Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 6:1 निर्गमन 6:2 निर्गमन 6:3 निर्गमन 6:4 निर्गमन 6:5 निर्गमन 6:6 निर्गमन 6:7 निर्गमन 6:8 निर्गमन 6:9 निर्गमन 6:10 निर्गमन 6:11 निर्गमन 6:12 निर्गमन 6:13 निर्गमन 6:14 निर्गमन 6:15 निर्गमन 6:16 निर्गमन 6:17 निर्गमन 6:18 निर्गमन 6:19 निर्गमन 6:20 निर्गमन 6:21 निर्गमन 6:22 निर्गमन 6:23 निर्गमन 6:24 निर्गमन 6:25 निर्गमन 6:26 निर्गमन 6:27 निर्गमन 6:28 निर्गमन 6:29 निर्गमन 6:30



निर्गमन 6:13 का संदर्भ और प्रवेश
इस पद में परमेश्वर मूसा और हारून के माध्यम से इस्राएलियों के उद्धार का उद्देश्य स्पष्ट कर रहे हैं और फ़िरौन के समक्ष अपने लोगों को लिये जाने का निर्देश दे रहे हैं। पहले अध्यायों में दया-नियोजना की चेतावनी के बाद अब इस अभिप्राय से कहा गया है कि इस्राएलियों को मिस्र देश से निकाल लिया जाए। यह आदेश मोशे और हारून की नियुक्ति का मंच बनता है, ताकि पैग़ाम-उद्धार का क्रम शुरू हो सके और वाचा के अनुसार दासता से मुक्ति मिल सके।
मुख्य अर्थ (Central Meaning)
यह verse परमेश्वर की बचाने की योजना का एक निर्णायक चरण है। अस्पष्टता नहीं रहती कि उद्धार का कारण और लक्ष्य क्या है: वह अपने चेलों के माध्यम से उनके लिए देश-काल के बंधनों से मुक्ति देना चाहते हैं। इस अभिप्राय में परमेश्वर अपने लोगों को उनकी पहचान के साथ जीने के लिए स्वतंत्रता प्रदान करना चाहते हैं, ताकि वे परमेश्वर की उपस्थिति में ईश्वर-जीवन की यात्रा कर सकें।
मुख्य विषय (Key Themes)
संबद्ध पदों की दिशा-निर्देश (Related Passages)
1) निर्गमन 3:10-12 —.moSHA-हारेन की नियुक्ति से पहले यह कहने पर कि यहोवा उन्हें मिस्र से बुला रहा है; विश्वास और रिकॉर्ड की शुरुआत।
2) निर्गमन 7:1-2 — परमेश्वर मूसा को पौ-शक्ति के साथ संदेश देता है कि वे बोलें; उनकी भूमिका स्पष्ट होती है।
3) निर्गमन 12:31-32 — शेषता, मुक्तिकामना और बच्चों के लिए उत्पन्न होने वाले उत्सव के पूर्व, उद्धार की संकल्पना की पूर्णता की दिशा।
व्यावहारिक विचार (Practical Reflection)
हम किन क्षणों में यह सीख लेते हैं कि परमेश्वर की योजना में अपने जीवन के उद्धार के लिए तैयार रहना है? विश्वासियों के लिए यह याद दिलाता है कि दासता—चाहे वह भय, अपराध-बोध, या सामाजिक दबाव हो—ग़लत निर्णयों को रोकता है। परमेश्वर अपने लोगे के लिए liberation का मार्ग खोलते हैं, पर हमें अपनी आस्था, आज्ञा-पालन और सहकार्य में संतुलन बनाकर चलते रहना होगा।
संयुक्त सार (Unified Summary)
निर्गमन 6:13 एक उद्घोषणा है: यहोवा मूसा और हारून को इस्राएलियों और मिस्र के राजा फ़िरौन के लिए आज्ञा देते हैं कि वे देश से निकल जाएँ। यह निर्देश उद्धार की स्पष्ट योजना का हिस्सा है—परमेश्वर अपने लोगे को दासता से मुक्त कर उनके साथ अपने उद्धार-कार्य के लिए एक नया आरम्भ देना चाहते हैं। यह पद, सुरक्षा और विश्वास के मेल से, यह संदेश देता है कि परमेश्वर के कदम पर चलना, कठिन परिस्थितियों में भी, उनकी योजना को साकार करता है।
महत्वपूर्ण उद्धरणों के बारे में
यह पाठ सीधे तौर पर Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शब्दों से उद्धृत नहीं है, किन्तु इन commentators के सामान्य निष्कर्ष इस प्रकार हैं: परमेश्वर की योजना प्रगट होती है जब वह अपने प्रेरितों को भेजता है, और उद्धार तब पूर्ण होता है जब भक्त विश्वास के साथ कदम बढ़ाते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस (Cross-References) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
- निर्गमन 3:10-12: बुलावे और सुरक्षा-प्रमाण—यही प्रक्रिया यहाँ भी शुरू होती है; विश्वास के साथ नेतृत्व स्वीकारना मुख्य है।
- निर्गमन 7:1-2: संदेश और प्रस्तुतिकरण का दायित्व—मूसा और हारून की भूमिका स्पष्ट होती है, बोलना और परमेश्वर के शब्द को संपूर्ण बनाना।
- निर्गमन 12:31-32: मुक्तिकामना के समापन की दिशा—उद्धार की पूर्णता और पालन-योजना हेतु तैयारी।