Old Testament
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निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 6:1 निर्गमन 6:2 निर्गमन 6:3 निर्गमन 6:4 निर्गमन 6:5 निर्गमन 6:6 निर्गमन 6:7 निर्गमन 6:8 निर्गमन 6:9 निर्गमन 6:10 निर्गमन 6:11 निर्गमन 6:12 निर्गमन 6:13 निर्गमन 6:14 निर्गमन 6:15 निर्गमन 6:16 निर्गमन 6:17 निर्गमन 6:18 निर्गमन 6:19 निर्गमन 6:20 निर्गमन 6:21 निर्गमन 6:22 निर्गमन 6:23 निर्गमन 6:24 निर्गमन 6:25 निर्गमन 6:26 निर्गमन 6:27 निर्गमन 6:28 निर्गमन 6:29 निर्गमन 6:30



Reader's Overview
निर्गमन 6:27 एक संयोग नहीं, बल्कि उस काल की परमेश्वर की योजना की एक निर्णायक कड़ी है जिसमें मूसा और हारून ने फ़िरौन के सामने इस्राएलियों को मुक्त कराने का उत्तरदायित्व ग्रहण किया। यह पद हमारे विश्वास और सेवा-आमंत्रण की दिशा दिखाता है: परमेश्वर के बुलावे पर मनुष्यों की जवाबदेही, और परमेश्वर की शक्ति के साथ उसका मार्गदर्शन।
सीख का मुख्य बिंदु (章 के भीतर)
यह verses पुष्टि करते हैं कि मूसा और हारून वही हैं जिन्हें परमेश्वर ने मिस्र से इस्राइलियों को निकालने के लिए चुना था, और वे उसी परमेश्वर की आज्ञा का पालन कर रहे थे। वे फ़िरौन से उद्धार की घोषणा कर रहे थे, यह ज्ञात कराते हुए कि यह कार्य मानव सामर्थ्य से नहीं, बल्कि परमेश्वर के वरदान से होगा।
Verse के भीतर की पहचान: मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस पंक्ति से शिक्षा मिलती है कि परमेश्वर का बुलावा व्यक्ति के आत्म-विश्वास नहीं, बल्कि परमेश्वर की योजना पर निर्भर रहने पर टिकता है। मूसा और हारून ने अपने कर्तव्य को पहचाना और ईश्वर पर भरोसा रखा; परिणामस्वरूप वे मिस्र के समय पर भी सत्य और दया का प्रमाण बन गए।
अन्य बाइबिल अंशों से तुलना
- हब 3-4 में यह विचार उभरता है कि ईश्वर अपने चुने हुए लोगों के माध्यम से महान उद्धार करता है, भले ही कठिनाईयां कितनी भी हों।
- प्रेरितों के कार्य 7:1-2 में पवित्र आत्मा के बुलावे के प्रतिक्रिया के बारे में देखाई देता है कि परमेश्वर कैसे मनुष्यों के कदमों की दिशा निर्धारित करता है।
- निर्गमन 3:10-12 में जिस प्रकार मूसा को बुलावा मिला और उन्होंने परमेश्वर की शक्ति पर भरोसा रखा, वही रेखा यहाँ भी दोहराई जाती है।
व्यावहारिक आवेदन
क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनके संक्षिप्त जोड़
- निर्गमन 3:10-12: परमेश्वर की बुलाहट और साथ में साहस का मूल सिद्धांत।
- हब 3:2-4: ईश्वर के प्रत्यक्ष प्रतिकार और उद्धार की सच्चाई।
- प्रेरितों 7:2-3: परमेश्वर के बुलावे पर व्यक्ति के पलटाव की आवश्यकता।
संयुक्त निष्कर्ष
इसVerse से निकलने वाला संदेश यह है कि ईश्वर अपने चुने हुए लोगों को बुलाते हैं और वे उनकी योजना के अनुसार कदम उठाते हैं। मूसा और हारून का इरादा, परमेश्वर के द्वारा समर्थित था, न कि अपने बलแรง से। हमारे लिए भी यही उदाहरण है: उद्देश्य स्पष्ट हो, परमेश्वर पर निर्भरता बनी रहे, और कर्तव्य-निष्ठा के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
सूक्ष्म उद्धरण (यदि उपलब्ध)
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्वच्छ पवित्र-आधारित टिप्पणीकारों के शब्दों से यदि उपलब्ध हों, तो यहां संक्षेप में उद्धृत किए जाते हैं; पूर्ण पाठ नीचे नहीं दिया गया है।