओं 6:32 (HINIRV) »
एलीशा अपने घर में बैठा हुआ था, और पुरनिये भी उसके संग बैठे थे। सो जब राजा ने अपने पास से एक जन भेजा, तब उस दूत के पहुँचने से पहले उसने पुरनियों से कहा, “देखो, इस खूनी के बेटे ने किसी को मेरा सिर काटने को भेजा है; इसलिए जब वह दूत आए, तब किवाड़ बन्द करके रोके रहना। क्या उसके स्वामी के पाँव की आहट उसके पीछे नहीं सुन पड़ती?”

2 राजाओं 7:2 (HINIRV) »
तब उस सरदार ने जिसके हाथ पर राजा तकिया करता था, परमेश्वर के भक्त को उत्तर देकर कहा, “सुन, चाहे यहोवा आकाश के झरोखे खोले, तो भी क्या ऐसी बात हो सकेगी?” उसने कहा, “सुन, तू यह अपनी आँखों से तो देखेगा, परन्तु उस अन्न में से कुछ खाने न पाएगा।”

न्यायियों 20:43 (HINIRV) »
उन्होंने बिन्यामीनियों को घेर लिया, और उन्हें खदेड़ा, वे मनुहा में वरन् गिबा के पूर्व की ओर तक उन्हें लताड़ते गए।
2 राजाओं 7:17 पर टिप्पणी क्यों महत्वपूर्ण है
यह वचन दिखाता है कि परमेश्वर की योजनाएं मनुष्यों की चालों से ऊपर हैं और विश्वासयोग्यों के प्रति उसकी कृपा कैसे कार्य करती है। तब के संकटपूर्ण समय में, जब चूंकि नगर के लोग भय से काँप रहे थे, परमेश्वर ने उन्नत और अद्भुत तरीके से उनकी सहायता की। इस वाक्य में यह स्पष्ट होता है कि जिस प्रकार एक सेनापति भी एक नाप-तौल के अनुसार चलना चाहता है, उसी प्रकार परमेश्वर की योजना संपूर्णता से पूरी होती है, चाहे मानव मान्यताओं के विपरीत प्रतीत हो।
परिप्रेक्ष्य—मूल संदर्भ
यहोवा ने शम्सी की राजधानी में अकाल-पूर्व संकट के बीच इज़राइल की तरफ से एक दिव्य योजना निर्धारित की, ताकि देश जीत हासिल करे और शुक्रगुज़ार होकर परमेश्वर की स्तुति करे। नबियों और पवित्र योजनाओं के अनुसार, परमेश्वर ने एलीशा के विश्वास के साथ लोगों को यह दिखाने का अवसर दिया कि भय के बंधन टूट जाते हैं जब श्रद्धा परमेश्वर पर स्थित होती है। यह पद एक बार फिर यह दिखाता है कि परमेश्वर की बात सत्य होती है और उसकी योजना प्रत्यक्षतः घटित होती है।
मुख्य संदेश
इस वचन का केंद्रीय संदेश है—प्रतिकूल स्थिति में भी परमेश्वर अपने भक्तों के साथ है और उसकी विराट योजना चालू रहती है। राजा के कहने पर एक प्रमुख अधिकारी को जिम्मेदारी में रखने का निर्णय एक मानवीय निर्णय प्रतीत होता है, पर परमेश्वर ने इसे उनकी मृत्यु के साथ जोड़कर एक स्पष्ट चेतावनी दी कि परमेश्वर के वचन के विरुद्ध कोई भी कदम नहीं उठ सकता।
पवित्र ग्रन्थ से जुड़े विषय
क्रूस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त संदर्भ और जुड़े विचार)
महत्वपूर्ण आरोहण—मिश्रण टिप्पणी
यहां एक परमेश्वर-केन्द्रित पाठ है, जो दिखाता है कि कभी-कभी तथ्य यह भी होता है कि एक शक्तिशाली अधिकारी की प्रवृति, जो राजा के लिए "तकिया" के रूप में था, वह अंततः परमेश्वर के प्रमाण के सामने क्षीण पड़ गया। यह संदेश देता है कि परमेश्वर के भक्तों के लिए सच और न्याय समान रहते हैं; वह अंततः सत्य को स्थापित करता है।
आध्यात्मिक devotional संकेत
हम अपने दिन-प्रतिदिन के निर्णयों में यह याद रखें कि परमेश्वर की वचन-सत्यता सर्वोपरि है। भय के समय में भी विश्वास की एक छोटी सी चिंगारी परमेश्वर की कृपा को उभार सकती है। उन परिस्थितियों में भी जो हमें असुरक्षित लगती हैं, ईश्वर की योजना पूर्ण होती है—हमें धैर्य और नम्रता के साथ उसका पालन करना चाहिए।
संक्षिप्त cross-reference के साथ मार्गदर्शक नोट
1) यिर्मयाह 1:12 — प्रभु अपने शब्द को सावधानी से पूरा करने वाला है; वह जो बोलता है उसे करता है। यह verse इस तथ्य की पुष्टि करता है कि परमेश्वर के वचन के प्रति भरोसा बना रहना चाहिए।
2) भजन 33:11 — परमेश्वर की योजना स्थिर रहती है; वह पृथ्वी की चौड़ाई के बावजूद उसकी योजनाएं अपना मार्ग बनाती हैं।
3) 2 कुरिन्थी 1:20 — हर एक वादा उसके लिए है जो उसे पूरा करता है; इसलिए उसका हाँ-और-आमीन सत्य है।
सारांश
यह पद हमें सिखाता है कि परमेश्वर की योजनाएं मानव पूर्वधारणाओं से ऊपर हैं और वह समय-समय पर अपने भक्तों की रक्षा में अद्भुत तरीके दिखाता है। एक अधिकारी की भूमिका, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, परमेश्वर के प्रमोद के सामने टिक नहीं पाती; अंततः उसकी योजना सच होती है। प्रेरणा यही है—विश्वास में स्थिर रहें, और परमेश्वर के सिद्ध शब्दों के पीछे चलते रहें।
टिप्पणी स्रोतों में से उद्धृत संक्षिप्त कथन: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सन्दर्भ-रेफरेंसेस के लिए पाठ यही रहा कि उनके टिप्पणीकारों ने परमेश्वर की योजनाओं की प्रतिज्ञान और विश्वास की महत्ता पर बल दिया है; उनके पूर्ण वाक्य इस पंक्ति में संक्षेप में उद्धृत हैं—पर उनके उद्धरण पूर्ण रूप से यहाँ प्रस्तुत नहीं किए गए हैं ताकि पाठ में मूलभाव बना रहे।