Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 6:22 के अर्थ का सीधा सार
इस पद में कहा गया है कि उज्जीएल के पुत्र मीशाएल, एलसाफान और सित्री थे। यहां पहचान के क्रम में यह बताता है कि मूसा और हारून के साथ याकूब की गोत्र-परंपरा के अनुसार दाऊदीन परिवार के नहीं, बल्कि हरेकेन-आश्रित जनक थे। सीधे शब्दों में इसका अर्थ है—प्रजा के प्रमुख विभजनों के भीतर किन लोगों की संतानें उन परिवारों से जुड़ी थीं, जिनसे परमेश्वर के चयन-कार्य जुड़ा रहा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
निर्गमन 6 अध्याय मिश्रित राजकीय और पुरोहिती-आयतन का背景 है, जिसमें ईश्वर ने मूसा को मिस्र से निकलने का निर्देश दिया। यहाँ क्रमबद्ध विरासत-सूची बताती है कि याकूब के पुत्रों में से किन-किन नामों को लेकर आगे की गिनती बैठती है। यह विशिष्ट सूची—मीशाएल, एलसाफान और सित्री—याद दिलाती है कि गहरी पहचानें और परिवार-जातियाँ परमेश्वर के योजना-निर्माण में भूमिका निभाती हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
- मीशाएल, एलसाफान और सित्री ये तीन व्यक्ति संदर्भ-आइकन के रूप में दिये गये हैं, जो मूसा के समय के नेतृत्व-परिवार से जुड़े थे।
- यह सूची यह दर्शाती है कि परमेश्वर की योजना एक व्यापक समुदाय के साथ, विविध वंशों के साथ चलती है—कहीं भी अकेले नहीं, बल्कि परिवारों की गिनती और जिम्मेदारियों की संगति के साथ।
थीमेटिक छोटा-सार
अन्य संदर्भ और संक्षेप
यह भाग तेरे-मेहनत से जुड़ी पहचान के साथ अन्यांत्रिक प्रकरणों के साथ जोड़ा जा सकता है, जैसे कि अरनि के वंश-गणना के भाग।
1) मूसा के परिवार के पितृ-जातियाँ: यह सूची बताती है कि नेतृत्व के लिए चयनित परिवार किस क्रम में आते हैं और किस प्रकार उनकी आस्था पारिवारिक धरोहर बनकर बची रहती है।
2) दाऊद और शहीर के प्रसंग: विरासत में मिलता है कि किस प्रकार परिवार-उत्पत्ति के साथ सेवक-कार्य का योगदान बना रहता है।
व्यावहारिक लेना-देना
पाठ से एक सतह पर यह सिख मिलती है कि ईश्वर की योजना किसी एक बड़े समूह पर नहीं, बल्कि हर परिवार, हर आचरण और हर सदस्य के सहभाग से संचालित होती है। हमारे जीवन में भी पारिवारिक विविधता और एकता के बीच ईश्वर की भूमिका को मान्यता देना चाहिए।
क्रॉस-रेफरेंसे
- कर्म-गणना और परिवार-आधार पर ध्यान केंद्रित करने वाले अनुभागों की दिशा बता देती है; यह संकेत दे सकता है कि कैसे परमेश्वर पुराने और नए संदर्भों में नेतृत्व और धरोहर की रेखाओं को संजोते हैं।
- प्रभु के चयन के क्रम के बारे में विचार, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कौन-सा वंश अगली शिखर-यात्रा में आगे बढ़ता है।
नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के उद्धरण कभी-कभी छोटे-छोटे शब्दों के रूप में उद्धृत होते हैं।