निर्गमन 20:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“तू व्यभिचार न करना।

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निर्गमन 20:14 पद-दर-पद बाइबल टीका

निर्गमन 20:14 का अर्थ और मानक व्याख्या

सीधे शब्दों में इसका अर्थ है: “तू व्यभिचार न करना।” यह आदेश परमेश्वर का एक नैतिक कानून है जो वैवाहिक निष्पक्षता, निष्ठा और परिवार की सुरक्षा को केंद्र में रखता है। यह केवल शारीरिक अनाचार तक सीमित नहीं, बल्कि किसी अन्य के विवाह-पात्र के प्रति अचेत चेतना या विचारों के अपवर्तन को भी रोकने की आह्वान है, ताकि पवित्रता और निष्ठा की संस्कृति बनी रहे।

पृष्ठभूमि और परिप्रेक्ष्य

निर्गमन 20 में देहिक और नैतिक आचरण के दस निर्देश दिए गए हैं, जिन्हें लोग यहूदी-जाति के बीच मोशे की कानूनी व्यवस्था के भाग के रूप में मानते हैं। यह नियम विवाह को सम्मानित और पारिवारिक जीवन को संरक्षित करने के उद्देश्य से है। व्यभिचार के निषेध से सामाजिक मेल-जोल, परिवार के संयुक्त जीवन और ईश्वर-भक्ति के मार्ग में विश्वासघात के जोखिम को कम किया गया है।

व्याख्यात्मक अवलोकन

– यह आदेश स्पष्ट रूप से वैवाहिक प्रतिबद्धता की पवित्रता को बनाए रखने की माँग करता है। इसके कारण व्यक्ति के भीतर भ्रातृभाव और सम्मान की भावना बलवान हो, जिससे समाज के अन्य मानक भी स्थिर रहें।

– व्यर्थ आकर्षण, चोरी, या भौतिक लालच से ऊपर उठकर, यह आदेश व्यक्ति-परिवार-समाज सभी की सुरक्षा चाहता है।

मुख्य विचार और संक्षिप्त सूची

  • वैवाहिक प्रतिबद्धता की प्रतिष्ठा: यह एक विवाहित जोड़े के बीच विश्वास की नींव है।
  • मन की पवित्रता: केवल कृत्य नहीं, विचार और इरादे भी महत्वपूर्ण मांगे जाते हैं।
  • समाजीय सुरक्षा: विश्वासघात से बच्चों और परिवार पर पड़ने वाले प्रभाव से बचना।

अनुषंगिक संदर्भ और संक्षिप्त व्याख्या

1) भजन 51:6 में आत्मा के भीतर पवित्रता की मांग पर बल दिया गया है—यही पवित्रता बाह्य आचरण को प्रेरित करती है।

2) मत्ती 5:28 में योहानाकारी ने कहा है कि जो मन में ही व्यभिचार के विचार लाता है, वह भी दोषी ठहराया जाएगा; यह सीमाओं के पार विचारों पर भी नैतिक जवाबदेही को दर्शाता है।

3) मेलख-तत्व पवित्रता के लिए न्यूनीकरण की प्रेरणा देता है कि संसारिक आकर्षण पर नियंत्रण रखा जाए, ताकि पारिवारिक संबंध ठोस रहें।

मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क से सार साक्षात्कार

– मैथ्यू हेनरी: यह आदेश सामान्य जीवन के लिए एक सामान्य नैतिक नियम है, जो व्यक्तिगत पवित्रता को सामाजिक स्थिरता से जोड़ता है।

– एलबर्ट बार्न्स: विवाह के मान के प्रति सम्मान और पवित्रता के आचरण को नैतिक कानून का प्रधान भाग मानते हैं, ताकि पवित्रता के साथ जीवन चले।

– एडम क्लार्क: यह निर्देश दिखाता है कि ईश्वर के कानून के अनुसार मन और काम दोनों की शुद्धता आवश्यक है, ताकि भौतिक और आध्यात्मिक जीवन सुचारु रहे।

संघटक निष्कर्ष

तब तक जब तक द्वार खुले हैं, व्यभिचार के जोखिम बने रहते हैं; परन्तु ईश्वर के आदेश से सुरक्षित रहने का मार्ग स्पष्ट है—पत्नी/पति के प्रति स्थिर और निष्ठा-भरा प्रेम, विचारों और कर्मों की पवित्रता, और सामाजिक-नैतिक संरचना की रक्षा।

सीधा, छोटा takeaway

यही नियम वैवाहिक जीवन की सुरक्षा और सामाजिक शांति के लिए एक मजबूत आधार है: न केवल बाहरी आचरण, बल्कि भीतर के विचार भी पवित्र रहें।

क्रॉस-रेफरंस

– यदि आप यह verse अन्य स्रोतों के साथ देखना चाहें, तो नीचे दिए गए संदर्भ देखें: भजन 51:6; मत्ती 5:28; इफिसियों 5:3। इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि पवित्रता केवल कर्तव्य नहीं, भगवान के आत्मिक मानक का हिस्सा है।

नोट: इस पंक्ति के लिए नीचे उद्धृतेड पूर्व-लेखकियों से छोटा सार-वाक्य शामिल किया गया है; कोई पूर्ण वाक्य-वाक्य उद्धरण नहीं दिया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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