Old Testament
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2 राजाओं 7:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अतः उसके साथ ठीक वैसा ही हुआ, अतएव वह फाटक में लोगों के पाँवों के नीचे दबकर मर गया।
2 राजाओं 7:20 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 राजाओं 7:20 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गिनती 20:12 (HINIRV) »
परन्तु मूसा और हारून से यहोवा ने कहा, “तुमने जो मुझ पर विश्वास नहीं किया, और मुझे इस्राएलियों की दृष्टि में पवित्र नहीं ठहराया, इसलिए तुम इस मण्डली को उस देश में पहुँचाने न पाओगे जिसे मैंने उन्हें दिया है।”

2 इतिहास 20:20 (HINIRV) »
वे सवेरे उठकर तकोआ के जंगल की ओर निकल गए; और चलते समय यहोशापात ने खड़े होकर कहा, “हे यहूदियों, हे यरूशलेम के निवासियों, मेरी सुनो, अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास रखो, तब तुम स्थिर रहोगे; उसके नबियों पर विश्वास करो, तब तुम कृतार्थ हो जाओगे।”

अय्यूब 20:23 (HINIRV) »
ऐसा होगा, कि उसका पेट भरने पर होगा, परमेश्वर अपना क्रोध उस पर भड़काएगा, और रोटी खाने के समय वह उस पर पड़ेगा।
सीधे अर्थ का बयान
2 राजाओं 7:20 में कहा गया है कि मृत्यु के यह दृश्य एक ही समय में हुआ: न होने पर कोई रुक नहीं पाया, और नाचीज़ भूखा नगर दयालु रहा; बल्कि अति अभिमान और घबराहट के कारण जो लोग खड़े थे, वे सब उसी फाटक में मर गए; यह दैवी आदेश से घिरा भाग्य था।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
अर्थ—सीन-काशान के संदर्भ में लागू हुआ जब घोड़े और चोरों से घिरा नगर अत्यंत भयभीत था। एशोर के सैनिकों के भागने के पश्चात भी आंतरिक अराजकता और भय ने नगरवासियों को असहाय बना दिया। यह घटना दिखाती है कि परमेश्वर के निर्णय तात्कालिक होते हैं, और तात्कालिक परिणाम भय और अवरोधों के बावजूद आते हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
महत्वपूर्ण विचार
1) भय और भागीदारी: फाटक के पास खड़े लोग उतने ही भागीदार थे जितने युद्ध की घटनाओं के घोड़े थे; हर एक ने अपने भरोसे को बनाए रखा।
2) क़ानून और दया: सरकार और नगर-प्रशासन के भीतर अनुशासन की कमी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।
3) परमेश्वर की समयसूची: जो कुछ घट रहा है, वह उसकी निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार है—न तत्काल, न देर से हट सकता है।
संबद्ध आयतें (क्रॉस-रेफरेंसेस)
- ईश्वर के निर्णय के तात्कालिक और स्पष्ट होने पर ध्यान दें: कुछ स्थानों पर लोग तत्काल निर्णय लेते हैं; परन्तु परमेश्वर के उपाय समय पर आते हैं।
- उद्धार की उम्मीद बनाये रखना: भय के बीच भी परमेश्वर की मदद की आशा शेष रहती है, भले ही परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
जीवन में अचानक आने वाली विपत्तियों से डरना आसान है, पर हमें परमेश्वर के उद्धार की उम्मीद बनाए रखनी चाहिए। अंधकार में भी उसकी योजना पूरी हो सकती है, यदि हम विश्वास के साथ आगे बढ़ें और अपने भीतर के भय को नियंत्रित करें।