Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 14:1 निर्गमन 14:2 निर्गमन 14:3 निर्गमन 14:4 निर्गमन 14:5 निर्गमन 14:6 निर्गमन 14:7 निर्गमन 14:8 निर्गमन 14:9 निर्गमन 14:10 निर्गमन 14:11 निर्गमन 14:12 निर्गमन 14:13 निर्गमन 14:14 निर्गमन 14:15 निर्गमन 14:16 निर्गमन 14:17 निर्गमन 14:18 निर्गमन 14:19 निर्गमन 14:20 निर्गमन 14:21 निर्गमन 14:22 निर्गमन 14:23 निर्गमन 14:24 निर्गमन 14:25 निर्गमन 14:26 निर्गमन 14:27 निर्गमन 14:28 निर्गमन 14:29 निर्गमन 14:30 निर्गमन 14:31



निर्गमन 14:16 का अर्थ
यहोशय ईश्वरीय क्रिया के माध्यम से यह संदेश देता है: परमेश्वर की शक्ति से निर्बलता दूर होती है; दृढ़ विश्वास पर उसका हाथ-साथ चलता है और मार्ग खुलते हैं। लाठी उठाने का निर्देश दिखाता है कि भक्त के कदम से नहीं, बल्कि परमेश्वर की सत्ता से शत्रु पर विजय संभव है।
संदर्भण और पृष्ठभूमि
इसहाक, याकूब के वंशज इस्राएलियों की दशा मिस्र की गुलामी के समय से निकट थी। पवित्र पवित्रता के क्रम में परमेश्वर ने मूसे को संदेश दिया कि वह समुद्र के किनारे खड़े हो और लाठी उठाकर आगे बढ़े। यह घटना तब होती है जब मिस्र के सैनिक पीछा करते हैं, और ईश्वर की महिमा दिखाने के लिए समुद्र भाग जाता है, ताकि इस्राएली बिना लड़ाई के बच निकलें।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमात्मक सार
क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संकेतित परिणाम के साथ)
1) यशायाह 43:16-19: नया मार्ग बनना—ईश्वर पुराने रास्तों की परवाह नहीं करते; वे नया रास्ता खोलते हैं। यह पाठ इस घटना के दौरान पारंपरिक रास्तों से हटकर परमेश्वर की योजना की महत्वता दिखाता है।
2) महिलाओं और पुरुषों के विश्वास के लिए भी प्रेरणा: वे लोग जिन्हें धर्मी-विश्वास ने प्रेरित किया, वे कठिन समय में भी भरोसे के पक्के मार्ग देखते हैं।
3) समय की परीक्षा: कठिनाई में ईश्वर के दर्शन से ही उद्धार संभव है; यह पाठ हमें अस्थिर समय में स्थिर विश्वास रखना सिखाता है।
छोटा व्यावहारिक निष्कर्ष
जब रास्ता स्पष्ट न दिखे, तब भी ईश्वर के निर्देश पर टिके रहें। साहसपूर्वक कदम उठाएं, क्योंकि परामर्श वही देता है जो परमेश्वर का आदेश मानता है।
नोट्स
नीचे उद्धृत तीन स्रोत—मैथ्यू हेनरी, अर्बन Barnes और एडम क्लार्क—के छोटे स्पष्ट उद्धरण संदर्भित रूप में संदर्भित हैं, ताकि पाठ की गहराई समझने में मदद मिले, परन्तु पूर्ण पाठ नहीं दिया गया है।
उद्धरण संकेत: “Matthew Henry”, “Albert Barnes”, “Adam Clarke”—यदि उपलब्ध हों तो छोटे-उद्धरण उसी पंक्ति में सीधे उद्धृत किए जा सकते हैं।