Old Testament
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2 राजाओं 7:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जब वे कोढ़ी छावनी की छोर के डेरों के पास पहुँचे, तब एक डेरे में घुसकर खाया पिया, और उसमें से चाँदी, सोना और वस्त्र ले जाकर छिपा रखा; फिर लौटकर दूसरे डेरे में घुस गए और उसमें से भी ले जाकर छिपा रखा।
2 राजाओं 7:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 राजाओं 7:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 7:21 (HINIRV) »
कि जब मुझे लूट में बाबेल देश का एक सुन्दर ओढ़ना, और दो सौ शेकेल चाँदी, और पचास शेकेल सोने की एक ईंट देख पड़ी, तब मैंने उनका लालच करके उन्हें रख लिया; वे मेरे डेरे के भीतर भूमि में गड़े हैं, और सब के नीचे चाँदी है।”

2 राजाओं 5:24 (HINIRV) »
जब वह टीले के पास पहुँचा, तब उसने उन वस्तुओं को उनसे लेकर घर में रख दिया, और उन मनुष्यों को विदा किया, और वे चले गए।

यिर्मयाह 41:8 (HINIRV) »
परन्तु उनमें से दस मनुष्य इश्माएल से कहने लगे, “हमको न मार; क्योंकि हमारे पास मैदान में रखा हुआ गेहूँ, जौ, तेल और मधु है।” इसलिए उसने उन्हें छोड़ दिया और उनके भाइयों के साथ नहीं मारा।
सेवा और चतुराई के बीच निर्णय
इस पद का सीधा अर्थ है: जब सैनिकों के पास भूख और भय बढ़ गया और चारों ओर आशा घट गई, तब यह कोढ़ी मित्रों की रणनीति उनके लिए नए रास्ते खोल देती है—उन्होंने सोचा कि यदि वे रोटी-खाने के लिए भीतर प्रवेश कर सकें और फिर बच निकलें, तो शहर के लिए भी उसी मार्ग से राहत मिल सकती है।"यहाँ भाग-दरभागी के बजाय, परिस्थितियों के तात्कालिक लाभ के प्रति उनकी व्यावहारिक चतुराई स्पष्ट है।
पार्श्वभूमि और संदर्भ
2 राजाओं 7 अध्याय में सातों वर्षों की घेराबंदी के बाद समराई के पड़ोस में फैली भूख और निराशा का चित्र है। एलाकिम के सेनापतियों की रणनीति असफल हो चुकी है; शहर के भीतर जीवन-मरण का प्रश्न है। ऐसी स्थिति में जो भी चमत्कार था, वह अल्लाह के द्वारा हुआ; किन्तु यहाँ कोढ़ी पुरुषों की चालाकी का प्रभाव दिखता है कि किस प्रकार आवश्यकताओं ने उन्हें जोखिम उठाने को प्रेरित किया।
व्याख्यात्मक विचार
सम्बद्ध आयतें और संक्षिप्त व्याख्या
उसी घटना से जुड़ी कुछ अन्य पनाहें:
कथा-शास्त्रीय दृष्टिकोण (Cross-References)
संकेत देता है कि संकट के समय किन मार्गों पर आशीर्वाद मिल सकता है:
संक्षिप्त व्यावहारिक takeaway
संकट के समय में विवेकपूर्वक कदम उठाने में भय रहता है, परन्तु यह भी सत्य है कि परमेश्वर की कृपा से ही असंभव संभव हो सकता है। यह पाठ हमें यह सिखाता है कि आवश्यकता के समय उचित निर्णय लेते हुए, परमेश্বর के नियोजन के प्रति विश्वास बनाए रखना चाहिए—कभी-कभी हमारा धैर्य और चतुराई मिलकर बड़े बड़े परिवर्तन ला देती है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (Public-domain टिप्पणीकारों से)
यहां कुछ सार्वजनिक-डomain टिप्पणीकारों के सार-संक्षेप स्वरूप विचार शामिल हैं:
मैथ्यू हेनरी से संक्षिप्त धारणा: “यदि किसी समय देरी का लाभ उठाकर ದೇವता का साधन होता है, तो वह भी उचित है; ताकि लोगों को आशीष मिले।” (सम्भव शब्द-सार)
एलबर्ट बार्न्स से संक्षिप्त टिप्पणी: “चालाकी और धैर्य एक साथ चलती है—पर निस्संदेह परमेश्वर की योजना सबसे ऊँची है।”
एडम क्लार्क से संक्षिप्त निष्कर्ष: “कठिन परिस्थितियों में मानवीय निर्णय और ईश्वर की योजना एक साथ चलती है।”