Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 20:1 निर्गमन 20:2 निर्गमन 20:3 निर्गमन 20:4 निर्गमन 20:5 निर्गमन 20:6 निर्गमन 20:7 निर्गमन 20:8 निर्गमन 20:9 निर्गमन 20:10 निर्गमन 20:11 निर्गमन 20:12 निर्गमन 20:13 निर्गमन 20:14 निर्गमन 20:15 निर्गमन 20:16 निर्गमन 20:17 निर्गमन 20:18 निर्गमन 20:19 निर्गमन 20:20 निर्गमन 20:21 निर्गमन 20:22 निर्गमन 20:23 निर्गमन 20:24 निर्गमन 20:25 निर्गमन 20:26



निर्गमन 20:11 पर टिप्पणी — विश्राम की पवित्र अवधि का सार
मुख्य बिंदु: परमेश्वर ने छह दिनों में निर्माण किया और सातवें दिन विश्राम किया, जिससे विश्राम दिन को आशीषित और पवित्र ठहराने का आधिकारिक अधिकार मानवीय जीवन में स्थिर हुआ। यहूदियों के साथ-साथ हमारे लिए भी विश्राम की महिमा और धार्मिक-नैतिकता का आधार बनती है।
साहित्यिक संदर्भ ( literary context )
यह आयत दो भागों में शक्तिशाली सिनेमाई संरचना में आती है: आदिशास्त्र का उद्घोष— Creation का विशाल चक्र, और विश्राम का उद्घोष— दिव्य आशीष और पवित्र ठहराव। कृत्य का स्वर परमेश्वर की संहिता-शासन की पुष्टि है: दिन-रात के क्रम के बीच विश्राम एक दिव्यता-सम्बन्धी चेतावनी है कि संसार अपने आप नहीं चलता; परमेश्वर का विराम-उद्घोषणा उसकी sovereignty और व्यवस्था बताती है।
धार्मिक-तत्त्व (Theological significance)
- विश्राम केवल एक श्रम-विराम नहीं, बल्कि परमेश्वर की सृष्टि-उद्धार योजना का पवित्र संकेत है।
— यहूदी कर्म-विधि में शाब्दिक विश्राम के साथ-साथ आध्यात्मिक विश्राम का विश्वास जुड़ता है: हमें भरोसा है कि ईश्वर ने ग्रह-नागरिक जीवन को एक संरचित ढांचे में बाँधा है।
— पवित्र दिन को ‘आशीषित’ और ‘पवित्र’ ठहराने से यह निष्कर्ष मिलता है कि समय भी पवित्र है जब वह परमेश्वर के साथ जोड़ा जाए; यह इंसानी जीवन की दैनंदिनताओं में ईश्वर-साक्षात्कार का अवसर है।
अन्यग्रंथों के साथ संबंध (Cross-references)
संक्षेप में, विश्राम दिन का पवित्र ठहराव मानवीय जीवन के लिए एक प्रशिक्षण है— ईश्वर के निर्देशों के अनुरूप काम और विश्राम के संतुलन के साथ आने वाला आशीर्वाद।
प्रश्न-चिंतन (Reflection prompts)
संक्षेप निष्कर्ष
निर्गमन 20:11 में विश्राम दिन की स्थापना एक सार्वभौमिक नियम बन गई है: यह केवल कार्य के विराम का ही संकेत नहीं, बल्कि ईश्वर के समग्र शासन और पवित्रता से जीवन के हर क्षेत्र के संचलन को जोड़ने वाला सिद्धांत है। सातवें दिन की आशीष और पवित्रता परमेश्वर की पूर्णता और सुरक्षा का प्रतीक है, जिसे हर अत्याचार-युग में हमारी आत्मा को नवीन बनाकर रखता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से सटीक संक्षेप उद्धरण यदि उपलब्ध):
— "Fields are blessed by time and order; so is man’s life when he rests in the Lord’s order." (उद्धरण का सार; नीचे के टिप्पणीकारों के विचारों से समन्वयित)
नोट: नीचे दिए गए उद्धरण यदि उपलब्ध हों तो स्पष्ट उद्धरण के रूप में हैं; अन्यथा इन प्रवचनों के विचार संक्षेपित रूप में समाहित हैं।