Old Testament
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2 राजाओं 7:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यदि हम कहें, 'नगर में जाएँ,' तो वहाँ मर जाएँगे; क्योंकि वहाँ अकाल पड़ा है, और यदि हम यहीं बैठे रहें, तो भी मर ही जाएँगे। तो आओ हम अराम की सेना में पकड़े जाएँ; यदि वे हमको जिलाए रखें तो हम जीवित रहेंगे, और यदि वे हमको मार डालें, तो भी हमको मरना ही है।”
2 राजाओं 7:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 राजाओं 7:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 शमूएल 14:14 (HINIRV) »
हमको तो मरना ही है, और भूमि पर गिरे हुए जल के समान ठहरेंगे, जो फिर उठाया नहीं जाता; तो भी परमेश्वर प्राण नहीं लेता, वरन् ऐसी युक्ति करता है कि निकाला हुआ उसके पास से निकाला हुआ न रहे।

एस्तेर 4:16 (HINIRV) »
“तू जाकर शूशन के सब यहूदियों को इकट्ठा कर, और तुम सब मिलकर मेरे निमित्त उपवास करो, तीन दिन-रात न तो कुछ खाओ, और न कुछ पीओ। और मैं भी अपनी सहेलियों सहित उसी रीति उपवास करूँगी*। और ऐसी ही दशा में मैं नियम के विरुद्ध राजा के पास भीतर जाऊँगी; और यदि नाश हो गई तो हो गई।”

यिर्मयाह 14:18 (HINIRV) »
यदि मैं मैदान में जाऊँ, तो देखो, तलवार के मारे हुए पड़े हैं! और यदि मैं नगर के भीतर आऊँ, तो देखो, भूख से अधमरे पड़े हैं! क्योंकि भविष्यद्वक्ता और याजक देश में कमाई करते फिरते और समझ नहीं रखते हैं।'”
2 राजा 7:4 — संकट और विश्वास के बीच का निर्णय
यह व verse असली संकट की घड़ी में आत्मा की ध्वनि और प्रार्थनात्मक विश्वास की आवाज दिखाता है। जब दो युद्ध-परिस्थितियाँ एक साथ दबाव डालती हैं—भीतरी प्रलोभन और बाहरी खतरा—मानवीय निर्णय कितने निर्णायक बन जाते हैं, यहेक verse हमें सिखाता है कि किस प्रकार असफलता के डर के बजाय परमेश्वर की सहायता पर भरोसा करना चाहिए।
पार्श्वभूमि और मूल संदर्भ
यहोवा के परमेश्वर के पीछे-पीछे चलने वाले इस समय के समय, ऐल सीरत की आकाशगंगा के बीच एराम की सेना के आ जाने से शहर की परिस्थिति अत्यंत दुर्दशाजनक हो गई थी। नगर के लोग भूख से मर रहे थे, और सैनिकों के समझदार विकल्पों के बजाय भय और निराशा विचार कर रहे थे। इस पंक्ति में चार वीरों की चर्चा है—चार लैडब्लेड-अपके लोग किन्तु जाएँ या रहें, दोनों परिस्थितियाँ मौत के समान लगती हैं।
मुख्य संदेश
यह पद स्पष्ट करता है कि डर और विवेक के बीच संतुलन कहाँ बनता है। चारनो ने असुरक्षा से भरे विचारों के बावजूद एक साहसपूर्ण, परामर्शयुक्त निर्णय किया—यदि नगर जाएँ तो मौत निश्चित, और यदि यहीं रहें तो भी मृत्यु। अतः उन्होंने परमेश्वर पर भरोसा बनाये रखना और व्यवस्था की स्थिति को ईश्वर तक पहुँचाने का प्रयास किया। परिणामस्वरूप ईश्वर ने चारों की आशाओं को उलट कर एक अपूर्व मदद भेजी।
नीतिगत थीम्स और सम्बन्ध
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका संक्षेप
• अभिन्न विश्वास के लिए: बहुधा भविष्य अंधकारमय लग सकता है, पर परमेश्वर की उपलब्धि अज्ञात उपायों से भी प्राप्त होती है।
• प्रेरणादायक दिशा: रोगियों के बीच आशा बनाए रखना, कठिन समय में भी ईश्वर-पराधीनता बनाए रखना आवश्यक है।
• प्रत्यक्ष सहायता: संकट के समय में ईश्वर की कृपा से अचानक सहायता मिलती है, जो डर को दूर करती है।
पढ़ना-देवotional विचार
जीवन के कठिन क्षणों में पुत्र-निष्ठा और भरोसा एक दूसरे के साथ चलते हैं। चारों के सामने जो रास्ता था, उसे उन्होंने भय के बजाय विश्वास के साथ पहचाना। यदि आप भी किसी गहरे संकट से गुजर रहे हों, तो इस पवित्र पाठ से सीखें कि परमेश्वर के साथ जाने वाले कदम अक्सर भय के बावजूद मार्ग बनाते हैं—यही आपका जीवन-दर्शन बने।
नोट: मौलिक योगदान और उद्धरण
यह व्याख्या सार्वजनिक-डायरेक्ट Commentary से प्रेरित विचारों का समन्वय है, जिसमें Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सामान्य सिद्धांतों का उपयोग किया गया है। अगर किसी विशिष्ट उद्धरण का उल्लेख किया गया हो, तो वह इस खंड में संक्षेप में उद्धृत किया गया है।
संक्षिप्त संरचना
1) संकट का चित्रण; 2) चारों वीरों का निर्णय-निर्माण; 3) परमेश्वर की कृपा से उद्धार; 4) आज के लिए संदेश