Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 6:1 निर्गमन 6:2 निर्गमन 6:3 निर्गमन 6:4 निर्गमन 6:5 निर्गमन 6:6 निर्गमन 6:7 निर्गमन 6:8 निर्गमन 6:9 निर्गमन 6:10 निर्गमन 6:11 निर्गमन 6:12 निर्गमन 6:13 निर्गमन 6:14 निर्गमन 6:15 निर्गमन 6:16 निर्गमन 6:17 निर्गमन 6:18 निर्गमन 6:19 निर्गमन 6:20 निर्गमन 6:21 निर्गमन 6:22 निर्गमन 6:23 निर्गमन 6:24 निर्गमन 6:25 निर्गमन 6:26 निर्गमन 6:27 निर्गमन 6:28 निर्गमन 6:29 निर्गमन 6:30



निर्गमन 6:15 का संक्षिप्त परिचय और पाठ-संदर्भ
इस पद में यहूदियों के पूर्वजों के वंश-वृक्ष की योजना को सामने रखा गया है: शेमोन के पुत्र यमूएल, यामीन, ओहद, याकीन, और सोहर; साथ ही कनानी स्त्री का पुत्र शाऊल भी उनके कुल में जुड़ा हुआ था। यह तथ्य, जो कि वंशावली के हिस्से के रूप में दिया गया है, गिनती और पहचान की प्रक्रियाओं को स्पष्ट करता है और यह दर्शाता है कि परमेश्वर ने विश्वासयोग्य लोगों के साथ-साथ ऐसे जड़ों को भी संरक्षित रखा जो भविष्य की घटनाओं में अहम थे।
मुख्य अर्थ और संदर्भ
यहाँ लेखक भविष्य की संस्था के अनुसार इस्राएल के कुल-परिवार के प्रमुखों की सूची देता है ताकि यह जता सके कि किस प्रकार सदस्यों की अलग-अलग पंक्तियाँ एक ही लौ के नीचे एक साथ बढ़ीं। शिमोन के इन प्रमुख पुत्रों के नाम इस बात की पुष्टि करते हैं कि दाऊद की रेखा और मसीह-वंश के कुछ चक्र ऐसे लोगों से व्यवस्थित हुए जो किसी समय कनानी के साथ जुड़े थे। यह एक स्मरण-पत्र है कि परमेश्वर का चुनाव राष्ट्रीय पहचान से ऊपर है और उसकी योजना सभी पथों में सच्ची सत्ता और उद्देश्य रखती है।
मुख्य विषय
अन्य उपयुक्त पार्श्व-उद्धरण (cross-references)
- निर्गमन 12:37-38 के संदर्भ में यह दर्शाता है कि अनेक नयी प्रविष्टियाँ कैसे इस्राएलियों की एकता को प्रभावित करती हैं।
- 1 इतिहास 2:6-8 में दाऊद के वंश के विविध मोड़ दिखते हैं जो परिवारों के मिश्रित भविष्य को दर्शाते हैं।
- रुट 1:16-17 में बाहरी पृष्ठभूमियों के लोगों का ईश्वर-चयन से जुड़ना एक समान धुरी में फिट होता है।
इन संकेतों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के चयन में सामाजिक-वर्णन की सीमाएँ नहीं, बल्कि विश्वास और पालन का महत्व है।
व्यावहारिक दृष्टिकोण
कभी-कभी इतिहास की परतें भिन्न-भिन्न जातीय और सामाजिक पृष्ठभूमियों को साथ लाती हैं। हम भी आज अपनी समुदाय-सम्प्रदायिक जड़ों को स्वीकारते हुए एकता बनाए रखें और यह समझें कि परमेश्वर का उद्देश्य कभी किसी एक समूह तक सीमित नहीं रहता। जिनके विरुद्ध हम पूर्वाग्रह रखते थे, उनमें भी ईश्वर की योजना में स्थान है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
निर्गमन 6:15 एक सरल, परंतु गूढ़ वंश-वृक्षीय सूचि है जो यह दर्शाती है कि परमेश्वर का चुनाव विविधताओं के बीच है और उसकी योजना में हर एक सदस्य की भागीदारी आवश्यक है। यह एक स्मरण देता है कि एक स्थिर पहचान और स्थिर आस्था से ही समुदाय की बाधाओं को पार किया जा सकता है।
निष्कर्षात्मक सार
यमूएल, यामीन, ओहद, याकीन, सोहर और शाऊल—इन सभी नामों के पीछे एक कहानी है: विविध पृष्ठभूमियाँ एक सार्वभौमिक उद्देश्य के लिए इकठ्ठी होती हैं। Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के पारंपरिक टिप्पणियों में भी यही ध्वनि मिलती है कि परमेश्वर की योजनाएं मानव-परिसीमों से ऊपर हैं और विश्वास-सेवा ही दृष्टिकोण है। उनके शब्द: “परमेश्वर जिसे चुनता है, उसे उसकी योजना में स्थान देता है ताकि पूरी संस्था एक साथ सुरक्षित रहे” जैसी सूक्तियाँ इस संदर्भ के साथ क्रियात्मक मिलती हैं।