निर्गमन 14:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब मैं फ़िरौन के मन को कठोर कर दूँगा, और वह उनका पीछा करेगा, तब फ़िरौन और उसकी सारी सेना के द्वारा मेरी महिमा होगी; और मिस्री जान लेंगे कि मैं यहोवा हूँ।” और उन्होंने वैसा ही किया।

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निर्गमन 14:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

निर्गमन 14:4 का अर्थ

इस वचन में परमेश्वर बताता है कि कैसे मिस्रियों के पीछे पैर से पीछा करने के समय, यहूदी नीति-सम्पादन वह उद्देश्य है कि मिस्रियों के विश्वास के सामने परमेश्वर की महिमा खुले रूप से प्रकट हो। परमेश्वर कहता है कि वह फिरौन के मन को कठोर कर देगा ताकि वह उनके पीछे चले और परिणामस्वरूप यह घटना उसकी महिमा को दर्शाए—यानी यह शोभायमान प्रमाण कि यहोवा ही सच्चा परमेश्वर है।

संदर्भ-पृष्ठभूमि

यद्यपि मोशे रिवायत के अनुसार यहोवा ने फिरौन के मन को बारम्बार कठोर किया, तब भी वह परमेश्वर के चमत्कारिक वाचा-उद्धार के लिए निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यह घटनाक्रम निकल-निकल कर यहूदी लोग को मिस्र की दासता से मुक्त कराने की दिशा में है। अब रात के समय किनारों पर मरुस्थली किनारों के पास, समुद्र का रास्ता खुलता है और यहूदियों को सुरक्षित पार उतारने के बाद मिस्रियों का पीछा किया जाता है।

interpretive observations

  • परमेश्वर की महिमा: इस पाठ में परमेश्वर की महिमा दिखती है क्योंकि वह उसी स्पष्ट कारण से उद्धार देते हैं ताकि अन्य राष्ट्र भी यह जान लें कि यहोवा ही भगवान है।
  • कठोर निर्णय, आशीर्वाद और परीक्षा: फिरौन का मन कठोर होना एक ऐसे परीक्षण के रूप में है जो परमेश्वर के उद्देश्य को पूरा करता है—उद्धार के साथ-साथ डिग्री-परिणामों की परीक्षा भी दिखाई देती है।
  • आस्था बनाम भय: मार्ग के दौरान लोगों का विश्वास और भय दोनों दृष्टिगोचर होते हैं; परमेश्वर ने जहाँ मार्ग खोल दिया, वहीं भय भी पहले से बढ़ गया।

छोटा थिमाटिक सूची

  1. परमेश्वर की महिमा घोषित होना
  2. दासता से उद्धार की मार्गरेखा
  3. विश्वास और आज्ञा दोनों की परीक्षा

क्रॉस-रेफरेंसे

1) यशायाह 43:12-13 — देव-उद्धार की पुनः पुष्टि और उसकी महिमा पर बल। नोट: परामर्श देता है कि उद्धार कृतियाँ परमेश्वर के लिए ही शोभायमान हैं; वह किसी अन्य से कम नहीं है।

2) תהilos 4:5 — विश्वसनीयता और प्रभु की महिमा के कारण न कि खुद के लिये डर। नोट: यह उद्धार का प्रेरित संदर्भ है कि परमेश्वर अपने नाम के कारण कार्य करते हैं।

3) इसेरो 9:17 — परमेश्वर के निर्णयों की प्रेरणा उनकी महिमा के लिए है, भले मनुष्यों को असुविधा हो।

संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष

- दुख-सुख में भी परमेश्वर का उद्देश्य स्पष्ट रहता है: उसकी महिमा और उद्धार के लक्ष्य सबसे पहले।

- कठिन समय में भी परमेश्वर में आस्था बनाये रखना चाहिए क्योंकि वह रास्ता बनाकर देता है, भले अभी कठिनाई क्यों न हो।

इस पंक्ति के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से संक्षिप्त उद्धरण (जहाँ उपलब्ध):

- “God will harden Pharaoh's heart, that I might show my power in thee” — यह thought उनका चर्चित भाव है कि उद्धार के लिए परमेश्वर की महिमा सर्वोपरि है।

कुल मिलाकर, निर्गमन 14:4 यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने उद्देश्य के अनुसार घटनाओं को संचालित करता है ताकि सभी देखें कि वह यहोवा है—सत्य, शक्ति और उद्धार का स्रोत।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

निर्गमन 14:4 समानांतर पद और संबंधित वचन

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कि परमेश्‍वर ने अपना क्रोध दिखाने और अपनी सामर्थ्य प्रगट करने की इच्छा से क्रोध के बरतनों की, जो विनाश के लिये तैयार किए गए थे बड़े धीरज से सही। (नीति. 16:4)

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क्योंकि पवित्रशास्त्र में फ़िरौन से कहा गया, “मैंने तुझे इसलिए खड़ा किया है, कि तुझ में अपनी सामर्थ्य दिखाऊँ, और मेरे नाम का प्रचार सारी पृथ्वी पर हो।” (निर्ग. 9:16)

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और जब मैं मिस्र पर हाथ बढ़ा कर इस्राएलियों को उनके बीच से निकालूँगा तब मिस्री जान लेंगे, कि मैं यहोवा हूँ।”

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