निर्गमन 20:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“तू अपने परमेश्‍वर का नाम व्यर्थ न लेना; क्योंकि जो यहोवा का नाम व्यर्थ ले वह उसको निर्दोष न ठहराएगा।

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निर्गमन 20:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

निर्गमन 20:7 — परमेश्वर के नाम को व्यर्थ न लेना

सीधे शब्दार्थ अर्थ: जो बातें परमेश्वर के नाम को व्यर्थ में लेना या अपमानजनक न मानना; परमेश्वर के नाम के सम्मान, पवित्रता और डर को बनाये रखना अनिवार्य है। जो उसे व्यर्थ कहेगा, वह उसे निर्दोष नहीं ठहराया जाएगा।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह दाय-संहिता का चौथा उपदेश है, जो ईश्वर अपनी जनजाति ישראל에게 दे रहा है। परमेश्वर के नाम का सम्मान एक सामाजिक और धार्मिक आचार संहिता है; यह न केवल व्यक्तिगत पाप है, बल्कि समाज में न्याय और साक्ष्य-विश्वास पर चोट करता है। व्यर्थ से अभिप्राय है बिना कारण, महिमामण्डन के साथ या झूठे संकल्पों में उसका नाम लेना, या किसी दावे को उसकी प्रतिष्ठा से जोड़कर गलत अर्थ निकालना।

व्याख्यात्मक अवलोकन

- परमेश्वर का नाम पवित्र है; उसकी महानता और सच्चाई को घृणा या उपहास से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

- यह नियम केवल धार्मिक औपचारिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि आचरण, भाषा, और निर्णय-प्रक्रिया में परमेश्वर के प्रति ईमानदारी और सत्यता की मांग करता है।

- यह न्याय के साथ जुड़ा है: जो नाम को व्यर्थ लेगा, उसकी शिक्षा-प्रतिष्ठा पर असर पड़ेगा; परमेश्वर उस व्यवहार की कीमत दे देगा।

महत्वपूर्ण निष्कर्ष (संक्षेप)

  • परमेश्वर के नाम की पवित्रता बनाये रखना।
  • भाषा और संकल्पों में सावधानी, झूठ या छल से बचना।
  • कायर्कारी आचरण से उसके नाम की महिमा बढ़ाना।

अनुक्रमिक क्रॉस-रेफरेंसे

1) यशायाह 42:8 — ईश्वर स्वयं को निरपेक्ष और एकमात्र उद्धारक के रूप में प्रतिष्ठित करते हैं; उनका नाम किसी अज्ञात देवता के साथ तुलना नहीं की जा सकती।

2) मत्ती 6:9-10 — प्रभु यीशु ने प्रेरितों को नम्रता से प्रार्थना सिखायी: 'हमारा पिता,' जिससे नाम पवित्र किया जाए; यह क्रम परमेश्वर के नाम के सम्मान की जागरूकता को बढ़ाता है।

3) फिलिप्पियों 2:9-11 — नाम के सत्यापन की उत्कटता, जहाँ हर घुटना परमेश्वर के नाम के आगे झुकता है; नाम की महिमा की पवित्रता को पुनः स्थिर करता है।

इन संदर्भों में स्पष्ट होता है कि परमेश्वर का नाम आदर और सत्य के साथ जुड़ा है, और हमारी भाषा-आचरण उसे सम्मानित करने की कसौटी बनते हैं।

पकड़ने योग्य व्यावहारिक सीख

जब भी हम किसी प्रतिज्ञा, संकल्प या खुशी को व्यक्त करें, तो ध्यान दें कि हम परमेश्वर के नाम को किसी ढोंग, जादू, या स्वार्थ-लाभ के साथ न जोड़ें। अपने वचन और कार्यों में सचाई, इमानदारी और विनम्रता बनाए रखें ताकि हमारा जीवन परमेश्वर के नाम की महिमा करे।

पक्का संदर्भ-नोट

यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी-रचनाओं से प्रेरित संयुक्त भावना को एकीकृत करते हुए बनी है; इनमें से किसी भी स्पष्ट उद्धरण को यहाँ छोटा किया गया है ताकि मूल पाठ की गरिमा बनी रहे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

निर्गमन 20:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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व्यवस्थाविवरण 5:11 (HINIRV) »
'तू अपने परमेश्‍वर यहोवा का नाम व्यर्थ न लेना; क्योंकि जो यहोवा का नाम व्यर्थ ले वह उनको निर्दोष न ठहराएगा। (मत्ती 5:33)

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लैव्यव्यवस्था 19:12 (HINIRV) »
तुम मेरे नाम की झूठी शपथ खाके अपने परमेश्‍वर का नाम अपवित्र न ठहराना; मैं यहोवा हूँ। (मत्ती 5:33)

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याकूब 5:12 (HINIRV) »
पर हे मेरे भाइयों, सबसे श्रेष्ठ बात यह है, कि शपथ न खाना; न स्वर्ग की न पृथ्वी की, न किसी और वस्तु की, पर तुम्हारी बातचीत हाँ की हाँ, और नहीं की नहीं हो, कि तुम दण्ड के योग्य न ठहरो।

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