Old Testament
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2 राजाओं 7:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब वे सांझ को अराम की छावनी में जाने को चले, और अराम की छावनी की छोर पर पहुँचकर क्या देखा, कि वहाँ कोई नहीं है।
2 राजाओं 7:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 राजाओं 7:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लैव्यव्यवस्था 27:26 (HINIRV) »
“परन्तु घरेलू पशुओं का पहलौठा, जो पहलौठा होने के कारण यहोवा का ठहरा है, उसको कोई पवित्र न ठहराए; चाहे वह बछड़ा हो, चाहे भेड़ या बकरी का बच्चा, वह यहोवा ही का है।

लैव्यव्यवस्था 27:8 (HINIRV) »
परन्तु यदि कोई इतना कंगाल हो कि याजक का ठहराया हुआ दाम न दे सके, तो वह याजक के सामने खड़ा किया जाए, और याजक उसकी पूँजी ठहराए, अर्थात् जितना संकल्प करनेवाले से हो सके, याजक उसी के अनुसार ठहराए।

व्यवस्थाविवरण 28:7 (HINIRV) »
“यहोवा ऐसा करेगा कि तेरे शत्रु जो तुझ पर चढ़ाई करेंगे वे तुझसे हार जाएँगे; वे एक मार्ग से तुझ पर चढ़ाई करेंगे, परन्तु तेरे सामने से सात मार्ग से होकर भाग जाएँगे।
सीधे अर्थ का संक्षेप
2 राजाओं 7:5 में कहा गया है कि शाम के समय अराम की छावनी के ठहराव के पास जाकर वे देखते हैं कि वहाँ न कोई है और न कोई आवाज़। इसका क्रमभंग और आश्चर्यजनक सत्य यह है कि संकट के बीच परमेश्वर ने चमत्कारिक रूप से सर्वथा असमर्थता को दूर कर दिया और दुश्मन की सेनाओं को उसी जगह पर एकदम असंभव स्थिति में छोड़ दिया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह वेणो-दिन का समय है जब देश घोर भूख से जूझ रहा है और गैर-विश्वासी घुसपैठ ने नगर-सीमाओं को दबा रखा है। नबियों के संदेश की प्रतीक्षा, किसानों की दया, और रहस्यमय ईश्वर-प्राप्ति की आशा के बीच एकदम विपरीत स्थिति दिखती है: अराम की घेराबंदी के कारण लोग भूखे मर रहे हैं, परन्तु ईश्वर की पदचाप अचानक इधर से उधर होती है।
व्याख्यात्मक निरीक्षण
मुख्य विषय-वस्तु (थीम)
अन्य संदर्भ जो salita
– संदर्भ 1: भजन-स्रोत में एक ही संदेश कि परमेश्वर संकट के बीच भी संकल्पित तरीके से सहायता भेजते हैं; संरेखण: न केवल बाहरी शरण, बल्कि आंतरिक विश्वास की आवश्यकता।
– संदर्भ 2: 2 राजाओं 6:24-25 में भी इसी प्रकार की घेराबंदी और देव की अनुमति से स्थितियाँ बदलीं—मानवप्रयत्न से पीछे नहीं, बल्कि परमेश्वर के चमत्कार से आगे बढ़ती हैं।
– संदर्भ 3: 2 राजा 8:6 में दिखा कि ईश्वर अपने कामों के क्रम में समय, लोकेशन और लोगों के मन को बदल देता है।
संक्षिप्त संबंधी उद्धरणों के भीतर विचार
यहाँ पर तीन प्रभावी बिंदु आते हैं: पूर्वात्तदृष्टि में दया और करुणा, संकट के समय विश्वास का परीक्षण, और ईमानदार आशा के साथ कदम बढ़ाने का आग्रह।
व्यावहारिक takeaway
बुरे समय में भी परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखें; परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, वह आपके साथ है और आवश्यक समय पर आवश्यकता-के मुताबिक मार्ग दिखा देगा। जीवन के दैनिक निर्णयों में आस्था, धैर्य और प्रेम को एक साथ रखना सीखने योग्य है।
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